कैसे द्विजों ने गढ़ी छत्रपति शिवाजी की हिंदूवादी छवि?

जोतीराव फुले छत्रपति शिवाजी महाराज जी को कुलवाडीभूषण मानते थे। मतलब किसानों और श्रमिकों के राजा। इसका वर्णन करनेवाला पवाडा (बखान) भी उन्होंने रचा हुआ है, जिसमें उन्होंने शिवाजी की सभी धर्मों का सम्मान करनेवाली छवि के बारे में बताया है। जो कि उनकी वास्तविक छवि है

छत्रपति शिवाजी महाराज एक ऐसे नायक थे जो समानता के मूल्यों में यकीन रखते थे। उनके लिए सभी धर्म एक समान थे और कभी जाति के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं किए। लेकिन भारत के द्विजों ने उन्हें हिंदू हृदय सम्राट की उपाधि से नवाजा है। यह एक तरह की साजिश है जो लंबे समय से भारतीय जनमानस पर थोपी जा रही है। इसी साजिश के तहत शिवाजी की जयंती साल में दो-तीन बार मनाने की प्रथा ब्राह्मणी विचारधारा को मानने वालों ने शुरू की। लेकिन अब यह स्थापित हो गया है कि 19 फरवरी ही शिवाजी महाराज की जयंती की तिथि है।

पूरा आर्टिकल यहां पढें : कैसे द्विजों ने गढ़ी छत्रपति शिवाजी की हिंदूवादी छवि?

About The Author

Reply