कोई किसी विशेष नदी में नहाकर ‘पवित्र’ हो सकता है, भले उसका पानी बहुत दूषित हो। इसके विपरीत साफ़-सफ़ाई या स्वच्छता एक मूर्त और दिखाई देने वाली चीज़ है। आरएसएस और भाजपा का नॅरेटिव ‘पवित्रता’ पर केंद्रित होता है, क्योंकि उसका सामाजिक लक्ष्य वर्ण के आधार पर पवित्रता को स्थापित करना है। बता रहे...