संक्षिप्त समाचार, अप्रैल, 2015

11 मार्च को आयोजित एक बैठक में फॉरवर्ड प्रेस क्लब के सदस्यों ने महिलाओं के खिलाफ विभिन्न प्रकार की हिंसा पर चिंता व्यक्त की। सदस्यों ने पिछले दिनों ब्रिटिश फिल्म निर्माता लेशली उडियन द्वारा निर्देशित डाक्युमेंट्री ‘इंडियाज डाउटर’ पर भारत मे प्रतिबंध लगाये जाने के मद्देनजर यह बैठक आयोजित की थी

दलित-आदिवासी विद्यार्थी, कार्यकर्ता गिरफ्तार

नई दिल्ली: गत 12 मार्च को शास्त्री भवन के पास से 30 से अधिक दलित-आदिवासी छात्रों व कार्यकर्ताओं को तब गिरफ्तार कर लिया गया, जब वे दलित व आदिवासी विद्यार्थियों की शिक्षा संबंधी कार्यक्रमों के लिए बजट में कम धन आवंटित किए जाने के सिलसिले में केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी से मुलाकात करने के लिए वहां पहुंचे थे। इन विद्यार्थियों का प्रतिनिधिमंडल, जिसमें जानेमाने दलित कार्यकर्ता व ‘नेशनल कैम्पेन ऑन दलित हृमन राईट्स’ के महासचिव एन दिवाकर शामिल थे, मंत्री को एक ज्ञापन सौंपकर यह मांग करना चाहते थे कि बजट में किये गये आवंटन पर पुनर्विचार किया जाए। इन कार्यकर्ताओं को पार्लियामेंट पुलिस थाने ले जाया गया, जहां दलित कार्यकर्ता बीना पल्लीकल को जबरदस्ती खींचकर अंदर किया गया।

इसके पहले दिल्ली, हरियाणा, उत्तरप्रदेश व बिहार के लगभग 500 विद्यार्थी, केंद्र की भाजपा सरकार की दलित/आदिवासी विरोधी नीतियों पर अपना विरोध व्यक्त करने के लिए जंतर-मंतर पर इकट्ठा हुए थे। वहां से लगभग 30 प्रतिनिधि मानव संसाधन मंत्रालय के लिये रवाना हुए थे। इस प्रदर्शन का आयोजन ‘कैम्पेन ऑफ आदिवासी एंड दलित्स फॉर राईट्स ऑन एजुकेशन’ ने किया था। विद्यार्थियों के अनेक संगठनों सहित कई सामाजिक संगठनों ने इस प्रदर्शन में भाग लिया। प्रदर्शन में राज्यसभा सदस्य रामदास अठावले की उपस्थिति ने विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ाया। मोदी सरकार द्वारा सबसे वंचित तबकों-दलितों व आदिवासियों-के कल्याणार्थ बजट आवंटन में इस वर्ष भारी कमी की गई है। ‘हम दलितों और आदिवासियों के लिए बजट में की गई एकतरफा कमी का कड़ा विरोध करते हैं’, दिवाकर ने जंतर-मंतर पर आयोजित आमसभा में कहा।

-व्ही. रमेश नाथन

india'sdaughterमहिलाओं के खिलाफ हिंसा पर चिंतित एफ पी क्लब

बस्ती, उत्तरप्रदेश: पिछले 11 मार्च को आयोजित एक बैठक में फॉरवर्ड प्रेस क्लब के सदस्यों ने महिलाओं के खिलाफ विभिन्न प्रकार की हिंसा पर चिंता व्यक्त की। सदस्यों ने पिछले दिनों ब्रिटिश फिल्म निर्माता लेशली उडियन द्वारा निर्देशित डाक्युमेंट्री ‘इंडियाज डाउटर’ पर भारत मे प्रतिबंध लगाये जाने के मद्देनजर यह बैठक आयोजित की थी। बैठक में वक्ताओं ने परंपरावादी सोच को महिलाओं के खिलाफ हिंसा का मूल कारण बताया। सरोज गौतम, कैलाश सोनी, रामलाल शरण वर्मा, डा. आरसी वर्मा, दयाराम भारती, कृष्ण कुमार प्रजापति, जानकी प्रसाद राय आदि ने अपने विचार रखे।

– आर्य पी आर्य

अंधविश्वास के खिलाफ मुहीम

रायपुर : देश के जाने माने वैज्ञानिक डॉ नरेन्द्र नायक के द्वारा पिछले दिनों रायपुर में प्रस्तुत अंधविश्वास और चमत्कार पर दिया गया उनका आडियो -वीडियो व्याख्यान बेहद सराहनीय रहा। डॉ नरेन्?द्र नायक अंधविश्वास शब्द को भी सही नही मानते है। वे कहते है कि अंधविश्वास शब्द वास्तव में अंधे लोगों का अपमान है, जो हमें नही करनी चाहिए, क्योकि जिसे हम अंध विश्वास कहते है, वह आँखों देखा गलत विश्वास है। वे अंधविश्वास के स्?थान पर गलत विश्वास शब्?द का प्रयोग करना ज्यादा ठीक समझते है।
डा. नरेन्द्र नायक के अनुसार ‘आज देश में तीक्ष्?ण बुद्धि के केन्द्र माने जाने वाले सारे संस्थान अंधविश्वास के केन्द्र बन चुके है। परिक्षाओं में पास होने के लिए मंदिर, मस्जिद, मजारों, गुरूद्वारों में यहां के छात्र चढावा चढाने में आगे होते है। आखिर क्यों? इसका कारण है बचपन, हमारे यहां बच्चों को प्रश्न करने नही दिया जाता। जब बच्चा पहली बार प्रश्न उठाता है, तो हम उसे जलील करते है। इस हद तक जलील करते है की उसकी भविष्य में प्रश्न पूछने की संभावनाएं खत्म हो जाती है। जब वही व्यक्ति वैज्ञानिक बनता है तब भी अंधविश्वास की जकड से निकल नही पाता।’

-संजीव खुदशाह

गरीब की छात्रवृति पर साहबों की बुरी नजर

भोपाल :प्रदेश में सरकारी सहायता के दम पर पढ़ाई करने वाले ओबीसी, एससी और एसटी छात्रों के सामने अपनी आगे की पढ़ाई जारी रखने में विकट संकट उत्पन्न हो गया है। कभी वे छात्रवृति में कटौती तो कभी छात्रवृति मिलने में होने वाली विलंब से परेशान हैं। व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की पढ़ाई करने वाले छात्रों को शासकीय और गैर शासकीय शिक्षण संस्थाओं में निर्धारित अलग-अलग शैक्षणिक शुल्क के आधार पर एक लाख से तीस हजार रुपए तक छात्रवृति दी जा रही थी। लेकिन नए साल में छात्रवृति वितरण करने वाली संस्था पिछड़ा वर्ग विभाग ने 2003 के एक सरकारी आदेशों का हवाला देते हुए ओबीसी छात्रों की छात्रवृति की राशि में भारी कटौती करते हुए अधिकतम राशि दस हजार तय कर दिया है। सरकार के इस ताजा फैसले से प्रदेश में उच्च और तकनीकी शिक्षा ग्रहण कर रहे लगभग 50 हजार ओबीसी छात्रों की पढ़ाई खटाई में पड़ सकती है। दूसरी ओर प्रशासनिक अधिकारियों, स्कूल प्रबंधनों और बैंक कर्मचारियों की साठगाठ से छात्रवृतियों की रकम की बंदरबांट भी प्रदेश में बड़ी समस्या है। सरकार के इस फैसले से नाराज भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर सहित कई शहरों से आए इंजीनियरिंग के छात्रों ने पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के मंत्री अंतर सिंह आर्या से मुलाकात कर अपनी समस्या रखी है। इस मुददे पर मंत्री अंतर सिंह आर्या ने कहा है कि उन्होंने संबंधित विभाग के कमिशनर से लिखित में इस संदर्भ में जानकारी मांगी है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि बहुत जल्द समस्या का निराकरण कर लिया जाएगा।

-हुसेन ताबिश

 

फारवर्ड प्रेस के अप्रैल, 2015 अंक में प्रकाशित

About The Author

Reply