जयप्रकाश नारायण का समाजवाद बनाम सामाजिक न्याय

हम यहां से अपनी बात शुरू कर सकते हैं कि जयप्रकाश की नजर में समाजवाद का मुख्य आधार उत्पादनों के साधनों का सामाजिकीकरण है, जिसके द्वारा धन के विषम वितरण और शोषण-जनित बुराइयों को दूर किया जा सकता है। बता रही हैं संयुक्ता भारती

संपूर्ण क्रांति दिवस (5 जून, 1974) पर विशेष

अपनी किताब ‘समाजवाद क्यों?’ में जयप्रकाश नारायण साफ-साफ लिखते हैं– “समाजवाद एक व्यक्तिगत आचरण संहिता न होकर सामाजिक संगठन की एक प्रणाली है तथा सामाजिक संगठन का उद्देश्य यह है कि पद-संस्कृति एवं अवसर की विषमताओं को दूर किया जाय, जीवन की श्रेष्ठ वस्तुओं के कष्टमय असमान वितरण को समाप्त किया जाय और उस दशा को समाप्त किया जाय जिसमें अधिकांश व्यक्ति गरीबी, भूख, गंदगी, रोग एंव अज्ञान का जीवन बसर करते हैं और कुछ थोड़े से लोग आराम, संस्कृति, पद और सत्ता का आनंद उठाते हैं।”

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