धमकी भरे फोन कॉल्स आने का सिलसिला जारी, माले, राजद, रालोसपा व कांग्रेस ने की निंदा

रणवीर सेना के समर्थकों द्वारा फारवर्ड प्रेस के हिंदी-संपादक नवल किशोर कुमार को जान मारने की धमकी दिये जाने के मामले को लेकर विभिन्न  राजनीतिक दलों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। भाकपा-माले, राजद, रालोसपा और कांग्रेस ने इस घटना की निंदा की है और इसे मीडिया पर हमला करार दिया है :

गत 1 जून को फारवर्ड प्रेस के हिंदी-संपादक नवल किशोर कुमार ने बरमेश्वर मुखिया के उन समर्थकों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई  है, जिन्होंने उन्हें जान मारने तथा परिजनों के खिलाफ अभद्रता करने की धमकी दी थी। इस बीच रणवीर सेना के इस कृत्य के खिलाफ बिहार के कई राजनीतिक दलों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। दूसरी ओर रणवीर सेना के सदस्यों ने भोजपुर के खोपिरा गांव में बरमेश्वर मुखिया की प्रतिमा स्थापित कर दी  गई है।

नवल किशोर कुमार, हिंदी संपादक, फारवर्ड प्रेस

ग़ौरतलब है कि बीते 27 मई 2018 को नवल ने बरमेश्वर मुखिया की प्रतिमा स्थापित करने के खिलाफ एक टिप्पणी लिखी थी। इसके बाद उनके फेसबुक पोस्ट पर रणवीर सेना के समर्थक टूट पड़े। अश्लील और शर्मसार करने वाली भाषा के इस्तेमाल के साथ कइयों ने उन्हें फोन कर  जान से मारने की धमकी दी, तो कइयों ने उनके घर के महिला सदस्यों के साथ बलात्कार की। रणवीर सेना के कथित सदस्यों द्वारा दी गयी धमकी पर भाकपा-माले के राज्य सचिव कुणाल ने कहा कि उनकी पार्टी “बिहार की भाजपा-संघ समर्थक ताकतों द्वारा सोशल मीडिया पर मिथ्या प्रचार अभियान तथा परिजनों से बलात्कार की धमकी आदि ओछी हरकतों की तीखी निंदा करती है और इस तरह की ताकतों के खिलाफ एकताबद्ध संघर्ष की अपील करती है।” उन्होंने कहा कि “90 के दशक में 300 से अधिक दलित-गरीबों की निर्मम हत्या और दर्जनों जनसंहार के मुख्य आरोपी आदमखोर बरमेश्वर मुखिया की मूर्ति लगाने का क्या औचित्य है? जब नवल कुमार ने इसका विरोध किया, तो संघियों ने अपनी आदत के मुताबिक उन पर हमला कर दिया।”

कुणाल ने कहा कि “इस मूर्ति के अनावरण में भाजपा-जदयू के बड़े नेताओं के शामिल होने की चर्चा है। उन्होंने यह भी कहा कि  ऐसे आदमखोर प्रतीकों के जरिए भाजपा बिहार में सामंती-सांप्रदायिक ताकतों का मनोबल बढ़ाने का काम कर रही है और पूरे बिहार में दलित-गरीबों के खिलाफ माहौल बना रही है। हमारी पार्टी भाजपा के इस प्रकार के मंसूबे को कभी कामयाब नहीं होने देगी।”

वहीं, बिहार में मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल द्वारा ट्वीट किया गया है। राजद की ओर से कहा गया है – “नीतीश सरकार के शह और कुछ सवर्ण सरकारी अधिकारियों के समर्थन से बिहार में वहशी संगठन रणवीर सेना को पुनर्जीवित करने का प्रयास जोरों पर है।”

बिहार के लक्ष्मणपुर बाथे में 30 नवंबर और 1 दिसंबर, 1997 की रात हुए नरसंहार में रणवीर सेना ने 58 लोगों की हत्या की थी। मारे गये लोगों की स्मृति में बनाया गया स्मारक

बिहार कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता सह पूर्व विधान पार्षद डॉ. हरखू झा ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि “बरमेश्वर मुखिया कोई आदर्श पुरुष नहीं थे। एक संपादक को जान मारने की धमकी देना कहीं से भी उचित नहीं है। इसकी निंदा की जानी चाहिए।” वहीं, पूर्व विधान पार्षद सह प्रख्यात साहित्यकार प्रेम कुमार मणि ने कहा कि “मीडिया पर हमला करने का मतलब है कि अभिव्यक्ति की आज़ादी को खत्म किया जा रहा है।”

रणवीर सेना के सदस्यों द्वारा दी जा रही धमकी दिये जाने पर बिहार में सत्तासीन एनडीए के घटक राष्ट्रीय लोकतांत्रिक समता पार्टी के प्रदेश महासचिव राम बिहारी सिंह ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इस घटना की जितनी निंदा की जाए कम है।

खबर लिखे जाने तक नवल किशोर कुमार को फेसबुक और मोबाइल फोन पर लगातार धमकियां दी जा रही हैं। पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई अभी तक नहीं की गई है।

(कॉपी एडिटर – प्रेम बरेलवी)


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