चरित्र है अपनी क्षमता हासिल करने की कुंजी

चरित्र और ‘कालिंग’, दोनों का संबंध ईश्वर ने हमें किस इरादे से बनाया, उसने हमारे लिए क्या सपना देखा है, उसे खोजना और उसकी पूर्ति करना है। यह तुम्हारे अस्तित्व के अन्तरतम की खोज, उसकी संरक्षा और उसका पोषण करना है। यह, वह बनने का प्रयास है, जिसके लिए तुम इस पृथ्वी पर आयी हो

प्रिय दादू,
आप बार-बार चरित्र के बारे में कुछ न कुछ कहते रहते हैं। और मेरे परिचितों में ऐसा करने वाले आप एकमात्र व्यक्ति नहीं हैं! परन्तु मेरी जान-पहचान के अधिकांश लोगों को धन, मजा-मौज, फैशन व अपनी जिंदगी के बारे में बातें करने से ही फुर्सत नहीं मिलती। क्या चरित्र सचमुच इतना महत्वपूर्ण है? और यदि हाँ, तो क्यों?

सप्रेम
शांति

प्रिय शांति,
यह सही है कि हमारा देश उन चीजों के पीछे पागल है, जिनकी चर्चा तुमने की है। परन्तु हमारा देश एक विशेष प्रकार की आध्यात्मिकता के पीछे भी पागल है, जिसमें चरित्र की न तो कोई भूमिका है और ना ही उपयोगिता। यही कारण है कि हमारे देश के अधिकांश लोग चरित्र का वास्तविक अर्थ ही नहीं समझते।
मैं ‘चरित्र’ की अवधारणा को इतने संक्षेप में कैसे समझाऊँ कि तुम बोर न हो? मुझे नहीं पता कि तुमने ग्राहम ग्रीन का उपन्यास ”ब्राइटन रॉक’ पढ़ा है या नहीं। यह कोई महान कृति नहीं है और ना ही ग्रीन, दुनिया के महानतम उपन्यासकारों में से एक हैं। इसलिए, यह न समझना कि मैं तुमसे इस उपन्यास को पढऩे की सिफारिश कर रहा हूँ। परंतु जब मैं तुम्हारी उम्र का था उस समय ग्रीन को पढऩा फैशन का हिस्सा था और मैं इस उपन्यास की चर्चा इसलिए कर रहा हूं क्योंकि उसमें पहली बार मेरा ब्राइटन रॉक से परिचय हुआ। उपन्यास का एक पात्र कहता है कि ”वह चट्टान की परतों जैसी है: उसे कितना ही काटते जाओ, तुम्हें फिर भी ब्राइटन ही लिखा दिखाई देगा।’

चैरिएट्स ऑफ फायर फिल्म का एक दृश्य

चैरिएट्स ऑफ फायर फिल्म का एक दृश्य

तब मुझे समझ में नहीं आया कि वह पात्र किस चीज के बारे में बात कर रहा है। मुझे यह भी समझ में नहीं आया कि कोई चट्टान परतों में बंटी कैसे हो सकती है और यह कैसे संभव है कि उसे काटते जाने पर भी ब्राइटन लिखा दिखाई देता रहेगा।

मुझे इस चीज का अर्थ तब समझ में आया जब मैं ब्राइटन गया, जो कि इंग्लैण्ड के दक्षिण में समुद्र के किनारे स्थित एक रिसोर्ट है। वहां मेरे बचपन की यह पहेली एकदम से हल हो गई। वहां मैंने पहली बार ब्राइटन रॉक को देखा (और चखा)।
असल में वह चट्टान है ही नहीं बल्कि एक तरह की मिठाई है, जो बाहर से चट्टान की तरह कड़ी होती है और अंदर से थोड़ी मुलायम। वह एक छड़ी के आकार की होती है और उसकी पूरी लंबाई में शहर का नाम लिखा होता है। इसलिए आप उसे चाहे जहां से काटें आप शहर का नाम पढ़ सकते हैं। मुझे नहीं पता कि इस तरह की मिठाई दुनिया में सबसे पहले कहां बनाई गई थी परंतु अब वह पूरी दुनिया में उपलब्ध है। भारत और कुछ अन्य देशों में भी इस तरह की मिठाईयां मिलती हैं, जिनके बीचों-बीच कुछ लिखा होता है या कोई रेखाकृति बनी होती है। और अब तो इससे मिलती-जुलती ”मुलायम मिठाईयां’ भी मिलती हैं।
तो आखिर ब्राइटन रॉक का, चरित्र के बारे में तुम्हारे प्रश्न से क्या संबंध है?
तुम्हारा चरित्र, दरअसल, वह है जो तुम अपनी दिल की गहराइयों में हो। दूसरे शब्दों में, तुम्हारी असली सोच, तुम्हारा असली दृष्टिकोण और तुम्हारी असली मानसिकता। परंतु ब्राइटन रॉक और तुम्हारे (या मेरे) चरित्र में एक मूल अंतर है। और वह यह कि एक बार बनने के बाद, ब्राइटन रॉक – जब तक उसे कोई खा नहीं लेता – वैसी ही बनी रहती है। इसके विपरीत, तुम और मैं लगातार अपने चरित्र को आकार देते रहते हैं।
हम सब के कुछ आदर्श होते हैं परंतु हम जो करते हैं, जो सोचते हैं और उपलब्ध विकल्पों में से जिस विकल्प को चुनते हैं उसके कारण हम जिस प्रकार के व्यक्ति हैं उसमें लगातार बदलाव होता रहता है और हम या तो अपने आदर्शों के नजदीक जाते हैं या उनसे दूर होते जाते हैं।
हर दिन, हर क्षण हमारे सामने विकल्प होता है – हम अपने आदर्श को चुनें या अस्थायी लाभ और आनंद पाने के लिए उससे दूर जाएं। क्या हम झूठ बोलें? क्या हम धोखा दें? क्या हम किसी पुरूष या महिला को ईर्ष्‍या या वासना भरी निगाहों से देखें? क्या हम अपने काम को जितना बेहतर ढंग से कर सकते हैं, उतने बेहतर ढंग से करें या फिर केवल उतने ही अच्छे से करें, जिससे हमारी नौकरी बनी रहे?

अपने उद्देश्य की खोज

मुझे उम्मीद है कि तुम अपने चरित्र और अपनी ‘कालिंग’ (ईश्वरीय आह्वान) के परस्पर संबंध को समझ पा रही होगी। ‘कालिंग’ का अर्थ यह है कि हम में से हर एक को ईश्वर ने एक विशिष्ट उद्देश्य से बनाया है और हमारी यह जिम्मेदारी है कि हम उस उद्देश्य की पूर्ति करें। मैंने कब-जब ‘कालिंग’ के संबंध में तुम्हें और अन्यों को लिखे अपने पत्रों में चर्चा की है।
चरित्र और ‘कालिंग’, दोनों का संबंध ईश्वर ने हमें किस इरादे से बनाया, उसने हमारे लिए क्या सपना देखा है, उसे खोजना और उसकी पूर्ति करना है। यह तुम्हारे अस्तित्व के अन्तरतम की खोज, उसकी संरक्षा और उसका पोषण करना है। यह, वह बनने का प्रयास है, जिसके लिए तुम इस पृथ्वी पर आयी हो।
क्या तुमने ‘चैरिएट्स ऑफ फायर’ फिल्म देखी है? वह सच्ची घटनाओं पर आधारित फिल्म है, जिसे चार एकेडमी पुरस्कार मिले थे। यह 1924 के ओलंपिक खेलों में भाग लेने वाले दो एथलीटों की कहानी है। अगर तुमने यह फिल्म नहीं देखी है, तो इसे जरूर देखो। फिल्म के दो प्रमुख पात्रों में से एक एरिक लिडेल, अपनी बहन से कहता है, ”मुझे विश्वास है कि ईश्वर ने मुझे एक विशिष्ट उद्देश्य से बनाया है। उसने मुझे तेज बनाया है और जब मैं दौड़ता हूं तो मुझे उसकी प्रसन्नता महसूस होती है।’
ईश्वर मुझे और तुम्हें जो बनाना चाहता है, वह बनना हमारे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण काम है। अगर हम यह ठीक से करते हैं तो इससे ईश्वर प्रसन्न होता है। इसके अतिरिक्त, यही वह एकमात्र तरीका है जिससे हमारा जीवन परिपूर्ण और समृद्ध बन सकता है।
यह समझने का प्रयास ही न करने कि तुम्हें किसलिए बनाया गया है या उसे न समझने या समझने के बाद भी उस पर अमल न करने से तुम जीवन में चाहे जितना भी कुछ कर लो परंतु अंतत: तुम वह नहीं कर सकोगी जो सबसे महत्वपूर्ण है।
ईसा मसीह ने इसे इन शब्दों में कहा था, ”तुम्हें क्या लाभ होगा यदि तुम पूरी दुनिया पा लो परंतु अपनी आत्मा खो बैठो?’
इसलिए, प्रिय शांति, उन चीजों के पीछे मत दौड़ो जिनके पीछे पूरी दुनिया दौड़ रही है। तुम उस ओर जाओ, जहां तुम्हें जाना चाहिए, चाहे इसकी तुम्हें कितनी ही बड़ी कीमत क्यों न अदा करनी पड़े। क्योंकि अंतत: तुम्हारा चरित्र और तुम्हारी ‘कालिंग’ ही महत्वपूर्ण है; बाकि सब अर्थहीन और बेकार है।
सप्रेम
दादू

फारवर्ड प्रेस के जून, 2015 अंक में प्रकाशित

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