करम परब को केवल करम वृक्ष की पूजा या एक रात के नाच-गाने तक सीमित करके नहीं समझा जा सकता है। यह उस समाज की सामूहिक स्मृति है, जिसकी खेती जंगल से शुरू होती है और जिसकी समृद्धि खेत में उगने वाले अनाज से जुड़ी होती है। यह परब जंगल से खेत तक और...
महुआ माजी की यह कथा कोल्हान क्षेत्र (पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, और सरायकेला-खरसावां) के उन आदिवासी समुदायों की वास्तविक परिस्थितियों को सामने लाती है,...