जिस बेटे को पालने के लिए दलित समुदाय के गुलजार सिंह ने जिंदगी भर भेड़-बकरियां चराईं और मजदूरी की, वही बेटा नशे की गिरफ्त में आ गया। बेटे को बचाने की कोशिश में उसने गांव में चिट्टे की बिक्री का सवाल उठाया और कुछ ही समय बाद उसने आत्महत्या कर ली। पढ़ें, अमरपाल सिंह...