कवि राजेश पाल उम्मीद के रचनाकार हैं। उनका आक्रोश विध्वंसक नहीं है, सृंजनशील है। वे हर तरह की असमानता, अन्याय और भेदभाव का ख़ात्मा चाहते हैं। उनकी समस्त काव्य रचनाएं इसी स्वप्न को लेकर सृजित होती हैं। बता रहे हैं प्रो. नामदेव
रामजी यादव की कहानी ‘लोकविद्याधर’ लोककला के क्षरण, पारंपरिक कारीगर जातियों के रोजगार-संकट, बाजार के अमानवीय दबाव और जाति-वर्ग से निर्मित सामाजिक दूरी को...
डॉ. राजेंद्र प्रसाद सिंह की प्रकाशित कृतियां भाषा-विज्ञान, साहित्यालोचना, इतिहास-बोध, लोकसंस्कृति तथा बहुजन विमर्श के विविध आयामों को अपने आप में समेटी हुईं हैं।...