जन्मदिन के मौके पर दलित युवा ले रहे जाति के विनाश का संकल्प

आज बहुजन युवा परिवर्तन के सारथी बन रहे हैं। अपने लघु प्रयासों के जरिए ही वे समाज को नया संदेश भी दे रहे हैं। सामूहिक रूप से अपने मित्रों का जन्मदिन मनाना मानवीय रिश्तों को मजबूत तो बनाता ही है, बाबा साहेब के सिद्धांतों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता इस बात की ताकीद करती है कि शोषण और भेदभाव पर आधारित सामाजिक व्यवस्था की बेड़ियां अवश्य टूटेंगी

इक्कीसवीं सदी के दूसरे दशक में जहां एक ओर वैश्विक स्तर पर कल तक स्थापित महानायकों की नीतियों और सिद्धांतों पर सवाल खड़े हो रहे हैं, वहीं बाबा साहेब की प्रासंगिकता बढ़ती ही जा रही है। देश के बहुजन युवा बाबा साहेब के बताये रास्ते पर चलने को तैयार दिख रहे हैं। अपनी इस भावना की अभिव्यक्ति वे व्यक्तिगत स्तर से अधिक सामूहिकता में कर रहे हैं, यह निस्संदेह बेहतर समाज के निर्माण की दिशा में सकारात्मक संकेत है।

सामूहिक रूप से अपना जन्मदिन मनाते और तोहफे में ‘जाति का विनाश’ देते आंबेडरवादी युवा

हाल ही में उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले, जो कि दिल्ली के एनसीआर का हिस्सा है, में आंबेडकरवादी नौजवानों ने सामूहिक रूप से जन्मदिन मनाने की नई परंपरा शुरू की है। वे प्रत्येक सप्ताह उन सभी दोस्तों का जन्मदिन मनाते हैं जिनका जन्मदिन उस सप्ताह में पड़ता है। खास बात यह है कि इन युवाओं ने इस मौके पर अपने दोस्तों को बाबा साहेब की कालजयी रचना ‘एनिहिलेशन ऑफ कास्ट’ का हिंदी अनुवाद ‘जाति का विनाश’ और कार्ल मार्क्स का ‘कम्युनिस्ट घोषणा पत्र’ तोहफे में देने का निर्णय लिया हैं, जिसकी शुरूआत ‘जाति का विनाश’ किताब से की गई है। जिसका प्रकाशन फारवर्ड प्रेस बुक्स ने किया है।

पाखंड मुक्त समाज के लिए जाति का विनाश पढ़ना जरुरी

हाल ही में गाजियाबाद के नवयुग मार्केट स्थित आंबेडकर पार्क में अपने पांच साथियों का जन्मदिन सामूहिक रूप से मनाने वाले नन्हेलाल ने बताया कि बाबा साहेब ने शिक्षित होने, संगठित होने और संघर्ष करने का आह्वान किया था। जिन मित्रों का जन्मदिन हम लोगों ने मनाया उनमें गौरव प्रधान, गजेंद्र, प्रसेन्नजित, उमेश, अनिल और मोहित शामिल हैं। हम सभी ने शिक्षा हासिल की है। अब हम संगठित हो रहे हैं और संगठित होकर अपने सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक अधिकारों के लिए संघर्ष करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि बेहतर समाज के निर्माण में हिंदू धर्म की वर्ण व्यवस्था सबसे बड़ी बाधक है जिसपर जाति व्यवस्था टिकी है। जबतक इस जाति व्यवस्था का खात्मा नहीं होगा तबतक हम बहुजनों को हमारा अधिकार नहीं मिल सकेगा।

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फारवर्ड प्रेस बुक्स द्वारा प्रकाशित जाति का विनाश किताब की चर्चा करते हुए नन्हेलाल ने बताया कि यह किताब बेहद सहज भाषा में अनुदित है और इसमें सभी संदर्भ दिये गये हैं जिससे बाबा साहेब के विचारों को समझने में आसानी होती है। इस कारण हम लोगों ने यह निर्णय लिया है कि हम अपने दोस्तों को जन्मदिन के मौके पर यह किताब तोहफे में देंगे। उन्होंने बताया कि गाजियाबाद में ही ढाई सौ से अधिक युवाओं का हमारा समूह है जो सोशल मीडिया आदि से जुड़े हैं। पूर्व में हमलोग अपने महानायकों से जुड़े दिवसों के मौकों पर समारोह मनाते थे। बाद में हम लोगों ने अपना जन्मदिन भी सामूहिक रूप से मनाने का निर्णय लिया।

वहीं गजेंद्र ने बताया कि अपने भारतीय समाज को उसके समग्रता में समझने और उसके बदलने के विज्ञान को समझने के लिए हम दो किताबें अपने दोस्तों को दे रहे हैं। इसमें बाबा साहेब की ‘जाति का विनाश’ और ‘कम्युनिस्ट पार्टी का घोषणा पत्र’ शामिल है। जन्मदिन समारोह के अंत में हमने जाति की बेड़ियों के तोड़ने का संकल्प लिया। हमने नारा लगाया – ‘तोड़ दो, जाति की बेड़ियां दो तोड़, वक्त अब मांग रहा भरपूर जोर’।

(कॉपी एडिटर : सिद्धार्थ)


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