फॉरवर्ड प्रेस

आंबेडकर की ‘घर वापसी’ की संघी चाहत

आरएसएस, बीआर आंबेडकर के ‘बहुआयामी व्यक्तित्व’ में हिंदुत्व की कोई निशानी ढूंढने में व्यस्त है। दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा की शर्मनाक हार के बाद और आंबेडकर की 125वीं जयंती के परिप्रेक्ष्य में संघ ने इस दिशा में अपने प्रयास तेज कर दिये हैं। ऐसा बताया जाता है कि संघ अपने पूज्यनीयों की सूची में आंबेडकर को भी शामिल करना चाहता है।

पिछले दिसंबर में संघ के संयुक्त सचिव कृष्ण गोपाल ने भारतीय लोक प्रशासन संस्थान में व्याख्यान दिया। वहां उन्होंने हमारे संविधान निर्माता को राष्ट्रवादी, कम्युनिस्ट-विरोधी, धर्मनिष्ठ हिंदू (जिसे हिंदू धर्म में अटूट आस्था थी और जिसके नजदीकी मित्र ब्राह्मण थे) व मुस्लिम-विरोधी (जिसने उन दलितों का ‘शुद्धिकरण करवाने का वायदा किया था, जिन्होंने हैदराबाद राज्य मे सन् 1947-48 में इस्लाम अंगीकार कर लिया था’) बताया।

संघ अपने पूज्यनीयों की सूची में आंबेडकर को भी शामिल करना चाहता है

आज के हैदराबाद में, जहां एक ओर असादुद्दीन ओवैसी की एमआईएम, हिंदुत्व से मुकाबला करने के लिए दलितों को लामबंद कर, स्वयं को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करना चाहती है वहीं आरएसएस भी बिहार और उत्तरप्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों में जीत हासिल करने के लिए दलितों को साथ लेना चाहता है। कृष्ण गोपाल सहित संघ के सभी नेता जानते हैं कि दलितों का दिल जीतने का सबसे अच्छा तरीका है उनके आदर्श पुरूष को अपना बना लेना।

भारतीय लोक प्रशासन संस्थान में गोपाल के व्याख्यान के आयोजकों ने उनके द्वारा लिखित पर्चे ‘राष्ट्रपुरूष बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर’ की प्रतियां भी बांटी, जिसमें आंबेडकर की आरएसएस के संस्थापक केबी हेडगेवार से ‘गहरी मित्रता’ की चर्चा की गई है। ‘‘वे एक देशभक्त थे और अपने जन्म से लेकर मृत्यु तक, अपने दर्शन और विश्वदृष्टि में हिंदू थे’’ गोपाल ने कहा।

‘पायोनियर’ के अनुसार, ‘‘14 अप्रैल से शुरू होने वाले डॉ. भीमराव आंबेडकर 125वीं जयंती समारोह के दौरान आरएसएस यह प्रचार जमकर करने वाला है कि दलितों को उनकी आर्थिक व सामाजिक उन्नति के लिए हिंदू समाज में घुलमिल जाना चाहिए।’’ समाचारपत्र के अनुसार, आरएसएस के मुखपत्र-पाञ्जन्य व आर्गनाइजर-आंबेडकर पर विशेष संस्करण निकालने की तैयारी कर रहे हैं।

आरएसएस के अनुषांगिक संगठन सेवाभारती ने 4 से 6 अप्रैल तक दिल्ली में एक सम्मेलन आयोजित किया है, जिसका मुख्य एजेण्डा सामाजिक दृष्टि से वंचित वर्गों को स्वास्थ्य व शिक्षा संबंधी सुविधाएं कैसे उपलब्ध करवाई जाएं, इस पर विचार करना है। इस सम्मेलन में अमृतानंदमयी देवी, जगतगुरू शंकाराचार्य, फिल्म निर्माता सुभाष घई व कई शिक्षाविदों सहित लगभग 4,000 लोगों के भाग लेने की संभावना है। सम्मेलन को विप्रो के अध्यक्ष अज़ीम प्रेमजी भी संबोधित करेंगे।

अपने पर्चे की भूमिका में कृष्ण गोपाल बताते हैं कि सेवाभारती के हजारों कार्यकर्ता, दलितों के मोहल्लों और टोलों में जाकर उनके बीच सामाजिक सद्भाव का संदेश पहुंचा रहे हैं। ज्ञातव्य है कि कृष्ण गोपाल आरएसएस व भाजपा के बीच समन्वय के प्रभारी हैं और नागपुर में हाल में आयोजित संघ की वार्षिक बैठक में उनका कार्यकाल बढ़ाया गया था।

 

फारवर्ड प्रेस के अप्रैल, 2015 अंक में प्रकाशित