h n

बिहार की चुनावी राजनीति : जाति-वर्ग का समीकरण (1990-2015)

फारवर्ड प्रेस बुक्स द्वारा शीघ्र प्रकाश्य यह पुस्तक मंडल आंदोलन के बाद बिहार की राजनीति के विभिन्न आयामों जाति, धर्म, गरीबी और राजनीतिक आकांक्षाओं आदि पर प्रकाश डालती है। वही बिहार जिसने समय-समय पर देश की राजनीति की दशा और दिशा निर्धारित करने में महती भूमिका का निर्वहन किया है

इतिहास इस बात का साक्षी है कि बिहार बहुत ही लंबे समय से राजनीति के केंद्र में रहा है। इसे इसी तथ्य से समझा जा सकता है कि पिछले सात दशकों में भारत में जो महत्त्वपूर्ण राजनीतिक बदलाव हुए हैं, बिहार की धरती उसकी जननी रही है। 1990 के दशक में बिहार न केवल मंडल-समर्थक और मंडल-विरोधी आंदोलन के केंद्र में था, 1975 में वह आपातकाल-विरोधी आंदोलन का भी केंद्र रहा जो “जेपी आंदोलन’ के नाम से जाना जाता है और जिसका नेतृत्व जयप्रकाश नारायण ने किया था जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी ने देश में आपातकाल लागू कर दिया था। यह बताना जरूरी है कि ब्रिटिश शासन के दौरान भी बिहार ने राजनीतिक बदलाव लाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की। हमारे इतिहास की पुस्तकों में जिसे चंपारण आंदोलन के नाम से जाना जाता है, नील की खेती करने वाले किसानों के शोषण के खिलाफ यह आंदोलन महात्मा गांधी ने 1917 में बिहार के चंपारण से शुरू किया जो कि बिहार के उत्तर-पूर्व में स्थित एक जिला है।

पूरा आर्टिकल यहां पढें बिहार की चुनावी राजनीति : जाति-वर्ग का समीकरण (1990-2015)

 

 

 

 

 

 

 

लेखक के बारे में

संजय कुमार

संजय कुमार प्राध्यापक हैं और वर्तमान में सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेव्लपिंग सोसायटीज (सीएसडीएस) के निदेशक हैं। यह लेख उनके व्यक्तिगत विचारों पर आधारित है

संबंधित आलेख

बहस-तलब : दलितों की भागीदारी के बगैर द्रविड़ आंदोलन अधूरा
तमिलनाडु में ब्राह्मण और गैर-ब्राह्मण की पूरी बहस में दलित हाशिए पर हैं। क्या यह बहस दलित बनाम गैर-दलित नहीं होनी चाहिए और उस...
आज 149वें सत्यशोधक दिवस से ForwardPress.in नए कलेवर में
आज सत्यशोधक समाज की स्थापना की 149वीं वर्षगांठ पर फारवर्ड प्रेस, जो स्वयं को फुले और सत्यशोधक समाज की विरासत का भाग मानती है...
दबंगई छोड़ कबीर-रैदास को अपनाएं, तेजस्वी यादव ने दी अपने नेताओं को सलाह
तेजस्वी ने अपने दल के नेताओं को समझाते हुए कहा कि वे अपने आचरण में कबीर और रैदास की शिक्षा का पालन करें। उन्होंने...
जातिवाद की बीमारी से कब उबरेंगे देश के मेडिकल कॉलेज?
डा. किरीत प्रेमजी भाई सोलंकी के नेतृत्व वाली संसदीय कमेटी की रपट के मुताबिक सामाजिक तौर पर उत्पीड़ित तबकों के छात्रों को सुपर‌ स्पेशियलिटी...
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को दलितों, आदिवासियों और ओबीसी के लिए 58 फीसदी आरक्षण पर ऐतराज
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरूप कुमार गोस्वामी और न्यायमूर्ति पीपी साहू की खंडपीठ ने राज्य सरकार के 2012 में सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक...