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समाज और संस्कृति

ऐसे थे भिखारी ठाकुर और ऐसा था उनका प्रभाव
भोर होने से पहले भिखारी ठाकुर की नाच मंडली को गांव छोड़ना पड़ा। लेकिन नाच की आंच बहुत दिनों तक बनी रही। जवार की कई लड़कियां बूढ़े वर को देखकर मंडप से भाग गईं। कइयों...
आज का समय, समाज और भिखारी ठाकुर
बुद्ध ने भी वर्णगत भेदभाव देखा और भोगा था, भिखारी ठाकुर ने भी देखा और भोगा था। इसीलिए भिखारी ठाकुर अपने व्यत्तिगत और जातिगत पीड़ा को जब कला की चासनी में डूबोकर व्यक्त करते हैं,...
‘मां-बहन’ : कौन है महिलाओं के जीवन का मालिक?
‘मां-बहन’ – यह शब्दयुग्म उत्तर भारत में रोज़मर्रा की बातचीत का हिस्सा है। एक ओर यह सबसे पवित्र रिश्तों में से एक है तो दूसरी ओर यह सबसे आम और अश्लील गालियों का हिस्सा भी।...
भिखारी ठाकुर के नाटकों में नारी विमर्श
‘गबरघिचोर’ नाटक में भिखारी ठाकुर विस्मित करते हैं। उनकी पृष्ठभूमि ऐसी नहीं थी कि उन्होंने ब्रेख्त का नाटक ‘कॉकेशियन चॉक सर्किल’ पढ़ा या देखा हो। कोख पर स्त्री के अधिकार के बुनियादी प्रश्न को वह...
ब्राह्मण वर्गों की ‘पवित्रता’ के निशाने पर बहुजन
कोई किसी विशेष नदी में नहाकर ‘पवित्र’ हो सकता है, भले उसका पानी बहुत दूषित हो। इसके विपरीत...
अगर जीतू मुंडा की जगह एक आदिवासी महिला होती …
आदिवासी समाज के कई हिस्सों में आज भी महिलाओं के प्रति अंधविश्वास, पितृसत्ता और सामाजिक भेदभाव गहराई से...
एक दलित छात्रा का कैंपस के भीतर और बाहर का जीवंत अनुभव
अगर डांगावास (14 मई, 2015, राजस्थान), खैरलांजी (27 सितंबर, 2006, महाराष्ट्र) और लक्ष्मणपुर बाथे (1 दिसंबर, 1997) जैसे...
‘युगांतर’ के दायरे में अछूत
सन् 1930 के आरंभिक वर्षों तक संतराम बी.ए. एक ऐसे समाज सुधारक के तौर पर हमारे सामने प्रस्तुत...
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