‘भारत संस्कृति नहीं, संस्कृतियों का देश’

मुजफ्फरपुर के सीनेट हॉल में अखिल भारतीय सर्वजन संस्कृति मंच, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर की ओर से ‘साझी संस्कृति बनाम आतंकवाद’ विषय पर एक राष्ट्रीय परिसंवाद का आयोजन किया गया

मुजफ्फरपुर (बिहार) : देश में संस्कृतियों पर खतरे और आतंकवाद की चुनौतियों पर दिनांक 5 दिसंबर को बीआरए विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर के सीनेट हॉल में अखिल भारतीय सर्वजन संस्कृति मंच, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर की ओर से ‘साझी संस्कृति बनाम आतंकवाद’ विषय पर एक राष्ट्रीय परिसंवाद का आयोजन किया गया। समारोह का उद्घाटन विवि के डीन, छात्र कल्यााण डॉक्टर नंद किशोर सिंह ने करते हुए आगत अतिथियों का स्वागत किया। समारोह को बाबरी मस्जिद कांड में सीबीआई के प्रमुख गवाह रह चुके युगल किशोर शरण शास्त्री, संस्कृति मंच के संयोजक हरिनारायण ठाकुर, संयोजक मंडल के सदस्य रमेश पंकज, छत्तीसगढ़ की प्रोफेसर उर्मिला शुक्ला, नीतीश्वर महाविद्यालय के प्रिंसिपल अबजुर कमालुद्यीन, महाराष्ट्र की प्रमिला वर्मा, दिव्या वर्मा और इकबाल शमी ने संबोधित किया। कार्यक्रम में स्वागत भाषण विकास नारायण उपाध्याय ने और धन्यवाद ज्ञापन हेम नारायण विश्वकर्मा ने किया।

(फारवर्ड प्रेस के जनवरी, 2014 अंक में प्रकाशित )


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