भरत भूषण तिवारी को मारने के आरोप के खिलाफ जो लोग बोल रहे हैं, वे कब किस मुठभेड़ के बाद नाचने-गाने व ताली बजाने वालों में रहे हैं। यह कोई शोध का विषय नहीं है। आंखों के सामने दिखता है। बता रहे हैं अनिल चमड़िया
अगर डांगावास (14 मई, 2015, राजस्थान), खैरलांजी (27 सितंबर, 2006, महाराष्ट्र) और लक्ष्मणपुर बाथे (1 दिसंबर, 1997) जैसे नरसंहार और प्रताड़नाएं दलित साहित्य का...
महुआ माजी की यह कथा कोल्हान क्षेत्र (पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, और सरायकेला-खरसावां) के उन आदिवासी समुदायों की वास्तविक परिस्थितियों को सामने लाती है,...