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‘गेल एंड भरत’ : दलित नायकों को सेलिब्रिट करती डॉक्यूमेंट्री

यह वृतचित्र गेल का वह रूप दिखाता है, जिसे हम सब देखने के आदी रहे हैं। एक्टिविस्ट गेल एक मंच से कह रही हैं– “हम लड़ रहे हैं, हमे लड़ते रहना चाहिए।” वही गेल, दूसरे मंच से रोजा पार्क्स के बस आंदोलन को याद कर रही हैं। तीसरे मंच से एक अकादमिक लेख पढ़ते...

‘गेल एंड भरत’ : दलित नायकों को सेलिब्रिट करती डॉक्यूमेंट्री
यह वृतचित्र गेल का वह रूप दिखाता है, जिसे हम सब देखने के आदी रहे हैं। एक्टिविस्ट गेल एक मंच से कह रही हैं–...
दस्तावेज : जब शिवनंदन पासवान की कलम से जननायक कर्पूरी ठाकुर को मिला मरणोपरांत न्याय
जनवरी, 1989 से लेकर मार्च, 1989 के दौरान कार्यकारी अध्यक्ष शिवनंदन पासवान ने जननायक को मरणोपरांत नेता, विरोधी दल के रूप में मान्यता 30...
निकोलस मादुरो को हटाने से बोलीवियाई क्रांति ख़त्म नहीं होगी
निकोलस मादुरो, जिन्होंने अपनी जिंदगी की शुरुआत एक बस चालक के रूप में की थी, चावेज़ के उत्तराधिकारी बने। उनकी सरकार ने भी सेना,...
उत्तर प्रदेश : एसआईआर की भीतरी तह, जिसे चुनाव आयोग हर हाल में ढंकना चाहता है
बीएलओ ने कहा ‘इस तरह वो हमारे पास से सारे फॉर्म उठाकर ले गए और वहां जो संविदा पर या अन्य तरह से काम...
झारखंड : पेसा कानून शीघ्र लागू होने की उम्मीद, लेकिन सवाल शेष
यह बात भी हमें ध्यान में रखना चाहिए कि मूल पेसा कानून के दायरे में ही सरकार नियमावली बना सकेगी। यदि कानून की नियमावली...
देखें, जगत के प्रकाश को
इस क्रिसमस पर हम झिलमिलाते बल्बों और साज-सज्जा से आगे देखें – हमारे जगत के उस प्रकाश को देखें, जो अंधेरे से भरी हमारी...
आर्यभट नहीं, आजीवक थे भारतीय गणित के प्रतिपादक
सच तो यह है कि सभ्यता के आरंभिक चरण में प्रकृति के सान्निध्य में रहकर, उसका करीब से अध्ययन करने वाले श्रमण, ज्ञान और...
हाशिए पर जीवन जीते गाड़िया लुहार
गाड़िया लुहारों का रहन-सहन भी कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं पैदा करता है। सार्वजनिक शौचालयों का अभाव या उनसे दूरी, इन्हें खुले में शौच...
गुरु तेग बहादुर के हिंदू राष्ट्र के रक्षक होने का मिथक
‘हिंद दि चादर’ – यह वाक्यांश कब और कैसे अस्तित्व में आया? इसे किसने गढ़ा और सबसे पहले इसका उपयोग किस कृति में किया...
‘होमबाऊंड’ : हिंदू भारत में चंदन वाल्मीकि (दलित) और शोएब मलिक (मुस्लिम) की नियति का आख्यान
फिल्म देखते समय आपको कुछ व्यक्तियों से नहीं, उस पूरी व्यवस्था से नफरत होती है, जो वर्ण-जाति-वर्ग या धार्मिक पहचान के आधार पर सोचती...
अशराफ़िया अदब को चुनौती देती ‘तश्तरी’ : पसमांदा यथार्थ की कहानियां
तश्तरी, जो आमतौर पर मुस्लिम घरों में मेहमानों को चाय-नाश्ता पेश करने, यानी इज़्ज़त और मेहमान-नवाज़ी का प्रतीक मानी जाती है, वही तश्तरी जब...
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में दलित साहित्य
दलित साहित्य के सौंदर्यशास्त्र का विकास दलित समाज, उसकी चेतना, संस्कृति और विचारधारा पर निर्भर करता है, जो एक लंबी प्रक्रिया में होते हुए...
बानू मुश्ताक की कहानियों में विद्रोही महिलाएं
सभी मुस्लिम महिलाओं को लाचार और बतौर वस्तु देखी जाने वाली बताने की बजाय, लेखिका हमारा परिचय ऐसी महिला किरदारों से कराती हैं जो...
योनि और सत्ता पर संवाद करतीं कविताएं
पितृसत्ता की जड़ें समाज के हर वर्ग में अत्यंत गहरी हो चुकी हैं। फिर चाहे वह प्रगतिशीलता के आवरण में लिपटा तथाकथित प्रगतिशील सभ्य...
रोज केरकेट्टा का साहित्य और उनका जीवन
स्वभाव से मृदु भाषी रहीं डॉ. रोज केरकेट्टा ने सरलता से अपने लेखन और संवाद में खड़ी बोली हिंदी को थोड़ा झुका दिया था।...
शिवनंदन पासवान : एक जीवट समाजवादी, जिन्हें राजनीतिक कारणों से किया जा रहा विस्मृत
शिवनंदन पासवान ने जिस दौर में राजनीति में प्रवेश किया, वह बिहार और देश की राजनीति के लिए उथल-पुथल का समय था। समाजवादी आंदोलन...
जोतीराव फुले के सहयोगी सत्यशोधक तुकाराम तात्या पडवळ
तुकाराम तात्या पडवळ ने धर्म तथा जाति-आधारित शोषण को करीब से देखा था। धर्म के नाम पर पुजारी अनपढ़ लोगों को किस तरह से...
अपने दौर के वैज्ञानिकों से डॉ. आंबेडकर की मेल-मुलाकातें
मैंने जो भी थोड़ा बहुत शोधकार्य किया है, उससे मुझे कम-से-कम चार अग्रणी भारतीय वैज्ञानिकों से डॉ. बी.आर. आंबेडकर की मेल-मुलाकातों और उनके बीच...
वो आखिरी पल जब सूर्यास्त हुआ एक महानायक का
सुबह 9 बजकर 45 मिनट पर जब रत्तु जी को लिये कार बाबा साहेब के घर में प्रविष्ट होती है तो श्रीमती सविता आंबेडकर...
सन् 1938 का महिला सम्मलेन, जिसमें रामासामी को स्त्रियों ने दी ‘पेरियार’ की उपाधि
महिलाएं केवल पेरियार की प्रशंसक नहीं थीं। वे सामाजिक मुक्ति के उनके आंदोलन में शामिल थीं, उसमें भागीदार थीं। उनके नेतृत्व में सम्मलेन का...