फॉरवर्ड प्रेस

अभिभावकों का समर ब्रेक

जब हम माता-पिता बनते हैं, तब नवजात शिशु के प्रति हम एक अजीब-सा आकर्षण महसूस करते हैं। परंतु जैसे-जैसे समय निकलता जाता है, हम पाते हैं कि हम पर काम का बोझ बढ़ता जा रहा है। हम चिड़चिड़ाने लगते हैं, हर चीज को वैसे ही होते देखना चाहते हैं जैसी हमारी इच्छा है और यहां तक कि कब-जब हमें ऐसा लगता है कि हम अपना मानसिक संतुलन खो रहे हैं, विशेषकर तब, जब बच्चे हमारा ध्यान आकर्षित
करने या खिलौनों के लिए आपस में झगड़ते हैं।

कभी-कभी हमें लगता है कि हमें अभिभावक के तौर पर अपने कर्तव्यों से ब्रेक लेना चाहिए। हम उस चिंतामुक्त दौर में वापस लौटना चाहते हैं जब हम अपने मित्रों के साथ फि ल्में देखते थे, देर रात तक कॉफी  सुड़कते हुए गह्रश्वपे हांकते थे या जब चाहे कहीं भी निकल जाते थे।

और ठीक यही आप इन गर्मियों में भी कर सकते हैं- अरे, अरे! मेरी तरफ ऐसे न देखिए…मैं आपसे यह कतई नहीं कह रही हूं कि आप गर्मियों भर अपने बच्चों को त्याग दें। बिल्कुल नहीं! मैं केवल यह कह रही हूं कि इन गर्मियों में, बच्चों की परीक्षाएं खत्म होने के बाद जब आप अपने बाल नोचने की स्थिति में पहुंच जाएं तब कुछ समय के लिए अपनी भूमिका बदल लें। माता-पिता की अपनी कठिन जिम्मेदारियों से कुछ समय के लिए मुक्त हो जाएं और उस गुजरे वक्त में लौट चलें जब आप मित्रों की दुनिया में रहते थे।

आपको अपने मित्रों के साथ क्या करने में मजा आता था, इसकी एक सूची बनाएं। आपके बच्चे अपने मित्रों के साथ क्या करना पसंद करते हैं, उन्हें उसकी सूची बनाने के लिए कहिए। इन दोनों सूचियों में से वे चीजें चुनिए जो आप एक साथ मिलकर कर सकते हैं। और फिर बाहर निकल जाइए।

मैं आपसे यह नहीं कह रही हूं कि आप अभिभावक की अपनी जिम्मेदारियां त्याग दें और अपने बच्चों को स्वच्छंद छोड़ दें। मेरी सलाह तो केवल इतनी है कि आप उनके साथ मित्रवत व्यवहार करें, जिससे उन्हें लगे कि आप उनका सहारा भी हैं और वे आपके साथ मजा-मौज भी कर सकते हैं।

मित्र होने का अर्थ है एक दूसरे के साथ घूमना-फिरना और एक दूसरे के साथ का आनंद लेना। ऐसा कब-कब होता है जब हम अपने परिवार के साथ घूमते-फिरते हैं? यहां मैं किसी होटल में खाना खाने या पढ़ाई करने या खरीदारी करने या रिश्तेदारों के घर जाने की बात नहीं कर रही हूं। यहां मैं उस तरह साथ घूमने-फिरने की बात कर रही हूं, जैसे मित्र घूमते-फिरते हैं। आइए, इसकी शुरुआत हम इन गर्मियों से करें।

गर्मी की छुट्टियों में सप्ताह का एक दिन इस तरह की गतिविधियों के लिए सुरक्षित कर लीजिए। परिवार के हर सदस्य को अपनी पसंद की गतिविधि चुनने का मौका दीजिए और उस दिन वही कीजिए। यहां महत्वपूर्ण यह नहीं है कि आप क्या कर रहे हैं। बल्कि महत्वपूर्ण यह है कि आप उसे कैसे कर रहे हैं।

अपने बच्चों के साथ मित्रवत् व्यवहार का अर्थ है :

(1) उनका बिना शर्त सम्मान : बच्चे अपने मित्रों के साथ समय बिताना इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि उनके मित्र उन्हें वैसे ही स्वीकार करते हैं, जैसे वे हैं। वे उन पर टीका-टिह्रश्वपणी नहीं करते जबकि हम अभिभावक, बच्चों पर शर्तें थोपते हैं और उन्हें नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं। अपने बच्चों को दिखाइए कि आप उनके साथ मित्रवत् व्यवहार कर सकते हैं और उनका वयस्कों की तरह सम्मान कर सकते हैं। सम्मान देने का अर्थ है उनकी बात को ध्यानपूर्वक सुनना, उन्हें क्या करना है, यह चुनने का अधिकार उन्हें देना और उन पर भरोसा करना।

(2) उन्हें चुनने का अधिकार दीजिए : यह कहना बंद कीजिए कि ‘तुम्हें ऐसा करना पड़ेगा क्योंकि मैं ऐसा कह रहा/रही हूं।’ अपने बच्चे को जो चाहे करने की स्वतंत्रता दीजिए परंतु पहले से तय की गई सीमाओं, जो पूरे परिवार के लिए एक-सी हों, के भीतर।

(3) उन्हें जिम्मेदारी लेने की इजाजत दीजिए : अपने बच्चों को यह मौका दीजिए कि वे जो समय आपके साथ बिताएंगे, उसमें की जाने वाली गतिविधियों और उसके बजट का निर्धारण करें। हमारे जीवन का सबसे अच्छा दौर वह होता है जब हम विद्यार्थी होते हैं। उस समय हमारी
जेबें खाली रहती हैं परंतु मन प्रफुल्लित होता है। इसलिए एक राशि परिवार के हर सदस्य के लिए निर्धारित कर दीजिए और फि र देखिए की
वह अपने बजट का इस्तेमाल किस तरह पूरे परिवार को आनंद देने के लिए करता है।

सबसे बड़ी बात यह है कि जब आप अपने बच्चे के मित्र बन जाते हैं तब आपको भी मजा-मौज करने का मौका मिलता है, आप अपनी गंभीरता का आवरण उतार फेंक सकते हैं और अपनी भावनाओं को खुलकर अभिव्यक्त कर सकते हैं। सारी समस्याओं को सुलझाने की जिम्मेदारी आपकी नहीं होती और ना ही हर घपले के लिए आप जिम्मेदारी होते हैं। आप अपने जीवन के बारे में उन्हें, उनकी उम्र के अनुरूप, चीजें बतासकते हैं और उनसे कह सकते हैं कि जीवन के उतार-चढ़ाव में आप हमेशा उनके मित्र रहेंगे। तो, इन गर्मियों में खूब मजे कीजिए और अपने बच्चों के सबसे अच्छे दोस्त बनिए। यहां यह कहना आवश्यक है कि यह सब कुछ बच्चों की उम्र केअनुरूप किया जाना चाहिए। वे  जितने बड़े हैं, उतनी ही अधिक जिम्मेदारी उन्हें दी जा सकती है और उतनी ही अधिक बातें आप उनसे बांट सकते हैं।

यहां मैं कुछ ऐसी गतिविधियों के बारे में बता रही हूं जिन्हें आप परिवार सहित कर सकते हैं :

(1) घर को नए सिरे से सजाना या अनुपयोगी चीजों को हटाना। पूरा परिवार मिल-बैठकर यह सोच सकता है कि बिना किसी बाहरी सहायता के, घर को एक ‘नया रूप’ कैसे दिया जा सकता है। सभी के सुझावों की एक सूची बना लीजिए और उसके बाद या तो वोट के आधार  या फिर आम राय बनाकर यह तय कीजिए कि उनमें से किन पर अमल किया जाना है। एक बजट निर्धारित कर दीजिए। उद्देश्य है जो कुछ उपलब्ध है, उसका रचनात्मक इस्तेमाल।

(2) किसी रमणीक स्थान पर छुट्टी मनाना। अपने रोजाना के काम-धंधों से कुछ दिनों के लिए मुक्ति पाईए और किसी ऐसी जगह जाइए जहां आप प्रकृति के नजदीक पहुंच सकें और ईश्वर की कृतियों का आनंद ले सकें। ऐसी जगह चुनिए, जिसमें घर के सभी सदस्यों की दिलचस्पी हो। कौन कहां जाना चाहता है, आपका बजटकितना है और आपकी विशेष आवश्यकताएं क्या हैं, यह तय करेंगी की आप कहां जाएंगे। एक साथ बहुत सारे स्थानों की यात्रा करने की कोशिश न करिए क्योंकि इससे आप छुट्टी में भी तनावमुक्त नहीं रह सकेंगे।

(3) अपने से कमजोरों की मदद करने में समय बिताना। यह एक ऐसी गतिविधि है जो जीवन के प्रति आपका दृष्टिकोण बदल सकती है। किसी ऐसी संस्था, जिसमें दुखी या गरीब लोग या बच्चे रहते हों, में कुछ दिन सेवा कार्य करने से आपके बच्चे यह सीख सकेंगे कि
जीवन में उन्हें जो कुछ मिला है वह कितना महत्वपूर्ण है। वे शिकायतें करना कम कर देंगे और जो उनके पास है, उसके लिए आभारी होना और दूसरों की मदद करना सीखेंगे।

(4) अपने शहर को नए सिरे से खोजना हर सदस्य को मौका दीजिए कि आपके शहर के भीतर किसी स्थान की यात्रा की योजना बनाए। वह कोई नई जगह भी हो सकती है और कोई ऐसी जगह भी जो आपकी पुरानी यादों को ताजा कर दे। लक्ष्य केवल यह होना चाहिए कि सभी को आनंद आए।

 

(फारवर्ड प्रेस के जून, 2014 अंक में प्रकाशित)


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