मैंने गया जिले में एक कार्यक्रम रखा था, उसमें शब्बीर साहब शिरकत करने पहुंचे थे। वहां उनके साथ एक महिला नसीम महत्त भी आई थीं। मैंने उनसे ‘महत्त’ के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि यह वह जाति है, जिसका पारंपरिक पेशा हाथियों की देखभाल करना रहा। सामान्य तौर पर इस जाति को...