जमीनी संघर्ष के लिए फुलेवाद शुद्ध वर्गीय संगठन का मार्ग स्वीकार करता है। फुले के शिष्य भालेराव किसान संगठन खड़ा करते हैं और दूसरे फुले शिष्य लोखंडे कामगार संगठन का निर्माण करते हैं। जातीय प्रबोधन और वर्गीय संगठन इन दो अलग-अलग माध्यमों से ही जाति अंतक युद्ध लड़ा जा सकता है। यही है फुलेवाद...