शोषक और शोषित में विभाजित है हिन्दुस्तान : जगदेव प्रसाद

आज का हिन्दुस्तानी समाज साफतौर से दो तबकों में बंटा हुआ है – शोषक और शोषित। हरिजन, आदिवासी, मुसलमान और पिछड़ी जातियां शोषित हैं। तमाम ऊंची जात वाले शोषक हैं। शोषित सौ में नब्बे हैं, शोषक सौ में दस हैं। इन दोनों वर्गों में स्वार्थ की दृष्टि से इनमें कहीं समझौते की गुंजाइश नहीं है।’ पढ़ें, 2 अप्रैल, 1970 को बिहार विधानसभा में जगदेव प्रसाद का ऐतिहासिक संबोधन

[जगदेव प्रसाद ने बिहार विधानसभा में 2 अप्रैल, 1970 को दिए अपने भाषण में शोषक और शोषित के बीच के अंतर को स्थापित किया था। साथ ही उन्होंने शासन-प्रशासन में दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों की समुचित भागीदारी के लिए मांगें रखीं। हम उनके इस ऐतिहासिक संबोधन को हू-ब-हू प्रकाशित कर रहे हैं।]

2 अप्रैल, 1970 को बिहार विधानसभा में बहुजन नायक जगदेव प्रसाद का ऐतिहासिक संबोधन 

अध्यक्ष महोदय,

चार दिनों से राज्यपाल के अभिभाषण पर बह बहस चल रही है। मैंने कुछ माननीय सदस्यों के भाषण सुने हैं। कम्युनिस्ट पार्टी, संसोपा [संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी], प्रसोपा [प्रजातांत्रिक सोशलिस्ट पार्टी], जो कम्युनिज्म और समाजवाद की पार्टियां हैं, के नेताओं के भाषण भी गौर से सुने हैं। जो भाषण इन दलों के नेताओं ने दिये हैं, उनसे साफ हो जाता है कि ये पार्टियां अब किसी काम की नहीं रह गई हैं। इनसे कोई ऐतिहासिक परिवर्तन या सामाजिक, आर्थिक ना-बराबरी के जो असली कारण हैं, उनको साफ शब्दों में मजबूती के साथ नहीं कहें। कांग्रेस, जनसंघ, स्वतंत्र पार्टी, भाक्रांद [भारतीय क्रांति दल]– ये सब द्विजवादी, पूंजीवादी व्यवस्था और संस्कृति के पोषक हैं। करीब-करीब इन सभी दलों ने राज्यपाल के अभिभाषण के बारे में कहा है कि इस अभिभाषण से समाज को कोई दिशा नहीं मिलती है। मेरे ख्याल से यह सरकार और सभी राजनीतिक पार्टियां द्विज-नियंत्रित होने के कारण राज्यपाल के अभिभाषण की तरह दिशाहीन हो चुकी हैं। मुझको कम्युनिज्म और समाजवाद की पार्टियों से भारी निराशा हुई है। इनका नेतृत्व दिनकटु हो गया है।

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