निधन के पहले 14 अक्टूबर, 1956 को नागपुर के दीक्षा भूमि में बाबासाहब ने बौद्ध धर्म स्वीकार करते समय देश के बहुजनों को जो 22 प्रतिज्ञाएं दिलवाईं, उनका सार वही था जो जोतीराव फुले की ‘गुलामगिरी’ में है। पढ़ें, डॉ. संजीव कुमार का यह आलेख
फुले उन्नीसवीं सदी के महानतम व्यक्तियों में से एक थे, जिन्होंने औपनिवेशिक भारत में तमाम बहसों और विमर्शों की नुमाइंदगी करते हुए ब्राह्मणवादी अवधारणा...