घर बैठे नामचीन विश्वविद्यालयों से प्राप्त करें डिग्री, स्कालरशिप के विकल्प उपलब्ध

प्रमुख कॉलेजों व संस्थानों में दाखिला लेने की इच्छा हर छात्र की होती है, लेकिन सीमित सीटें होने की वजह से सभी की इच्छा पूरी नहीं हो पाती है। नाउम्मीद होने की जरूरत नहीं है, इसके अलावा भी बेहतर कई विकल्प हैं, जिस पर ध्यान देने की जरूरत है। विस्तृत जानकारी दे रहे हैं कुमार समीर :

हर साल 12वीं की बोर्ड परीक्षा पास करने के बाद एडिमशन को लेकर किस तरह की मारामारी रहती है, यह हम सभी जानते हैं। देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश पाने के लिए छात्र राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली प्रवेश परीक्षाओं में सफल होने के लिए जी-जान लगा देते हैं, लेकिन सीमित सीटें होने की वजह से गिने-चुने छात्रों को ही मौका मिल पाता है। मेधा होने के बावजूद बहुतेरे छात्रों को विकल्प नहीं सूझता, लेकिन सच तो यह है कि इनके पास विकल्पों की कमी नहीं है। यदि कमी है तो केवल जानकारी की।

सच तो यह है कि विदेश जाकर अपने पढ़ाई के सपने को पूरा करना भी अब मुश्किल नहीं रह गया है। इंटरनेट के माध्यम से जुड़कर जहां आक्सफोर्ड और हार्वर्ड में पढ़ने का सपना पूरा किया जा सकता है, वहीं अगर कोई विदेश जाकर अपने पढ़ाई के सपने को पूरा करना चाहते हैं तो स्काॅलरशिप सहित कई विकल्प छात्रो के समक्ष होता है।

हार्वर्ड विश्वविद्यालय, अमेरिका

ऑनलाइन करें विदेश के विश्वविद्यालयों में पढ़ाई

आॅन लाइन एजूकेशन की बात करें तो घर बैठे निशुल्क आक्सफोर्ड, हार्वर्ड, एमआईटी, आईआईटी सहित दुनिया भर की यूनिवर्सिटी की डिग्री ले सकते हैं। आप यह सपना मैसिव ओपन आॅन लाइन कोर्स (एमओओसी) के जरिए पूरा कर सकते हैं। इसके जरिए कोई भी पसंदीदा कोर्स आप कर सकते हैं। ओपन कंटेंट का विकल्प रहेगा। मतलब इंटरनेट पर मौजूद ऐसी जानकारी या पाठ्यसामग्री जो कहीं भी किसी भी यूजर के लिए मुफ्त (या मामूली फीस) उपलब्ध हो। इंटरनेट यूजर अपनी जरूरत के हिसाब से उसका प्रयोग कर सकते है और जरूरी लगे तब कई मामलों में उसमें बदलाव भी कर सकता है। मैसिव ओपन आॅन लाइन कोर्सेज ऐडेक्स और इस तरह की दूसरी वेबसाइट कोरसेरा, उडासिटी और स्वयं पर मौजूद है।    

मौजूदा समय में आॅन लाइन एजूकेशन के दो आयाम हैं। पहला क्रेडिट कोर्स का है। क्रेडिट कोर्स ऐसे कोर्स होते हैं जिनमें छात्रों का रजिस्ट्रेशन किया जाता है और फिर उन्हें आॅन लाइन माध्यम से क्लास की सुविधा मुहैया करायी जाती है। दुनिया के कई नामचीन विश्वविद्यालय भी आॅन लाइन माध्यम से धर बैठे क्रेडिट कोर्स कराते हैं। ऐसे आॅन लाइन प्रोग्राम प्रोफेशनल लोगों और ऐसे छात्रों को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं जो खास प्रशिक्षण और सर्टिफिकेशन परीक्षा की तैयारी कर रहे होते हैं। विदेशी भाषाओं, अकाउंटिंग और नर्सिंग की पढ़ाई के लिए आॅन लाइन लर्निग प्रोग्राम सबसे ज्यादा मशहूर है। ज्यादातर लोग अपना कैरियर शुरू करने के बाद अपने स्किल को बढ़ाने के लिए आॅन लाइन सर्टिफिकेशन कोर्स करने को इच्छुक होते हैं।      

ये वेबसाइट हैं महत्वपूर्ण

www.coursera.org

https://in.udacity.com/course/full-stack-foundations–ud088

https://swayam.gov.in/search?keyword=50

www.edx.org/school/mitx

https://online.stanford.edu/course

https://online-learning.harvard.edu/courses?sort_by=date_added&category%5B%5D=3

भारतीय संस्थाओं के साथ करार

ऐडेक्स ने भारत में आईआईटी, मुंबई, आईआईएम, बेंगलुरु और बिट्स पिलानी जैसे संस्थानों के साथ साझेदारी की है। इनके कोर्स अब वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। एमओओसीएस के जरिए लोगों को रोजगार मिले, इसके लिए भारत की प्रमुख एम्प्लायबिलीटी साल्युशन कंपनी एसपायिरंग माइंड्स के साथ एडैक्स ने करार भी किया है। ऐसे आॅन लाइन लर्निंग प्रोग्राम की कोशिश है कि रोजगार खोजने वाले और रोजगार देने वाले दोनों की जरूरतें पूरी हो। उसी के माध्यम से पाठ्यक्रम तैयार किये जाते हैं। आईआईटी, मुंबई की बात करें तो एडेक्स के जरिए वह कई तरह के एमओओसी उपलब्ध कराता है। इनमें फाउंडेशन आॅफ डाटा, इंप्लीमेंटेशन आॅफ डाटा, प्रोग्रामिंग, बेसिक, फंडामेंटल्स आॅफ कम्प्यूटर, थरमोडानेमिक्स सहित कई अन्य कोर्स भी उपलब्ध हैं।

आईआईटी मुंबई में भी है ऑनलाइन कोर्स की सुविधा

आईआईटी,कानपुर ने तो अपना खुद का मैसिव ओपन आॅन लाइन कोर्स प्लेटफार्म बना रखा है। कानपुर के इस एमओओसी प्लेटफार्म में लगभग 15 कोर्स उपलब्ध हैं। इनमें टेक्नोलाजी इनेबल्ड लर्निंग, बेसिक आफ एंटेप्रीन्योरशिप, हिस्ट्री एंड फिलोसफी आॅफ साइंस आदि हैं। यहां स्वयं ग्रुप से सरकार ने एमओओसी में कदम रखा है।

आईआईएम, लखनऊ में ऑनलाइन उपलब्ध हैं 15 कोर्स

देश के अलावा विदेशी संस्थाओं में भी आॅन लाइन कोर्स की सुविधा उपलब्ध है। जान हापकिंस स्कूल के डाटा एनालिसस कोर्स में एनालिसिस के अलावा स्टैस्टिकल तकनीकों के बारे में पढ़ाई करायी जाती है। यह कोर्स बायो स्टैटिक्स के छात्रों के लिए काफी फायदेमंद हैं। इस कोर्स को पढ़ाने के लए आर स्टैस्टकल प्रोग्राम लैग्वेज का प्रयोग किया जाता है। इसी तरह स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में आर्टिफिशयल एंटेलिजेंस, स्टैटिस्टिक्स, बायस नेटवर्क, मशीन लर्निंग, इमेज प्रोसेसिंग, कंप्यूटर विजन, रोबोटिक्स के बारे में पढ़ाई करायी जाती है। ये सभी कोर्स आॅन लाइन लर्निग प्लेटफार्म उदासिटी द्वारा करावाया जाता है।

विदेशी विश्वविद्यालय केवल एक क्लिक दूर

इसी तरह यूनिवर्सिटी आॅफ मिशिगन (माडल थिंकिंग) में जानकारी के जटिल जाल को संयोजित कर उसे आसान माॅडल में उपलब्ध कराने के बारे में पढ़ाया जाता है। इस कोर्स में मॉड्यूलिंग कांसेप्ट और विभिन्न प्रकार के माॅडल के बारे में पढ़ाया जाता है। यह कोर्स 12 हफ्तों का होता है। इसके अलावा हार्वर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा इंट्रोडक्शन टू कम्प्यूटर साइंस कोर्स आॅनलाइन प्लेटफार्म इडएक्स और हार्वर्ड एक्स में करवाया जाता है। इसमें कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग के बेसिक और उससे संबंधित कई अन्य विषयों पर पढ़ाई करायी जाती है। इस कोर्स में सी, पीएचपी, डावाक्रिप्ट, सूएसएस, एचटीएमएल और एसएल क्यू लैंग्वेज के बारे में पढ़ाई करायी जाती है।

यूनिवर्सिटी आॅफ मिशिगन : तकनीकी विषयों के लिए आदर्श

इसके अलावे स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा स्टार्टअप इंजिनयरिंग कोर्स आनलाइन लर्निंग प्लेटफार्म कोर्सेरा पर करवाया जा रहा है। इस कोर्स में एक टेक्निकल स्टार्टअप शुरू करने के लए इंजीनियरिंग स्किल और टूल सेट के बारे में पढ़ाया जाता है। इसमें डेवलपमेंट टूल्स, वेब डेवलपमेंट, टेस्टिंग जैसे विषयों के बारे में पढ़ाई करायी जाती है। इसी तरह आॅक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में विकास को प्रभावित करने वाले राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक कारणों के बारे में पढ़ाया जाता है। इसके अलावा राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक प्रक्रियाओं को करने वाले बाहरी फैक्टर के बारे में भी पढ़ाया जाता है। इतना ही नहीं आर्थिक विकास के लए विभिन्न देशों द्वारा अपनाए गए तरीकों के बारे में बताया  जाता है।

हाल के वर्षों में काफी संख्या में 12वीं के बाद अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम की पढ़ाई के लए छात्रों का रुझान विदेशी संस्थानों की तरफ हुआ है। इतना ही नहीं ऐसे छात्रों की भी कमी नहीं है, जो पूर्णकालिक स्नातक कार्यक्रमों के अलावा 12वीं के बाद समर स्कूल प्रोग्राम, वोकेशनल और टेक्निकल ट्रेनिंगके लिए भी विदेशी संस्थानों की तरफ रुख करते हैं। इसके अलावा ज्यादातर लोग भारत में स्नातक के बाद कार्य अनुभव हासिल करते हैं और फिर पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम के लिए विदेशी विश्वविद्यालयों की प्रवेश परीक्षा में शामिल होते हैं।

कैंब्रिज-आक्सफोर्ड की राह भी हुई आसान

मसलन ब्रिटेन में एडिमशन के मौके पर गौर करें तो यहां कैंब्रिज-आक्सफोर्ड के अलावा कई अन्य विश्वविद्यालयों व संस्थानों में विदेशी छात्रों को अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम में प्रवेश का मौका मिलता है। हालांकि आॅक्सफोर्ड कैंब्रिज और बर्मिघम विश्वविद्यालयों में अपने पसंद के किसी अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम में पूर्णकालिक प्रवेश से पहले आपको इंटरनेशनल फाउंडेशन इयर प्रोग्राम पूरा करना पड़ेगा। गौरतलब है कि फाउंडेशन इयर प्रोग्राम में इंगिलश और कम्युनकेशन माढ्यूल पर फोकस किया जाता है। केवल ब्रिटेन में चार लाख से अथिक विदेशी स्टूडेंट्स हर साल पढ़ाई के लिये एडिमशन लेते हैं।        

कैंब्रिज विश्वविद्यालय : लंदन का प्रसिद्ध विश्वविद्यालय जहां प्रत्येक साल चार लाख से अधिक विदेशी छात्र लेते हैं दाखिला

इसी तरह अमेरिका की तरफ भी काफी संख्या में स्टूडेंट्स रुख करते हैं। हालांकि प्रवेश से पहले आईईएलटीएस स्कोर जैसे कुछ निर्धारित शर्तों को पूरा करना होता है। ज्यादातर अमेरिकी विश्वविद्यालयों में अंडरग्रेजुएट कोर्स की अवधि चार साल की होती है। अमेरिका में हर साल दस लाख से अधिक विदेशी स्टूडेंट्स उच्च शिक्षा के लिए आते हैं और इसी वजह से अमेरिका को उच्च शिक्षा का पावर हाउस माना जाता है। अमेरिका के कुछ प्रमुख संस्थान हैं बैबसन कालेज, ब्रायन मार कालेज, जाता है। अमेरिका के प्रमुख अन्य संस्थान हैं बैबसन कालेज. ब्रायन मार कालेज. कोलंबिया यूनिवर्सिटी. प्रिसटन यूनिवर्सिटी. यूनिवर्सिटी अफ पेनसिलवानिया आदि।

आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में भी खुले हैं दरवाजे

इसी तरह उच्च और तकनीकी शिक्षा के लिए आस्ट्रेलिया बेहतर है। 12वीं में प्राप्त अंकों और इंग्लिश लेंग्वेज स्किल के आधार पर आस्ट्रेलिया के कई विश्वविद्यालय और संस्थान भारतीय छात्रों को अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम में प्रवेश का मौका देते हैं। कई इंस्टीट्यूट अंतरराष्ट्रीय छात्रों को कम अवधि के पाठ्यक्रमों ( छह माह से दो वर्ष तक) में भी प्रवेश का मौका देते हैं। आस्ट्रेलिया के टेक्निकल एंड फर्दर एजूकेशन (टैफे) इंस्टीट्यूट से आप से छह माह से लेकर दो वर्ष तक के विभिन्न वोकेशनल और इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग प्रोग्राम कर सकते हैं। टैफे संस्थानों से कोर्स पूरा करने के बाद छात्र संबंधित पाठ्यक्रम में आस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालय में लैटरल एंट्री के माध्यम से सीधे दूसरे वर्ष में दिखला ले सकते हैं। आस्ट्रेलिया के प्रमुख विश्वविद्यालय हैं आस्ट्रेलियन नेशनल यूनिर्सिटी. युनिवर्सिटी आॅफ मेलबोर्न. यूनिवर्सिटी आॅफ सिडनी. यूनिवर्सिटी आफ क्वींसलैंड. यूनिवर्सिटी आफ न्यू साउथ वेल्स आदि।

आस्ट्रेलिया का सिडनी विश्वविद्यालय : तकनीकी शिक्षा का वैश्विक हब

इसके अलावे न्यूजीलैंड भी विदेशी स्टूडेंट्स का हब बन चुका है। अच्छे एकेडमिक रिकार्ड के साथ यदि आपके पास 5.5 से 6.0 के बीच आईईएलटीएस स्कोर है तो आप न्यूजीलैंड के विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए आवेदन कर सकते हैं। यहां सरकार द्वारा वित्तपोषित आठ प्रमुख विश्वविद्यालयों में विभिन्न तकनीकी पाठ्यक्रमों के साथ सामान्य डिग्री प्रोग्राम के भी आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावे पाॅलिटेक्निक और अन्य प्राइवेट संस्थान भी विदेशी छात्रों को प्रवेश का मौका देते हैं। यहां के प्रमुख विश्वविद्यालय हैं यूनिवर्सिटी आॅफ आकलैंड. यूनिवर्सिटी आॅफ ओटैगो. मैसी यूनिवर्सिटी. विक्टोरिया यूनिवर्सिटी आफ वेलिंगटन। इसी तरह 12वीं के बाद सिंगापुर में भी मौका होता है स्टूडेंट्स के लिए। तुलनात्मक दष्टि से कम खर्चे में सिंगापुर में शिक्षा उपलब्ध है। स्कालरशिप और सस्ती हवाई यात्रा जैसी सुविधाओं की वजह से बड़ी संखाया में भारतीय छात्र सिंगापुर के विभिन्न विश्वविद्यालयों में दाखिला लेते हैं। यहां के प्रमुख विश्वविद्यालय हैं नेशनल यूनिवर्सिटी आफ सिंगापुर. नानयांग टेक्नोलाजिकल यूनिवर्सिटी. सिंगापुर मैनेजमेंट यूनिवर्सिटी।

हालांकि इन विकल्पों के बीच सबसे पहले मनपसंद कोर्स का चयन करना चाहिए। साथ ही स्काॅलरशिप के बारे में भी विस्तत जानकारी हासल कर लेनी चाहिए क्योंकि विदेशों में शिक्षा प्राप्त करना अपेक्षाकत थोड़ा महंगा होता है। यदि आपको स्काॅलरशिप मिल जाती है तो पढ़ाई करने और वहां प्रवास में आसानी हो जाएगी। छात्रों के लिए टाटा स्काॅलरशिप, यूनिवर्सिटी आफ शेफील्ड स्कालरशिप, डाक्टर मनमोहन सिंह स्कालरशिप, ट्रिनिटी कालेज डब्लिन स्काॅलरशिप,अमेरिकन यूनिवर्सिटी स्कालरशिप,कालेज डब्लन स्कालरशिप आदि छात्रों के लिए है और इसे हासिल कर स्टूडेंट्स कम खर्चे में विदेशों में पढ़ाई कर लेते हैं। हालांकि  इस बात का ख्याल रहना चाहिए कि प्रवेश से पहले पास करना होता है टेस्ट क्योंकि यहां एडिमशन के लिए टाफेल. जीआरई. जीमैट और एसएटी स्कोर मान्य है। यूके के संस्थानों में एडिमशन के लिए जीसीई क्लियर करना होता है जबकि यदि आप आस्ट्रेलिया जाना चाहते हैं तो वहां के सभी शैक्षणिक संस्थानों में आईआईएलटीएस का स्कोर मान्य है। आईआईएलटीएस सिस्टम यानी इंटरनेशनल इंगलिश लैग्वेज टेस्टिंग सिस्टम। इस परीक्षा के जरिए स्टूटेंट के अंग्रेजी ज्ञान को जांचा-परखा जाता है।

(कॉपी संपादन : एफपी डेस्क)


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