फॉरवर्ड प्रेस

मुलायम के खिलाफ बोले उदित राज, कार्यक्रम में हंगामा

नई दिल्ली, 19 अगस्त, 2018 :  मंडल आयोग के अध्यक्ष रहे बीपी मंडल की जयंती पर दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में आयोजित एक कार्यक्रम में भाजपा सांसद उदित राज द्वारा सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव को लेकर टिप्पणी करने पर हंगामा खड़ा हो गया। हंगामे के दौरान आक्रोशित लोगों ने सांसद को बोलने नहीं दिया और उन पर आरएसएस का एजेंट होने का आरोप लगाते रहे।

दरअसल, पीआईएल फाउंडेशन द्वारा सामाजिक न्याय दिवस विषयक आयोजित कार्यक्रम में बीपी मंडल के जन्मदिवस को सामाजिक न्याय दिवस के रूप में मनाने को लेकर बातें कही जा रही थी। लेकिन इसी बीच हंगामा हो गया और उदित राज को बोलने नहीं दिया गया।

बीपी मंडल की जयंती पर दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में आयोजित कार्यक्रम में भाजपा सांसद उदित राज

हंगामे के पहले उदित राज ने अपने संबोधन की शुरुआत इस वाक्य से की कि आज जो सामाजिक न्याय की बात करते हैं वह अलग-अलग खेमों में बंटे हैं। वह पार्टी विशेष को वोट देते हैं ना कि किसी व्यक्ति को। अपना खुद का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि लगभग 12 वर्षों तक उन्होंने पार्टी चलाई लेकिन उन्हें समाज ने वोट नहीं दिया। उन्होंने  भाजपा की सदस्यता उन्होंने ग्रहण की तब जाकर सांसद बन सके। उन्होंने उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव पर सवाल उठाया और कहा कि जब देश में मंडल आयोग की अनुशंसाएं लागू की गई थी तब सबसे पहले इसका विरोध मुलायम सिंह यादव ने किया था।

साथ ही, उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह यादव ने ही उत्तर प्रदेश में दलितों के प्रमोशन में आरक्षण को खत्म किया। उनके इतना कहते ही कार्यक्रम में हंगामा हो गया। हंगामे के बीच उनके ऊपर यादव जाति को लेकर टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया।

डॉ उदित राज के पहले राज्यसभा के पूर्व सांसद अली अनवर अंसारी ने दलित, पसमांदा मुसलमान और ओबीसी के बीच एकता बनाने की बात कही और कहा कि यदि देश के दलित, ओबीसी और ओबीसी मुसलमान एक हो जाएं तो पूरी आबादी का 80 फीसदी से अधिक का बहुमत देश में सत्ता का निर्धारण करेगा। उन्होंने मोतिहारी में प्रोफेसर संजय कुमार पर हुए हमले का विरोध भी किया और कहा कि आज अराजक तत्व पूरे देश को गर्त में ले जा रहे हैं। इनका मुकाबला करना होगा।

कार्यक्रम के दौरान पूर्व जस्टिस सखाराम सिंह, पूर्व सांसद बलिहारी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य उपस्थित थे।

(कॉपी-संपादन : एफपी डेस्क)


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