कॉमनवेल्थ गेम्स में गूंजेंगे फारवर्ड प्रेस के हिंदी संपादक के गीत

फारवर्ड प्रेस की संपादकीय विभाग के तीन सदस्यों ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। एक ओर जहां हिंदी संपादक नवल किशोर कुमार का एक गीत कॉमनवेल्थ गेम्स, 2018 में प्रस्तुत होगा तो दूसरी ओर हमारे फ्रीलांस संवाददाता  अनुराग भास्कर और अरविंद सागर ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में परचम लहराया है

अागामी 4-15 अप्रैल के बीच अस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट शहर में कॉमनवेल्थ गेम्स के समारोह में प्रतियोगिता में शामिल सभी देशों की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये जाएंगे। इसमें भारत की तरफ से प्रख्यात लोक गायिका कल्पना पटोवारी भी भाग लेंगी और वे फारवर्ड प्रेस के हिंदी संपादक नवल किशोर कुमार द्वारा लिखा गया गीत प्रस्तुत करेंगी। इसके अतिरिक्त फारवर्ड प्रेस के फ्रीलांस संवाददाता अनुराग भास्कर का चयन जहां हावर्ड यूनिवर्सिटी में कानून का अध्ययन करने के लिए हुआ है वहीं अरविंद सागर ने फारवर्ड प्रेस की पत्रकारिता पर शोध कर एमफिल की डिग्री हासिल की है।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 में प्रख्यात लोक गायिका कल्पना पटोवारी की आवाज में गूंजेंगा ‘तिरंगा प्यारा’ गीत

कॉमनवेल्थ गेम्स, 2018 के समारोह में  प्रस्तुत किए जाने वाले नवल किशोर कुमार द्वारा लिखित गीत का शीर्षक ‘तिरंगा प्यारा’ है, जिसकी थीम भारत की नदियों और संबंधित संस्कृतियों पर आधारित है। गीत की शुरूआत आसामी लोकगीत देऊड़ी गीत से होती है। इसके बाद भिखारी ठाकुर और बाबू रघुवीर नारायण के भोजपुरी गीत को शामिल किया गया है। वहीं गीत के मुख्य हिस्से का लेखन नवल किशोर कुमार ने किया है।  गीत को कल्पना पटोवारी के साथ बीरेन देवड़ी और सेतु सिंह ने आवाज दी है। तकनीकी सहयोगियों में काकुल भारली, संग्राम लोहार और निप्पू खुंद आदि शामिल हैं। इस गीत को म्यूजिक बॉक्स नामक संगीत कंपनी ने तैयार किया है। संगीत कंपनी ने अपने यूट्यूब चैनल उपरोक्त गीत का प्रोमो जारी कर दिया है (देखें वीडियो)।

नवल किशोर कुमार मूलरूप से बिहार की राजधानी पटना के रहने वाले हैं। कंप्यूटर टेक्नोक्रेट के रूप में कैरियर की शुरू करने वाले नवल ने 2007 में पत्रकारिता की शुरूआत की। प्रारंभ में वे पटना से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र सन्मार्ग और आज अखबार से जुड़े। फारवर्ड प्रेस से उनका जुड़ाव 2012 से है। उन्हें बिहार के पहले हिन्दी न्यूज वेब पोर्टल ‘अपना बिहार डॉट ओआरजी’ की स्थापना (2007) करने का भी श्रेय प्राप्त है।

नवल किशोर कुमार, संपादक (हिंदी), फारवर्ड प्रेस

गौरतलब है कि चर्चित लोकगायिका कल्पना पटोवारी मूल रूप से आसाम के गुवाहाटी जिले के बरपेटा की रहने वाली हैं। उन्होंने तीस से अधिक भाषाओं में गीत गाये हैं। उनकी विशेष पहचान भोजपुरी लोकगायिका के रूप में है। उन्होंने द लीगेशी ऑफ भिखारी ठाकुर के जरिए भोजपुरी के शेक्सपीयर भिखारी ठाकुर के गीतों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुत किया। साथ ही एंथोलॉजी ऑफ बिरहा के जरिए उन्होंने बिहार और उत्तरप्रदेश के लोक संगीत के इस विधा के विभिन्न आयामों को समग्रता में पेश किया है।

हार्वर्ड जाएंगे फारवर्ड प्रेस के नियमित लेखक अनुराग भास्कर

फारवर्ड प्रेस के फ्रीलांस संवाददाता अनुराग भास्कर का हुआ है हार्वर्ड विश्वविद्यालय में चयन

वहीं फारवर्ड प्रेस टीम के लिए सुखद यह भी है कि हमारे फ्रीलांस संवाददाता अनुराग भास्कर हार्वर्ड विश्वविद्यालय में कानून की पढ़ाई के चयनित हुए हैं। अनुराग उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में रहते हैं और वहीं 2012-17 के दौरान उन्होंने एलएलबी की पढ़ाई की। हार्वर्ड विश्वविद्यालय में कानून की पढ़ाई करने के संबंध में अनुराग ने बताया कि बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर उनके प्रेरणाश्रोत हैं। अनुराग बताते हैं कि उन्हें सबसे अधिक चुनौती जानकारी का अभाव नहीं रहने के कारण मिली। उनके मुताबिक वे अपने परिवार में पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने कानून की पढ़ाई की। सामान्य तौर पर भारत में बहुजन युवाओं को इस समस्या से दो-चार होना पड़ता है।

अरविन्द सागर ने किया है फारवर्ड प्रेस पर शोध

फारवर्ड प्रेस के फ्रीलांस संवाददाता अरविन्द सागर का हुआ है हार्वर्ड विश्वविद्यालय में चयन

फारवर्ड प्रेस के एक अन्य फ्रीलांस संवाददाता अरविंद सागर को भी पिछले दिनों महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा ने पिछले दिनों पत्रकारिता में एमफिल की डिग्री अवार्ड की। एमफिल के लिए उनका विषय था – ‘फारवर्ड प्रेस एवं दलितोन्मुखी पत्रकारिता’। अरविंद  बताते हैं कि अपने शोध के दौरान उन्होंने दलितों के लिए पत्रकारिता के विभिन्न आयामों का अध्ययन किया और इस कड़ी में निष्कर्ष पर पहुंचे कि फारवर्ड प्रेस द्वारा अल्पावधि में ही एक मानक स्थापित किया गया है जो बहुजनों के सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक विषयों के लिहाज से महत्वपूर्ण है।


फारवर्ड प्रेस वेब पोर्टल के अतिरिक्‍त बहुजन मुद्दों की पुस्‍तकों का प्रकाशक भी है। एफपी बुक्‍स के नाम से जारी होने वाली ये किताबें बहुजन (दलित, ओबीसी, आदिवासी, घुमंतु, पसमांदा समुदाय) तबकों के साहित्‍य, सस्‍क‍ृति व सामाजिक-राजनीति की व्‍यापक समस्‍याओं के साथ-साथ इसके सूक्ष्म पहलुओं को भी गहराई से उजागर करती हैं। एफपी बुक्‍स की सूची जानने अथवा किताबें मंगवाने के लिए संपर्क करें। मोबाइल : +919968527911, ईमेल : info@forwardmagazine.in

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