फॉरवर्ड प्रेस

पाखंड छोड़ वैज्ञानिक जीवन पद्धति अपनाने पर जोर

श्रमशील लोगों की उन्नति में सबसे बड़ा रोड़ा ब्राह्मणवाद पर आधारित आडम्बर हैं। आवश्यकता इस बात की है कि आडम्बरों को छोड़ जीवन के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाई जाय। इसी आह्वान के साथ पिछले दिनों 10-11 जून 2017 को बिहार के मुजफ्फरपुर में देश के सबसे बङा मानववादी संगठन अर्जक संघ का दो दिवसीय प्रांतीय सम्मेलन संपन्न हुआ। सम्मेलन की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष अरूण कुमार गुप्ता ने की।

सम्मेलन में ब्राह्मणवादी व्यवस्था को पूर्णरूपेण नकार कर मानववादी व्यवस्था लाने, श्रम को महत्ता देने, श्रमशील कौमों की उन्नति करने, समतामूलक समाज बनाने और लोगों में वैज्ञानिक सोच पैदा करने के संकल्प को दुहराया गया तथा समान, निशुल्क, अनिवार्य और वैज्ञानिक शिक्षा की मांगों को लेकर संघर्ष आगे भी करते रहने का संकल्प लिया गया।

सम्मेलन का उदघाटन करते हुए संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष औऱ कानपुर के जाने माने चार्टर्ड एकाउंटेंट एस.आर. सिंह ने कहा कि देश और समाज में सुख-समृद्धि, अमन और शान्ति के लिए मानववाद की आवश्यकता है। अर्जक संघ इसके लिए सतत प्रयत्नशील रहा है। उद्देश्यों की पूर्ति के लिए पहले से व्याप्त ब्राह्मणवादी विचार, आचार, संस्कार और त्योहार को नकारकर अर्जक संघ ने मानववादी विचार, आचार, संस्कार और त्योहार सर्वसम्मति से प्रतिपादित कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि मानववाद लाने में वर्णव्यवस्था औऱ तथाकथित धार्मिक ग्रंथ बहुत बड़ा रोड़ा है।

मुख्य अतिथि के रूप में शोषित समाज दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुनी राम शास्त्री ने कहा कि महात्मा जोती राव फुले और डा. अंबेडकर के बाद 60 के दशक में जाने माने मानववादी और समाजवादी विचारक रामस्वरूप वर्मा ने समाज को नजदीक से देखा, परखा और अर्जक संघ की स्थापना करके देश और समाज को नयी दिशा देने का प्रयास किया। आज अर्जक संघ ही ऐसा सामाजिक संगठन है जो खुलकर ब्राह्मणवाद की कलई खोल रहा है तथा लोगों को जागरूक कर रहा है। उन्होंने कहा कि शोषित समाज दल, अर्जक संघ की व्यवस्था का समर्थन करता है और उसे लागू करने में हर तरह का सहयोग प्रदान करता है। हमें वोट की चिंता नहीं है, बल्कि सामाजिक, राजनातिक व्यवस्था को बदलने की चिंता है। उन्होंने यह भी कहा कि तमाम विपक्षी पार्टियों को भी चाहिए कि आरएसएस के विकल्प के तौर पर अर्जक संघ को आगे लाएं।

इस मौके पर पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुनाथ सिंह यादव ने कहा कि हमारे विकास में सबसे बङा बाधक ब्राह्मणवादी व्यवस्था रहा है। आज भी कुछ राजनेता, मीडिया और स्वार्थी लोग धार्मिक आस्था के नाम पर ब्राह्मणवावाद को बढ़ावा दे रहे हैं जो देश और समाज के लिए घातक है। उन्होंने यह भी कहा कि पुरूष प्रधान समाज में नारी को वर्षौं से उपेक्षित रखा गया है उसका शोषण किया गया है। नारी के उत्थान के बगैर समतामूलक समाज की स्थापना बेइमानी होगी। अर्जक संघ पुरूष-नारी समानता का पक्षधर रहा है।

वहीं अर्जक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अरूण कुमार गुप्ता ने कहा कि 1 जून 1968 को रामस्वरूप वर्मा ने अर्जक संघ की स्थापना करके समाज में व्याप्त अंधविश्वास और सामाजिक-सांस्कृतिक तथा धार्मिक कुरीतियों को सामने लाने का काम किया है। हम उनके कारवां को आगे बढ़ाने के लिए कृतसंकल्पित हैं। जबकि बिहार सरकार के पूर्व मंत्री बसावन भगत ने अर्जक संघ के द्वारा की जा रही कार्यकलापों की प्रशंसा की और कहा कि ब्राह्मणवादी शक्तियों को परास्त करने में हम हमेशा अर्जक संघ के साथ रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अर्जक पद्धति से होनेवाला शादी और श्राद्ध समाज में काफी लोकप्रिय हो रहा है। हमलोग उसे अपना रहे रहे हैं।

वहीं राष्ट्रीय महामंत्री सियाराम महतो ने अर्जक संघ के कार्यकलापों की चर्चा करते हुए कहा कि देश में और भी कई लोग पिछङें, दलितों के विकास के नाम पर संगठन चला रहे हैं, जो मानववाद के नाम पर ब्राह्मणवाद फैला रहे हैं, लोगों को उनसे सावधान रहने की जरूरत है। अर्जक साहित्य पढ़कर सत्यता को जाना जा सकता है। उन्होंने अर्जक साहित्य को जन-जन तक पहुंचाने की अपील की।

अर्जक साप्ताहिक कानपुर के संपादक रामबाबू कन्नौजिया ने समाज के विषमता की चर्चा करते हुए कहा कि आज देश में एक तरह का स्कूल, विज्ञान पर आधारित पाठ्यक्रम, सारी शिक्षा मुफ्त, अनिवार्य करने की आवश्यकता है।

सम्मेलन को अन्य अर्जकों के अलावा प्रदेश महामंत्री अधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद सिंह, रामराज यादव, नरेन्द्र कुमार, राजधारी राम, रामेश्वर भगत, सूरज कुशवाहा, हीरालाल चौधरी, वीरेन्द्र राम, रामपदार्थ पासवान, पूनम विश्वभारती, गौतम गुप्ता,दिनेश कुमार राजरत्न राम, दीपक पासवान आदि ने भी ब्राह्मणवाद को उखाङ फेंकने और अर्जक पद्धति को लागू करने पर बल दिया। इस मौके पर अर्जक संघ की सांस्कृतिक टीम में शामिल जंगबहादूर सिंह, बालेश्वर प्रसाद,ललिता कुमारी, पूनम कुमारी, आदि कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में व्याप्त कुरीतियों को हटाने पर बल दिया।


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