‘कांग्रेस के खून में ब्राह्मणों का डीएनए है’

कांग्रेस पार्टी के मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस के खून में ब्राह्मणों का डीएनए है। इसके पहले वे राजीव गांधी एवं राहुल गांधी को जनेऊधारी द्विज साबित कर चुके हैं। उन्होंने ब्राह्मण सम्मेलन में ब्राह्मणों से कई वायदे किये और उनका गुणगान किया। फारवर्ड प्रेस की रिपोर्ट :

अखिल भारतीय कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता, राहुल गांधी के नजदीकी और कैथल (हरियाणा) के विधायक रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा है कि कांग्रेस के खून में ब्राह्मण समाज का डीएनए है।’ ब्राह्मण सम्मलेन’ में उन्होंने वादा किया कि कांग्रेस सरकार में आयेगी, तो ब्राह्मण कल्याण बोर्ड का गठन किया जाएगा। ब्रह्मसरोवर के तट पर हुए ब्राह्मण सम्मेलन में सुरजेवाला ने कहा कि कल्याण बोर्ड का गठन कर प्रति वर्ष 100 करोड़ रुपये का सॉफ्ट लोन देने के अलावा ब्राह्मण युवाओं को 4 फीसदी ब्याज पर छात्रवृति प्रदान की जाएगी। भगवान परशुराम संस्कृत विश्वविद्यालय और ब्राह्मण कल्याण बोर्ड की स्थापना की जाएगी। उन्होंने घोषणा की कि पंडित परशुराम, पंडित लखमी चंद और पं. भागवत दयाल शर्मा के नाम पर तीन पीठ एमडी विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय और सीडीएलयू सिरसा में स्थापित की जायेंगी। सुरजेवाला ने कहा कि पंडित जवाहर लाल नेहरू से लेकर राजीव गांधी तक ने कांग्रेस के पौधे को सींचा है और ब्राह्मणों ने उनका साथ दिया है। इसलिए उन्हें मान व सम्मान कांग्रेस ही दे सकती है।

सुरजेवाला ने कहा कि ब्राह्मण ज्ञान, भक्ति, मर्यादा, संस्कार और स्वाभिमान का प्रतीक है। कांग्रेस के खून में ब्राह्मण हैं। आज़ादी की लड़ाई के पहले और बाद में ब्राह्मणों का योगदान रहा है। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों मंगल पांडे, चंद्र शेखर आजाद, पंडित मदन मोहन मालवीय, पंडित मोती लाल नेहरू और पंडित जवाहर लाल नेहरू के बलिदान और योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समुदाय राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से पीछे रहा है। सुरजेवाला ने कहा कि “बीजेपी ने ब्राह्मण समुदाय के लिए कुछ भी नहीं किया है”। सुरजेवाला ने ब्राह्मणों का अपमान करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी को जिम्मेदार ठहराया। सुरजेवाला ने एसएस बोर्ड परीक्षा में आपत्तिजनक प्रश्नों के माध्यम से ब्राह्मणों का अपमान करने के लिए हरियाणा की बीजेपी सरकार पर भी हमला किया। सुरजेवाला ने कहा कि सुषमा स्वराज जैसी बड़ी नेता को पीएम अपने साथ विदेश ले जाने उचित नहीं समझते जबकि वह विदेश मंत्री हैं। सुरजेवाला का ब्राह्मण प्रेम एकमात्र उदाहरण नहीं है। इसी कड़ी में तरफ राहुल गांधी भी कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाकर ब्राह्मण समुदाय को लुभाने का प्रयास कर रहे हैं।

कुरुक्षेत्र के एक कार्यक्रम में रणदीप सिंह सुरजेवाला शामिल हुए। वह कैथल के विधायक भी हैं

जाहिर तौर पर रणदीप सिंह सुरजेवाला द्वारा ब्राह्मण सम्मेलन में दिए गए बयानों और ब्राह्मणों से किए गए वायदों को पूरी कांग्रेस पार्टी की रणनीति से अलग करके नहीं देखा जा सकता है। गुजरात से लेकर कर्नाटक तक के चुनाव प्रचार में कांग्रेस और राहुल गांधी ने द्विज और हिंदुत्व का कार्ड खेला।

.ब्राह्मणों की कुरुक्षेत्र में हुई महासभा

सुरजेवाला ने भाजपा के साथ प्रधानमंत्री को ब्राह्मणों का अपमान करने वाला कहकर एक तीर से कई निशाना साधा है। वे इसके माध्मय से भाजपा पर ब्राह्मणों की जगह ठाकुरों और पिछड़ों के बढ़ते वर्चस्व पर भी अप्रत्यक्ष तरीके से निशाना साध रहे हैं। सुषमा स्वराज का संदर्भ देकर प्रधानमंत्री को विशेष तौर ब्राह्मणों का अपमान करने वाला कह कर अप्रत्यक्ष तौर पर ही सही प्रधानमंत्री की जाति को भी निशाना बनाया गया। इस बात को कांग्रेस के ब्राह्मण डीएनए वाले कथन के साथ जोड़कर देखा जाना चाहिए। यहां रणदीप सुरजेवाला जैसे लोगों के लिए कांग्रेस का अर्थ गांधी परिवार ही है। जिसका डीएनए ब्राह्मण है यानी इस परिवार की जाति ब्राह्मण है। इसी संदर्भ में उन्होंने नेहरू का भी जिक्र किया और ब्राह्मण नायकों और नेताओं की एक सूची प्रस्तुत कर दी। मोदी भले ही द्विजों (ब्राह्मण-ठाकुरों) के हित के लिए कितना भी कार्य करे, लेकिन ब्राहमण या द्विज होने का दावा तो प्रस्तुत कर नहीं सकते। उनकी जाति के चलते हमेशा उनके द्विज हितैषी होने पर द्विजों को शक-संदेह बना ही रहेगा।

एक धार्मिक कार्यक्रम में शिरकत करते राहुल गांधी

तथ्य यह बता रहे हैं कि कांग्रेस  दलित, ओबीसी या मुस्लिम समाज को केंद्र में रखकर अपनी खोयी राजनीतिक जमीन हासिल करने की कोशिश नही कर रही है, बल्कि आज भी उसे सबसे ज्यादा ब्राह्मणों पर ही भरोसा है, जिन्हें केंद्र में रखकर वह आजादी के बाद से राजनीति करती रही है। अन्य तबकों को वह इस केंद्र के इर्द-गिर्द ही गोलबंद करती है। वही इतिहास वह एक बार फिर दोहराना चाहती है। ब्राह्मण डीएनए और ब्राह्मणों का गुणगान इसी रणनीति का एक हिस्सा है। यह कांग्रेस के लिेए माकूल समय भी है। भाजपा की ओर शिफ्ट हो चुके ब्राह्मण इस समय मोदी-भाजपा के कई फ़ैसलों से बुरी तरह खफा हैं। इन फैसलों में एससी-एसटी एक्ट, पदोन्नति में एससी-एसटी के लिए आरक्षण का सुप्रीम कोर्ट में समर्थन, उच्च शिक्षा संस्थानों में विभागों को ईकाई मानकर नियुक्ति पर रोक और ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा देना आदि शामिल है। इसकी मुखर अभिव्यक्ति 6 सितंबर 2018 के सवर्ण बंद में दिखी, जिसका नेतृत्व मुख्यत: ब्राह्मण ही कर रहे थे।

कांग्रेस ब्राह्मणों के भीतर भाजपा के खिलाफ बढ़ते अंसतोष और आक्रोश का फायदा उठाकर अपने इस खोेए आधार को हासिल करना चाहती है और फिर ब्राह्मण, दलित और मुस्लिम गठजोड़ के आधार पर चुनावी वैतरणी पार करना चाहती है।

(कॉपी संपादन : सिद्धार्थ)


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