लंबे समय से इस धारणा को हमारी आम समझ का हिस्सा बनाने की सचेत कोशिश की गई कि जहां मुसलमानों की आबादी ज़्यादा होती है वह भारत का हिस्सा नहीं हो सकता, वो पाकिस्तान होता है। इसलिए मुसलमानों को मुहल्लों या गांवों से निकालना एक ‘राष्ट्रवादी कर्तव्य’ है। बता रहे हैं शाहनवाज आलम