डॉ. अयूब राईन की यह पुस्तक पसमांदा इतिहास, सामाजिक प्रतिनिधित्व और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की व्यापक समझ के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण कोशिश है। इसकी अहमियत केवल भूले हुए नामों को याद करने में नहीं, बल्कि यह पूछने में भी है कि इतिहास किसकी नज़र से लिखा गया, किसके संघर्षों को केंद्रीय स्थान मिला...