Literature | साहित्‍य

महिषासुर विमर्श : गोंड आदिवासी दर्शन और बहुजन संस्कृति

महिषासुर के मिथक सहित संभूशेक, गोंडी धर्म, असुर व श्रमण व मातृसत्तात्मक या तांत्रिक या लोकायतिक दर्शनों पर और अधिक गहराई से शोध की आवश्यकता है। यह शोध बहुजन समाज की मूल संरचना और उसके ऐतिहासिक उद्विकास सहित उसके पतन की खोज है ताकि ब्राह्मणी या आर्य षड्यंत्र को उसकी सम्पूर्णता में देखा जा सके। यही शोध आज हमारी आँख के सामने चल रहे उसी सनातन षड्यंत्र को दुबारा उजागर करेगा। यह न केवल ऐतिहासिक अर्थों में उद्विकास और पतन की नयी तस्वीर को उजागर करेगा, बल्कि भविष्य में ब्राह्मणवादी पाखण्ड के शमन के लिए प्रगतिशीलों और मुक्तिकामियों सहित संपूर्ण बहुजन समाज के सभी धडों को एक साथ संगठित भी करेगा