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यूजीसी रेगुलेशन के पक्ष में बोलें सामाजिक न्याय की सियासत करने वाले नेता

उत्तर भारत की दलित-ओबीसी पार्टियों ने संशय की स्थिति में न केवल सामाजिक अपितु राजनीतिक स्तर पर लामबंदी का बड़ा अवसर खो दिया है। जगह-जगह हो रहे प्रदर्शनों में दलित-बहुजन युवा इस नियम के बहाने सामाजिक न्याय के साथ-साथ इन राजनीतिक दलों की आश्चर्यजनक चुप्पी को भी आड़े हाथों ले रहे हैं। बता रहे...

यूजीसी रेगुलेशन के पक्ष में बोलें सामाजिक न्याय की सियासत करने वाले नेता
उत्तर भारत की दलित-ओबीसी पार्टियों ने संशय की स्थिति में न केवल सामाजिक अपितु राजनीतिक स्तर पर लामबंदी का बड़ा अवसर खो दिया है।...
यूजीसी रेगुलेशन : इन कारणों से जरूरी है दलित-बहुजनों की यह लड़ाई
विश्वविद्यालयों में बहुजन छात्रों के ख़िलाफ़ गहरे और व्यवस्थित भेदभाव का एक प्रमुख कारण यह है कि प्रशासन अक्सर उच्च जाति की लॉबी से...
यूजीसी रेगुलेशन : बिहार के चप्पे-चप्पे में दलित-बहुजनों का हल्ला बोल
सिवान जिले के प्रिंस पासवान कहते हैं कि मुट्ठी भर लोगों के विरोध से एक बड़ी आबादी को भेदभाव से सुरक्षा प्रदान करने वाले...
यूजीसी रेगुलेशन : सच्चाई से मुंह मोड़ रहे हैं इसके विरोधी
ऊंची जाति के विद्यार्थियों के साथ भेदभाव की इक्का-दुक्का घटनाएं हो सकती हैं, मगर एससी, एसटी और ओबीसी समुदायों को संरचनात्मक बहिष्करण का सामना...
इलाहाबाद विश्वविद्यालय को हुआ क्या है?
कल 3 फरवरी, 2026 को जो घटना हुई उसने विश्वविद्यालय में व्याप्त जातिवाद को स्पष्ट तौर पर उजागर कर दिया। दिशा छात्र संगठन के...
सुदर्शन ऋषि और डुमार (डोमार) समाज
पूरे भारत में डोमार जाति की जनसंख्या को लेकर एकमत नहीं है, क्योंकि जनगणना में भी उनकी जानकारी सही नहीं मिल पाती है। इसका...
देखें, जगत के प्रकाश को
इस क्रिसमस पर हम झिलमिलाते बल्बों और साज-सज्जा से आगे देखें – हमारे जगत के उस प्रकाश को देखें, जो अंधेरे से भरी हमारी...
आर्यभट नहीं, आजीवक थे भारतीय गणित के प्रतिपादक
सच तो यह है कि सभ्यता के आरंभिक चरण में प्रकृति के सान्निध्य में रहकर, उसका करीब से अध्ययन करने वाले श्रमण, ज्ञान और...
हाशिए पर जीवन जीते गाड़िया लुहार
गाड़िया लुहारों का रहन-सहन भी कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं पैदा करता है। सार्वजनिक शौचालयों का अभाव या उनसे दूरी, इन्हें खुले में शौच...
गुरु तेग बहादुर के हिंदू राष्ट्र के रक्षक होने का मिथक
‘हिंद दि चादर’ – यह वाक्यांश कब और कैसे अस्तित्व में आया? इसे किसने गढ़ा और सबसे पहले इसका उपयोग किस कृति में किया...
निष्ठा का सवाल उठाए अरसा गुज़र गया!
कंवल भारती की कविताओं पर सरसरी नज़र दौड़ाने से यही पता चलता है कि उनके अंदर समता को लेकर बेचैनी है। वे महीन से...
प्रगतिशीलों के बीच वीरेंद्र यादव के होने का निहितार्थ
वीरेंद्र यादव का सीना ‘अपनों’ के हाथों होते रहे ऐसे अपमानों से छलनी था। वे अपना ज़ख़्मी दिल लिए सेकुलर-प्रगतिशील विचारों की लड़ाई लड़ते...
कबीर की प्रासंगिकता पर सुभाषचंद्र कुशवाहा का संबोधन
जोगियों से गोरखनाथ और कबीर सीखते हैं कि प्रेम किस तरीक़े से मनुष्यता के लिए ज़रूरी है। किस तरह हिंदू-मुस्लिम विभाजन को दूर किया...
अशराफ़िया अदब को चुनौती देती ‘तश्तरी’ : पसमांदा यथार्थ की कहानियां
तश्तरी, जो आमतौर पर मुस्लिम घरों में मेहमानों को चाय-नाश्ता पेश करने, यानी इज़्ज़त और मेहमान-नवाज़ी का प्रतीक मानी जाती है, वही तश्तरी जब...
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में दलित साहित्य
दलित साहित्य के सौंदर्यशास्त्र का विकास दलित समाज, उसकी चेतना, संस्कृति और विचारधारा पर निर्भर करता है, जो एक लंबी प्रक्रिया में होते हुए...
केवल त्याग की प्रतिमूर्ति नहीं, और भी बहुत कुछ थीं रमाबाई
क्या वे बाबासाहेब की कर्त्तव्यनिष्ठ पत्नी भर थीं? या वे आंबेडकर के मुक्ति संघर्ष में बराबर की साझीदार थीं? क्या वे भी मानव-निर्मित विभाजनों...
मनहीन, तनहीन और धनहीन के जननायक
कर्पूरी ठाकुर जिन वर्गों को ‘मनहीन, तनहीन और धनहीन’ कहकर संबोधित करते थे, शायद वे जानते थे कि इन वर्गों की पहली और सबसे...
शिवनंदन पासवान : एक जीवट समाजवादी, जिन्हें राजनीतिक कारणों से किया जा रहा विस्मृत
शिवनंदन पासवान ने जिस दौर में राजनीति में प्रवेश किया, वह बिहार और देश की राजनीति के लिए उथल-पुथल का समय था। समाजवादी आंदोलन...
जोतीराव फुले के सहयोगी सत्यशोधक तुकाराम तात्या पडवळ
तुकाराम तात्या पडवळ ने धर्म तथा जाति-आधारित शोषण को करीब से देखा था। धर्म के नाम पर पुजारी अनपढ़ लोगों को किस तरह से...
अपने दौर के वैज्ञानिकों से डॉ. आंबेडकर की मेल-मुलाकातें
मैंने जो भी थोड़ा बहुत शोधकार्य किया है, उससे मुझे कम-से-कम चार अग्रणी भारतीय वैज्ञानिकों से डॉ. बी.आर. आंबेडकर की मेल-मुलाकातों और उनके बीच...