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Kanwal bharti

Tilak’s Nationalism
'Had the British not come to India, the Peshwas would have been ruling the entire country,' wrote Tilak...
पुनर्पाठ : सिंधु घाटी बोल उठी
डॉ. सोहनपाल सुमनाक्षर का यह काव्य संकलन 1990 में प्रकाशित हुआ। इसकी विचारोत्तेजक भूमिका डॉ. धर्मवीर ने लिखी...
पुस्तक समीक्षा : स्त्री के मुक्त होने की तहरीरें (अंतिम कड़ी)
आधुनिक हिंदी कविता के पहले चरण के सभी कवि ऐसे ही स्वतंत्र-संपन्न समाज के लोग थे, जिन्हें दलितों,...
कंवल भारती के शब्दों में उनका अनुवाद-कर्म
इसमें संदेह नहीं कि भारत के सामाजिक, सांस्कृतिक और जातियों के इतिहास पर जितना महत्वपूर्ण काम विदेशी विद्वानों...
पुस्तक समीक्षा : स्त्री के मुक्त होने की तहरीरें (पहली कड़ी)
नूपुर चरण ने औरत की ज़ात से औरत की ज़ात तक वही छिपी-दबी वर्जित बात ‘मासिक और धर्म’,...
पहाड़ का पहला दलित विमर्श
निस्संदेह, मोहन मुक्त की कविताओं में एक गहरा सांस्कृतिक प्रतिरोध है, जो हर कविता में न सिर्फ प्रभावित...
आज़ादी का अमृत महोत्सव : ब्राह्मण राज के 75 साल
ब्राह्मणों की विजय का यह 75वां साल चल रहा है। 1947 के ब्राह्मण-राज से आज के हिंदू राज...
A celebration of 75 years of Brahmin rule?
If the Varna system starts coming apart, the life of the Brahmin class comes under threat. This is...
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