झारखंड और छत्तीसगढ में ईसाई मिशनरियों पर गिरी सरकारी गाज

पत्थलगड़ी आंदोलन ने झारखंड और छत्तीसगढ़ में सरकारी तंत्र की नींद हराम कर दी है। इसके दमन के सारे उपाय अब तक विफल साबित हुए हैं। लिहाजा संस्थाओं पर छापेमारी का नया तरीका अमल में लाया गया है। सवाल यह भी है कि केवल ईसाई-मिशनरी से जुड़े स्वयंसेवी संस्थाओं पर ही छापेमारी क्यों? विशद कुमार की रिपोर्ट :

झारखंड के 88 एनजीओ के दफ्तरों पर सीआईडी का छापा

झारखंड और छत्तीसगढ़ में पत्थलगड़ी आंदोलन का दमन करने के लिए सरकारें तमाम उपाय कर रही हैं। इस क्रम में पहले निर्दोष आदिवासी युवाओं को झूठे मुकदमाें में फंसाया गया और जब बुद्धिजीवियों ने सरकार के इस दमनकारी नीति का विरोध किया तो उनके उपर भी देशद्रोह का मुकदमा थोप दिया गया। अब बारी उन संस्थाओं की है जिस पर आदिवासियों का समर्थन करने का आरोप दोनों राज्यों की सरकारें लगा रही हैं। इस कड़ी में झारखंड में 88 स्वयंसेवी संस्थाओं के दफ्तरों में सीआईडी ने छापेमारी को अंजाम दिया। वहीं छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में मिशनरी छात्रावासों की जांच की जा रही है।

बता दें कि एफसीआरए (फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट) के तहत विदेश से चंदे के रूप में मिलने वाले करोड़ों रुपये के दुरुपयोग मामले में सीआईडी की टीम ने पिछले 10 अगस्त को रांची के 37 एनजीओ में एक साथ छापेमारी की है। सीआइडी के एडीजी अजय कुमार सिंह के आदेश पर अलग-अलग गठित इंस्पेक्टर-दारोगा व पुलिसकर्मियों की 38 टीम बनाई गई थीं, जो प्रत्येक एनजीओ में पहुंची और वहां तलाशी ली।

एडीजी सीआईडी अजय कुमार सिंह के अनुसार मिशनरीज से जुड़े एनजीओ में जहां विदेशी फंड आते हैं, उनकी जांच चल रही है।  कथित तौर राज्य में ऐसे 88 एनजीओ की जांच की जा रही है।

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कहने को तो पिछले कई दिनों से सीआईडी के प्रक्षेत्रीय डीएसपी के निर्देशन में प्रदेश के सभी जिलों में वहां के अन्य एनजीओ के विरुद्ध भी छापेमारी जारी है। परन्तु 10 अगस्त को छापेमारी का पूरा फोकस रांची में था, जहां प्रदेश के मिशनरीज से जुड़े सभी एनजीओ का केंद्र है। बताते चलेंं कि जिन एनजीओ में सीआइडी की छापेमारी हुई, उनमें मुख्य रूप से बेथल मिशन, ब्रदर्स ऑफ सेंट गैब्रियल एजुकेशन सोसाइटी, कैपुचिन फ्रियर्स माइनर सोसाइटी, कैथोलिक हेल्थ एसोसिएशन, डाउटर्स ऑफ सेंट अनेरंची, डॉन बास्को टेक्निकल स्कूल आदि शामिल थे।

छापेमारी करते सीआईडी के अधिकारी

सीए की रिपोर्ट नहीं काट पाए अधिकारी, छापेमारी पर सवाल

मिली जानकारी के अनुसार एडीजी सीआइडी के आदेश पर सीआइडी की टीम ने सभी 88 एनजीओ से उनकी ऑडिट रिपोर्ट मांगी थी। सभी एनजीओ के संचालकों ने चार्टर्ड एकाउंटेंट से ऑडिट करवाई गई रिपोर्ट सीआइडी अधिकारियों को सौंपी। एनजीओ से जुडे लोगों का कहना है किअधिकारी अॉडिट रिपोर्ट में गलतियां नहीं खोज पाए। किसी भी रिपोर्ट में अनियमितता की पुष्टि नहीं हो सकी। अत: एडीजी ने कई अन्य बिंदुओं पर खुद से जांच शुरू कर दी। जिसका परिणाम पिछली छापेमारी के रूप में दिखा। इस छापेमारी पर कई सवाल उठ रहे हैं।

मानवाधिकार कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी ने मिशनरीज से जुड़े एनजीओ पर सीआईडी जांच को पूरी तरह से गलत बताया है। उन्होंने इसे पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण कार्रवाई बताया है। वे कहते हैं कि अगर जांच ही करनी है तो सभी एनजीओ की जांच होनी चाहिये। सिर्फ मिशनरीज से जुड़े एनजीओ की ही क्यों? यह पूरी तरह से अनैतिक है। उन्होंने विदेशों से आने वाले पैसे के बारे में कहा कि इसकी ऑडिट होती है और इसकी रिपोर्ट गृह मंत्रालय को भेजी जाती है। यह अन्याय हो रहा है।

वहीं ऑल चर्चेज कमेटी झारखंड के पूर्व अध्यक्ष बिशप अमृत जय एक्का ने कहा कि यह जांच दो-चार लोगों के कहने पर ही हो रहा है। यह पूरी तरह से गलत है। इस पर हमलोगों की बैठक भी हुई है। चर्च के लोगों को बेवजह निशाना बनाया जा रहा है।

बीजेपी का पलटवार – कहा घबरा क्यों रहे हैं?

बता दें कि फादर स्टेन स्वामी और बिशप अमृत जय एक्का के विरोध पर न तो सीआईडी ने कोई प्रतिक्रिया दी और न ही सरकार की तरफ से को बयान आया बल्कि बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने मोर्चा संभालते हुए एक संवाददाता सम्मेलन बुलाकर कहा कि ”आर्चबिशप फेलिक्स टोप्पो का बयान निराधार है। जो 88 गैर सरकारी ईसाई संस्थाओं के खिलाफ सीआईडी की जांच चल रही है। वह केंद्रीय गृह मंत्रालय की अनुशंसा पर हो रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय फॉरेन फंडिंग पर नजर रखने वाला नोडल एजेंसी है। उसने राज्य सरकार को पत्र लिखकर विदेशों से पैसा प्राप्त करने वाली 88 एनजीओ के कार्यकलापों की गहराई से जांच करने की अनुशंसा की थी। राज्य सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश के आधार पर इन संस्थाओं की सीआईडी जांच शुरू कराई है।”

भाजपा प्रवक्ता केवल सरकार की तरफ से ही नहीं बोलते हैं बल्कि वे सीआईडी के प्रवक्ता की तरह भी कहते हैं कि ”आर्चबिशप का यह बयान भी बिल्कुल निराधार है की सीआईडी ने एनजीओ को सिर्फ 24 घंटे का समय दिया है। सीआईडी ने 15 जून के पहले ही इन संस्थाओं को पत्र लिखकर सभी दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा था। मगर दो-तीन को छोड़कर किसी एनजीओ भी ने सीआईडी के साथ जांच में सहयोग नहीं किया। अंत में मजबूरन सीआईडी को कड़ा रुख अपनाते हुए एनजीओ को 24 घंटे का नोटिस देना पड़ा। सीआईडी की जांच न्यायिक प्रक्रिया का एक हिस्सा है और इसको अवरुद्ध करने का किसी को हक नहीं है।”

छत्तीसगढ़ में मिशनरी छात्रावासों पर जांच की गाज

छत्तीसगढ़ में कार्यरत स्वतंत्र पत्रकार तामेश्वर सिन्हा के अनुसार बस्तर और कांकेर जिले में भी पुलिस आदिवासियों के विरोध का दमन करने के लिए जांच का नुस्खा अपना रही है। इस क्रम में यहां ईसाई-मिशनरी छात्रावासों की जांच की जा रही है। जब यह सवाल यहां के अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के मंत्री से पूछा गया तब  उन्होंने कहा कि छात्रावासों का मामला शिक्षा विभाग से जुड़ा है। सरकार की ओर से इन छात्रावासों को निशुल्क खाद्यान्न उपलबध कराया जाता है। ऐसे में उपलब्ध कराये गये खाद्यान्नों के उपयोग एवं छात्रावासों की स्थिति के मूल्यांकन के लिए जांच की जा रही है। लेकिन इसका उत्तर कोई नहीं दे रहा कि आखिर इस जांच के बहाने सिर्फ ईसाई-मिशनरी से जुडे संस्थाओं को क्यों निशाना बनाया जा रहा है?

 

(कॉपी संपादन : एफपी डेस्क)


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