कुल 11 अध्यायों वाले इस किताब में प्रो. शेपर्ड बताते हैं कि छिटपुट तौर पर ही सही, शूद्रों के विद्रोह ने मानववादी सभ्यता और समता, समानता व बंधुता जैसे मूल्यों पर आधारित देश व समाज...
कुल आठ अध्यायों में विभाजित इस किताब में पाठक उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु आदि राज्यों में सामाजिक न्याय आंदोलनों के इतिहास, वर्तमान और भविष्य में इसकी दशा-दिशा जान सकेंगे। इसके अलावा असम सहित...
सावित्रीबाई फुले की कुशाग्रता का परिचय इतिहास की उनकी गहरी समझ से मिलती है। उन्होंने शूद्र शब्द का अर्थ ‘मूलवासी’ बताया है। वह कहती हैं कि शूद्र भारत के मूलवासी हैं, जिन्होंने प्रारंभ में ईरानी-ब्राह्मणों...