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Virendra Yadav

शूद्र विद्रोह : हिंदू राष्ट्रवाद का प्रतिविमर्श
स्वीकार करना होगा कि कांचा आइलैय्या शेपर्ड की पुस्तक ‘शूद्र विद्रोह : ताकि बन सके आत्मनिर्भर भारत’ बहुजन...
‘Mahishasur: Mithak va Paramparayen’: An intellectual intervention
It is unfortunate that in a giant pluralist society like India, cultural differences are talked about only in...
महिषासुर मिथक व परंपराएं : एक बौद्धिक हस्तक्षेप
यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत जैसे बहुलवादी विशालकाय समाज में सांस्कृतिक बहुलता के घटाटोप में प्रायः अभिजन मुहावरे...
ओबीसी साहित्य की अवधारणा कितनी प्रासंगिक?
आज जरूरत है कबीर, फुले, पेरियार, अंबेडकर सरीखे सामाजिक चिंतकों के वर्णाश्रम और ब्राह्मणवाद विरोधी चिंतन एवं बहुजन...