आज अनेक अवसरों पर फुले दंपति के नाम और व्यक्तित्व का सम्मान किया जाता है, लेकिन उनके मनुस्मृति-विरोधी, जाति-विरोधी और ब्राह्मणवादी ज्ञान-सत्ता की आलोचना करने वाले मूलगामी विचारों को अपेक्षाकृत कम महत्व दिया जाता है। ऐसी स्थिति को समझने में ग्राम्शी की सांस्कृतिक वर्चस्व की अवधारणा अत्यंत उपयोगी सिद्ध होती है। पढ़ें, डॉ. लता...