यह मानने में हिचक नहीं होनी चाहिए कि मौजूदा मुख्य न्यायाधीश की पृष्ठभूमि भी संस्थागत है। यह उनकी सीमा है। इसीलिए उनमें वह व्यापक सामाजिक नजरिया विकसित नहीं हो सका है जो कि लोकतंत्र के विचारों और संविधान की संस्कृति के विस्तार के लिए आवश्यक है। बता रहे हैं अनिल चमड़िया