यह कौतूहल जरूर होता है कि हिंदुओं के संपूर्ण पौराणिक वाङ्मय में जिन्हें अनार्य, राक्षस, असुर, दस्यु, दास, यहां तक कि मानवेतर वानर शब्द से नवाजा गया और जिन्हें आज भी उनके मूल नाम ‘आदिवासी’ कहने से गुरेज है, उन लोगों के ‘समागम’ की जरूरत इस कट्टर हिंदू संगठन को क्यों पड़ी? बता रहे...