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Suresh Kumar
स्वामी अछूतानंद ‘हरिहर’ का आदि-हिंदू आंदोलन और नवजागरणकालीन संपादकों का नजरिया
सुरेश कुमार
औपनिवेशिक भारत में जब स्वामी अछूतानंद ने पांच करोड़ अछूतों की हिंदू धर्म से अलग पहचान का दावा...
‘युगांतर’ के दायरे में अछूत
सुरेश कुमार
सन् 1930 के आरंभिक वर्षों तक संतराम बी.ए. एक ऐसे समाज सुधारक के तौर पर हमारे सामने प्रस्तुत...
मानना और अवमानना के दौर में फुले
सुरेश कुमार
फुले उन्नीसवीं सदी के महानतम व्यक्तियों में से एक थे, जिन्होंने औपनिवेशिक भारत में तमाम बहसों और विमर्शों...
दलित-बहुजन विमर्श के नये आयाम गढ़तीं दिनेश कुशवाह की कविताएं
सुरेश कुमार
दिनेश कुशवाह की कविताओं में ऐसी कई भारतीय समाज की दृश्यावलियां उभर कर आती हैं, जो साहित्य और...
‘चमरटोली से डी.एस.पी. टोला तक’ : दलित संघर्ष और चेतना की दास्तान
सुरेश कुमार
यह आत्मकथा सिर्फ रामचंद्र राम के इंस्पेक्टर से डीएसपी बनने तक जीवन संघर्ष की गाथा नहीं बल्कि यह...
दलित आलोचना की कसौटी पर प्रेमचंद का साहित्य (संदर्भ : डॉ. धर्मवीर, अंतिम भाग)
सुरेश कुमार
प्रेमचंद ने जहां एक ओर ‘कफ़न’ कहानी में चमार जाति के घीसू और माधव को कफनखोर के तौर...
दलित आलोचना की कसौटी पर प्रेमचंद का साहित्य (संदर्भ : डॉ. धर्मवीर, पहला भाग)
सुरेश कुमार
डॉ. धर्मवीर को प्रेमचंद से यही तो अपेक्षा थी कि आचार्य चतुरसेन शास्त्री की तरह वह भी ‘कफ़न’...
डॉ. धर्मवीर की नजर में दलितों का धर्म
सुरेश कुमार
डॉ. धर्मवीर न तो हिंदू धर्म को दलितों के लिए ठीक मानते हैं, न ईसाई, न मुसलमान और...
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