उत्तर भारत की दलित-ओबीसी पार्टियों ने संशय की स्थिति में न केवल सामाजिक अपितु राजनीतिक स्तर पर लामबंदी का बड़ा अवसर खो दिया है। जगह-जगह हो रहे प्रदर्शनों में दलित-बहुजन युवा इस नियम के बहाने सामाजिक न्याय के साथ-साथ इन राजनीतिक दलों की आश्चर्यजनक चुप्पी को भी आड़े हाथों ले रहे हैं। बता रहे...