फॉरवर्ड प्रेस

फारवर्ड प्रेस आवरण कथा जिसे शर्मीला रेगे ने लिख ही दिया

दिनांक : मंगलवार, 11 दिसंबर, 2012

विषय : अग्रेषित : अत्यावश्यक : सावित्री बाई फुले की विरासत पर फारवर्ड प्रेस के जनवरी 2013 अंक की आवरणकथा

प्रिय शर्मीला,

मेरे अनुरोध पर फारवर्ड प्रेस की प्रत्यक्ष (हमारी पहली पसंद) या अप्रत्यक्ष (सराहनीय) मदद करने की स्वीकृति देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। आपने बहुत कम समय होने पर भी यह काम करने की स्वीकृति दी। महाराष्ट्र के युवा अध्यापकों/शिक्षाविदें के साथ मिलकर चलाई जा रही यह परियोजना कैसे सावित्री बाई की विरासत/क्रांति का हिस्सा है, इसकी रपट बहुत बढिय़ा रहेगी (‘सावित्री बाई क्यों मुस्कुरा रही हैं ?’)। दूसरी ओर, आज ही आईआईडीएस द्वारा सात (मुख्यत: बीमारू) राज्यों में स्थित 122 स्कूलों के नवंबर 2011 से मार्च 2012 के बीच किए गए सर्वेक्षण की रपट भी आई है। स्पष्टत: दलितों के हालात अब भी ठीक नहीं हैं।

मुझे उम्मीद है कि आपकी ओर से मुझे जल्दी से जल्दी और सकारात्मक उत्तर प्राप्त होगा।

सादर,

आयवन कोस्का

प्रकाशक व मुख्य संपादक

फारवर्ड प्रेस


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