आज जब पूरी दुनिया ‘पेरिस समझौते’ और ‘कार्बन फुटप्रिंट’ जैसे तकनीकी शब्दों में उलझी है, सरहुल का दर्शन एक सरल लेकिन अचूक समाधान पेश करता है। ‘प्रकृति पूजा’ का अर्थ केवल पेड़ के आगे झुकना नहीं है, बल्कि यह स्वीकार करना है कि प्रकृति हमारी ‘स्वामी’ है। बता रहे हैं देवेंद्र कुमार नयन