आंबेडकर का नाम लेकर एक हो गए रचना सुमन और सूर्यदेव, देखते रह गए मनुवादी

द्विजों के संस्कारों को आज के बहुजन नकार रहे हैं। अर्जक संघ सहित अनेक आंबेडकरवादी संस्थायें इस दिशा में कार्य कर रही हैं। बीते 14 अप्रैल को रचना सुमन और सूर्यदेव जयसिंह ने खास अंदाज में शादी कर आंबेडकर की जन्मस्थली महू में एक नजीर पेश किया। बता रहे हैं नवल किशोर कुमार :

बीते 14 अप्रैल 2018 का दिन। पूरे देश में बाबा साहब डॉ. भीम राव आंबेडकर को कृतज्ञतापूर्वक पुष्पांजलि अर्पित की जा रही थी। देश की राजधानी दिल्ली से लेकर सुदूर गांवों तक। कहीं राजनीति, कहीं श्रद्धा, तो कहीं बाबा साहब के सिद्धांतों पर चलने का संकल्प लेते लोग। वहीं उनकी जन्मस्थली महू की रौनक देखते बन रही थी। सफेद कपड़ों में लोग सड़क पर थे। पुरूषों ने माथे पर नीली पगड़ी बांध रखी थी तो महिलाओं की सफेद साड़ी की नीली पट्टी। बैंड-बाजे भी थे। सब नाच रहे थे। जो देख रहा था, वह बाबा साहब की जयंती के मौके पर निकाली गयी झांकी समझ रहा था। लेकिन हो कुछ और रहा था। पेशे से इंजीनियर रचना सुमन और  इंजीनियर सूर्यदेव जयसिंह शादी के बंधन में बंधने जा रहे थे। दुल्हा और दुल्हन भी खुशी में झूम रहे थे। सब सोच रहे थे कि शादी में कोई दुल्हन ऐसे नाचती है क्या? लेकिन यह कोई हिन्दूवादी विवाह नहीं था। इसमें हिन्दूवादी जड़ताओं को समाप्त करने का संकल्प था। भला आंबेडकर को मानने वाली दुल्हन घुंघट ओढ़े अपना मुंह क्यों छिपाये।

डॉ. आंबेडकर की जन्मस्थली महू में बने स्मारक स्थल के बाहर नवदंपत्ति

सूर्यदेव सिंह मध्यप्रदेश सरकार के विद्युत  विभाग में सहायक इंजीनियर के पद पर पदस्थापित हैं। वे मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिला के खैजुराखुर्द गांव के रहने वाली कोमल और भूरेलाल चौधरी के पुत्र हैं। वहीं रचना सुमन  मध्यप्रदेश सरकार के नगरीय प्रशासन के अधीन सहायक अभियंता के रूप में पदस्थापित हैं। वे धार जिले के महेंद्र सुमन और कृष्णा की बेटी हैं। इन दोनों की शादी अरेंज तरीके से तय हुई। दोनों पक्षों के परिजनों ने मिलजुलकर 14 अप्रैल यानी बाबा साहब की जयंती के दिन विवाह का दिन तय किया। न कोई पंडित न कोई कर्मकांड। लोग इस खुशी में शामिल हो सकें, इसके लिए उन्हें आमंत्रित किया गया था।

आंबेडकर की तस्वीर को हाथ में लेकर एक-दूसरे के हो गये रचना सुमन और सूर्यदेव जयसिंह

आमंत्रण कार्ड भी कर्मकांड वाले कार्ड से बिल्कुल अलग। नमो बुद्धाय और जय  भीम का नारा। आदर्श विवाह का नमूना पेश करते हुए कार्ड पर लिखा गया – “महामानव तथागत बुद्ध के प्रज्ञा, प्रकाश और बोधिसत्त बाबा साहब डॉ. भीम राव आंबेडकर के कर्तव्य को नमन करते हुए संपन्न होने वाले आदर्श विवाह के अवसर पर आपकी सपरिवार उपस्थिति उपासक-उपासिका को मंगल आशीष प्रदान करें, यही मंगल कामना है।” उपासक यानी वर और उपासिका यानी दुल्हन।

तय कार्यक्रमों के तहत 14 अप्रैल 2018 को बारात निकली। लक्ष्य था महू का मोती महल टॉकिज परिसर। वहीं बाबा साहब को साक्षी मानकर उपासिका रचना सुमन और उपासक सूर्यदेव जय सिंह ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाया। इसके बाद बारात काफिले में बदल गयी बाबा साहब की जन्मस्थली की ओर। बैंड-बाजे के साथ इस काफिले में सैंकड़ों की संख्या में लोग थे। सभी के हाथों में बाबा साहब की तस्वीर।

काफिला के रूप में निकली बारात, सभी के हाथ में थी बाबा साहब की तस्वीर

बाबा साहब की जन्मस्थली में बाबा साहब की प्रतिमा के समक्ष नवदंपत्ति ने अपना जीवन जीने के संकल्प को दुहराया और अपने शादी समारोह में शामिल सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।

बहरहाल अपनी शादी के बारे में रचना सुमन और सूर्यदेव जय सिंह ने बताया कि उन्होंने अपनी शादी को आदर्श विवाह के रूप में करने का फैसला किया। इसमें उनके परिजन भी शामिल हुए। इसका मकसद समाज में फैली कुप्रथाओं एवं कुरीतियों मसलन दहेज प्रथा और फिजुलखर्ची वाली परंपराओं को समाप्त करना है। उन्होंने बताया कि उनकी शादी में फिजुलखर्ची नहीं की गयी और इस प्रकार बचे पांच लाख रुपए का उपयोग वे एक स्कूल खोलने के लिए करेंगे। इस स्कूल में बच्चों को निशुल्क शिक्षा दी जाएगी।


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