बीते 9 जुलाई को ऑनलाइन गोष्ठी में प्रो. वीरेंद्र नारायण यादव ने निष्कर्षतः यह प्रतिपादित किया कि भिखारी ठाकुर समाज को सांस्कृतिक रूप से समृद्ध कर रहे थे। वे समाज को यह अहसास करा रहे थे कि स्त्री का दर्द क्या है, विधवा का विलाप क्या है और जातिवाद कितनी बड़ी क्रूरता है। पढ़ें,...