हजरत मुहम्मद (स.अ.) के आखिरी खुतबे (धार्मिक उपदेश) में दिए गए पैगाम को मुस्लिम समाज के शोषक तबके ने पहुंचने नहीं दिया और इसे छिपाए रखा। यह पैगाम उन्होंने आखिरी हज (हज्जतुल विदाअ) के मौके पर दिया था। यह स्पष्ट तौर पर समानता, भाईचारा एवं सामाजिक न्याय की उद्घोषणा है। पढ़ें, इमानुद्दीन का यह...