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Abhay Kumar
इस्लाम, जाति-प्रथा और प्रेमचंद
अभय कुमार
सांप्रदायिक लेखक और नेता प्रायः राजनीतिक इतिहास को अनावश्यक रूप से प्राथमिकता देते हैं, जबकि सामाजिक और आर्थिक...
कॉकरोच जनता पार्टी का उभार : एक आंबेडकरवादी विश्लेषण
अभय कुमार
कोई भी आंदोलन हो, कोई भी पार्टी हो, कोई भी लीडर हो यह देखा जाना चाहिए कि इस...
बाबासाहेब ने क्यों कहा कि सामाजिक और आर्थिक अधिकारों के बिना राजनीतिक अधिकार अधूरे हैं?
अभय कुमार
संविधान सभा के अपने संबोधन में डॉ. आंबेडकर की एक अहम बात यह भी थी कि अच्छा कानून...
‘जीते जी इलाहाबाद’ में दलित-बहुजनों के सवालों को नहीं देख सकीं ममता कालिया
अभय कुमार
जहां एक तरफ़ इलाहाबाद के सामाजिक यथार्थ की बात करने से गुरेज़ किया गया है, वहीं लेखिका इस...
एक किताब, जिसमें दर्ज है मीडिया में दलित-बहुजनों के प्रति हिकारत के दास्तान
अभय कुमार
न्यूज़रूम में दलितों और आदिवासियों को अख़बार के सवर्ण समाज से आने वाले मालिकों, मैनेजरों और संपादकों का...
यूजीसी रेगुलेशन : इन कारणों से जरूरी है दलित-बहुजनों की यह लड़ाई
अभय कुमार
विश्वविद्यालयों में बहुजन छात्रों के ख़िलाफ़ गहरे और व्यवस्थित भेदभाव का एक प्रमुख कारण यह है कि प्रशासन...
सवर्ण या गैर-सवर्ण का होगा राज, तय करेगा बिहार, लेकिन सवाल और भी हैं
अभय कुमार
जदयू की दिख रही संगठनात्मक कमज़ोरी और नीतीश कुमार की ढलती उम्र को भाजपा अपने लिए अवसर के...
बिहार विधानसभा चुनाव और मुस्लिम प्रतिनिधित्व का प्रश्न
अभय कुमार
डॉ. आंबेडकर बार-बार इस बात पर ज़ोर देते थे कि भारतीय समाज जात-पात की असमानता पर आधारित है,...
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