अश्फाकउल्ला और बिस्मिल को याद किया गया

उत्तर-पूर्वी दिल्ली का खजूरी मुख्यत: मुस्लिम श्रमिकों का रहवासी इलाका है। यहां न तो पीने का साफ पानी उपलब्ध है, न साफ-सफाई, न सीवेज और ना ही सड़कें। यहां के हालात देखकर ऐसा लगता है कि स्वच्छ भारत शायद किसी दूसरे ग्रह पर है

दिल्ली : उत्तर-पूर्वी दिल्ली का खजूरी मुख्यत: मुस्लिम श्रमिकों का रहवासी इलाका है। यहां न तो पीने का साफ पानी उपलब्ध है, न साफ-सफाई, न सीवेज और ना ही सड़कें। यहां के हालात देखकर ऐसा लगता है कि स्वच्छ भारत शायद किसी दूसरे ग्रह पर है। इसके बावजूद, इस इलाके के रामलीला मैदान में आरएसएस नियमित रूप से अपनी शाखा लगाता है, वह भी पुलिस सुरक्षा में। परंतु गत 19 दिसंबर को, जब नौजवान भारत सभा ने इस मैदान पर अश्फाकउल्ला और बिस्मिल का शहादत दिवस, “क्रांतिकारी एकता दिवस” के रूप में मनाने का निर्णय लिया तब स्थानीय थाना प्रभारी, ”ऊपर से दबाव” और सांप्रदायिक तनाव की आशंका का वास्ता देते हुए, कार्यक्रम की अनुमति देने में आनाकानी करने लगे। परंतु कार्यक्रम अंतत: आयोजित हुआ और सैंकड़ों स्थानीय रहवासियों ने दोनों मित्रों और कवियों-जिनमें से एक हिंदू था और एक मुसलमान-को याद किया। इन दोनों को ब्रिटिश सरकार ने फांसी पर लटका दिया था।

(फारवर्ड प्रेस के फरवरी, 2015 अंक में प्रकाशित )


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