सावित्रीबाई का अंग्रेजी भाषा को मां का दर्जा देना एक बहुत बड़ा कदम था। उन्होंने यह तब किया जब वे पेशवाओं के ब्राह्मणवाद के गढ़ रहे पूना में रह रही थीं और उस नगर में कट्टरवादी ब्राह्मणों का बोलबाला था। पढ़ें, प्रो. कांचा आइलैय्या शेपर्ड का यह आलेख
दिल्ली के कंस्टीट्यूशन क्लब सभागार में आयोजित ओबीसी महासभा की बैठक में अधिकांश हिंदी-भाषी प्रदेशों से विभिन्न जातियों और पसमांदा के प्रतिनिधियों के अलावा...