गुवा गोलीकांड के बाद झारखंड आंदोलन में जो ऊर्जा और एकजुटता आई, उसने आने वाले दो दशकों की दिशा तय की। और ठीक 20 साल बाद, 15 नवंबर 2000 को जब झारखंड राज्य का निर्माण...
भाजपा को खुद का भरोसा टूट गया है कि आंदोलनों, लोकतांत्रिक विरोध को वह मैनेज कर सकती है। लोगों पर ज्यादती, जुल्म, दमन की कहानियों को अपने स्तर पर दुरुस्त कर लेगी। इसकी वजह यह...
केवल ‘भेदभाव’ की परिधि में ओबीसी को शामिल करने भर से जब ऊंची जातियों के लोग पूरा आसमान सिर पर उठाकर बवाल काट रहे हैं तब जिस दिन निजी उच्च शिक्षण संस्थानों में एससी, एसटी...
सभी जातियों में राजपूतों का प्रतिनिधित्व सबसे ज्यादा है। पिछड़े वर्गों में कुशवाहों और उनके बाद यादवों की संख्या सबसे अधिक है। अति पिछड़े वर्गों और अनुसूचित जातियों में क्रमशः धानुक और रविदास जातियों की...