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Neeraj Bunkar

‘मिमी’ : केवल एक सरोगेट मदर की कहानी नहीं
वैसे तो फ़िल्म सरोगेसी के मुद्दे को केंद्र में रखकर बनायी गयी है, मगर कहानी के भीतर न...
बढ़ती चेतना के कारण निशाने पर राजस्थान के मेघवाल
15 अक्टूबर, 1962 को कालूराम मेघवाल अपने गांव के ठाकुरों के कुंए पर गए। खुद पानी पिया और...
Atrocities against the Meghwals in Rajasthan: A sociohistorical perspective
On 15 October 1962, Kaluram Meghwal went to the well of the Thakurs of his village, drank the...
बढ़ती चेतना के कारण निशाने पर राजस्थान के मेघवाल
15 अक्टूबर, 1962 को कालूराम मेघवाल अपने गांव के ठाकुरों के कुंए पर गए। खुद पानी पिया और...
Atrocities against the Meghwals in Rajasthan: A sociohistorical perspective
On 15 October 1962, Kaluram Meghwal went to the well of the Thakurs of his village, drank the...
‘Nirmal Pathak Ki Ghar Wapsi’: Yet another story of upper-caste charity
In films and TV serials, why are upper-caste characters needed to bring about consciousness in Dalits? When the...
‘निर्मल पाठक की घर वापसी’ : एक घिसी-पिटी गांधी की ‘हरिजनवादी’ कहानी
फिल्मों व धारावाहिकाें में दलितों में हमेशा चेतना सवर्ण समुदाय से आने वाले पात्रों के दखल के बाद...
Divorced from social realities, Bollywood films are losing the plot
South Indian films entertain but they also overtly reference local, social issues. However, Bollywood films are unable to...
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