विश्‍लेषण | Analysis

दलित आंदोलन को नया आयाम दे रही भीम आर्मी

सदियों से शोषित दलित अब जागरुक हो रहे हैं। उनकी राजनीतिक चेतना ने ऊंची जातियों को प्रभावित किया है और नब्बे के दशक के बाद प्रतिरोध के स्वर और मुखर हुए हैं। लेकिन चुनावी तिकड़मों में फ़ंसे दलित राजनीतिक चेतना ने उन्हें निराश भी किया है जो इक्कीसवीं सदी के दूसरे दशक में भी अपमानजनक टिप्पणियों एवं अन्य प्रकार के भेदभाव के शिकार हैं। वह भी तब जबकि देश की राजनीति में उनका हस्तक्षेप निर्णायक बन चुका है। अपनी भीम आर्मी के सहारे चंद्रशेखर इक्कीसवीं सदी के दूसरे दशक में दलित आंदोलन के नये स्वरुप को सामने लाने को सियासी गलियारे में प्रचलित तरीकों के जरिए प्रयास कर रहे हैं।