फेसबुक पर द्विजाें ने दी दलितों को गाली, मुकदमा करने पर बहिष्कार की धमकी

केंद्र सरकार द्वारा एससी एसटी एक्ट को मजबूत बनाने संबंधी पहल के बावजूद दलितों के खिलाफ अत्याचार रुक नहीं रहा है। सोशल मीडिया से लेकर सुदूर इलाकों तक में भी उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। राजस्थान के बाड़मेर जिले में दलितों को बहिष्कृत करने की धमकी दी गयी है। यह रिपोर्ट :

राजस्थान के बाड़मेर जिले में दलितों के उत्पीड़न का मामला सामने आया है। खबर है कि इस जिले के कालुडी गाँव में सोशल मीडिया पर लिखे एक पोस्ट के कारण उत्पन्न विवाद के बाद गाँव के ब्राह्मण दलितों को डरा-धमका रहे हैं और उन्हें गाँव से बहिष्कृत करने की धमकी दे रहे हैं। दलितों ने ब्राह्मणों के खिलाफ दो मामले दर्ज कराये हैं। इसमें पहले दर्ज कराये गए मामले में दो नाबालिगों को गिरफ्तार किया गया था, जिन्हें पुलिस ने कोर्ट में पेश किया। अभी तक इस मामले में किसी अन्य व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं किया गया है।

वहीं इस मामले की जांच कर रहे उप पुलिस अधीक्षक विक्रम सिंह ने फॉरवर्ड प्रेस को बताया कि मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि अभी गवाहों के बयान पूरे नहीं हुए हैं और इनके बयान लेने के बाद अनुमति मिलने पर गिरफ्तारी के बारे में कोई कदम उठाया जाएगा। एहतियात के तौर पर गांव में पुलिस तैनात कर दी गई है।

साथ ही राज्य के गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया का बयान भी आया है जिन्होंने कहा है कि इस मामले में उपयुक्त कार्रवाई की जाएगी।

राजस्थान के गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया

सोशल मीडिया में दलितों के खिलाफ अपमानजनक बातें लिखने की घटनायें काफी हो रही हैं। इनमें से कई मामले अदालत में भी पहुँच रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि दलित अब इन अपमानों को मूक होकर नहीं सह रहे हैं और इनके खिलाफ उपलब्ध हर तरह के क़ानूनी उपायों की मदद ले रहे हैं। अभी कुछ दिन पहले ही उत्तराखंड के एक अधिवक्ता को राज्य के अनुसूचित जनजाति के एक अधिकारी के खिलाफ फेसबुक पर अपमानजनक और झूठी बातें लिखने के आरोप में हाईकोर्ट का कोपभाजन बनना पड़ा और कोर्ट ने शपथ के तहत झूठ बोलने का दोषी मानते हुए उस पर 2 लाख रुपए का जुर्माना लगाया था।

एससी एसटी एक्ट को सुप्रीम कोर्ट द्वारा कमजोर किये जाने के विरोध में बीते 2 अप्रैल 2018 को भारत बंद के दौरान दलित (फोटो साभार : रेडिफ डॉट कॉम

बाड़मेर में जिस तरह की खबर आ रही है उसके हिसाब से इस गाँव में मेघवाल और राजपुरोहित समुदायों के बीच विवाद उस समय पैदा हुआ जब ऊंची जातियों के कुछ युवाओं ने दलितों के खिलाफ सोशल मीडिया में जाति को लक्ष्य कर अपमानजनक बातें पोस्ट की। दलित युवाओं ने इनके खिलाफ मामला दर्ज कराया।

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अंग्रेजी अखबार ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में छपी खबर के मुताबिक़ गांव के एक दलित दिनेश ने बताया कि मामला दर्ज कराये जाने के बाद गांव की दबंग ऊंची जाति के लोग (राजपुरोहितों) दलितों पर मामला वापस लेने का दबाव डाल रहे हैं। इन लोगों ने दलितों को धमकाना शुरू कर दिया। दलितों से ऊंची जाति के लोगों ने कहा कि उन्हें गांव से बहिष्कृत कर दिया गया है और उन्हें गांव की सड़कों पर चलने नहीं दिया जाएगा और गांव में अन्य किसी भी तरह की सुविधाओं का प्रयोग नहीं करने दिया जाएगा। इन लोगों ने दलितों को गालियां भी दीं और धमकाया भी।

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे

दलितों ने धमकाए जाने और बहिष्कृत किये जाने की धमकियों के बाद गांव के राजपुरोहितों के खिलाफ आईपीसी और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति क़ानून के तहत जिले के बालोतरा थाने में 16 अगस्त 2018 को एक दूसरा मामला भी दर्ज कराया। इसी गांव के एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब मेघवाल समुदाय को ऊंची जातियों के उत्पीड़न को सहना पड़ रहा है। वे निरंतर ही भय और धमकियों के बीच जी रहे हैं।

इस खबर में एक आरोपी धन सिंह राजपुरोहित ने कहा है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप गलत हैं और जिस दिन यह घटना हुई उस दिन वह गांव में मौजूद नहीं था। खबर में बलोत्रा के थानाध्यक्ष भंवर लाल सीरवी के हवाले से बताया गया है कि दोनों समुदायों के बीच समझौते के प्रयास चल रहे हैं। गांव में पुलिस की तैनाती कर दी गई है।

(कॉपी संपादन : एफपी डेस्क)


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