श्रमणों की तरह, चिकित्सक भी ज्ञान के साधक थे। वे घूमते-फिरते, रोग का कारण तथा उसके लिए नई औषधि, उपचार और चिकित्सा ज्ञान प्राप्त करने में निरंतर लगे रहते थे। इसके लिए वे उन अन्य श्रमणों के साथ घुल-मिल जाते थे, जो निर्वाण की कामना के साथ यायावरी करते रहते थे। पढ़ें, ओमप्रकाश कश्यप...