लगभग सभी धर्म राजसत्ता से सांठ-गांठ कर, शक्ति-केंद्रों में बदलते चले गए। जैन तथा बौद्ध धर्म ने भी यही किया। आजीवक पिछड़ते गए। सच तो यह है कि इस स्पर्धा में वे कभी थे ही नहीं। बुद्ध और महावीर में अपने-अपने धर्म-दर्शन के प्रचार-प्रसार का उत्साह था। यहां तक कि अपने विरोधियों के साथ...