पूर्व में नियमित नियुक्ति के बावजूद निकाली वैकेंसी, सिंडिकेट ने रोकी भर्ती

विज्ञापन में तकनीकी खामियों की वजह से पंजाब विश्वविद्यालय के सिंडिकेट ने नए सिर से विज्ञापन जारी करने का निर्णय लिया है। बताया जा रहा है कि जिन पदों के लिए पूर्व में नियमित नियोजन कर लिया गया, उन पदों के लिए विज्ञापन जारी किए गए। सैयद जैगम मुर्तजा की रिपोर्ट

पंजाब विश्वविद्यालय ने सहायक प्रोफेसरों के 26 पदों के लिए विज्ञापन वापस लेने का फैसला किया है। 30 जुलाई को विश्वविद्यालय सिंडिकेट की बैठक के बाद ये फैसला लिया गया है। इस संबंध में सिंडिकेट के सदस्यों ने विश्वविद्यालय के कुलपति को पत्र लिख कर भर्ती अभियान रोकने की जानकारी दी है। इस पत्र में कहा गया है कि भर्ती के लिए बाद में नए सिरे से विज्ञापन जारी किया जाएगा। विश्वविद्यालय ने हाल ही में असिस्टेंट प्रोफेसर के 27 पदों के लिए एक विज्ञापन जारी किया था।

सिंडिकेट पंजाब विश्वविद्यालय के संचालन से जुड़ी समिति है। वाइस चांसलर के अलावा इसमें 19 और सदस्य हैं। इनमें सरकार के नुमाइंदे, विश्वविद्यालय रजिस्ट्रार और संबद्ध महाविद्यालयों/संकायों के प्रतिनिधि शामिल हैं। कुलपति इस समिति का अध्यक्ष है।

अपने पत्र में विश्वविद्यालय संचालन समिति ने लिखा है कि यूजीसी / मानव संसाधन विकास मंत्रालय को अप्रैल 2016 से अप्रैल 2017 की अवधि के दौरान ख़ाली पड़े असिस्टेंट प्रोफेसरों के 27 पदों को भरने के लिए प्रस्ताव भेजा गया था। इसके जवाब में यूजीसी / एमएचआरडी ने केवल उन पदों को भरने के लिए सहमति दी जो अप्रैल 2016-2017 के बीच फैकल्टी के 65 वर्ष की आयु पूरी हो जाने के वजह से रिक्त हुए। पत्र में दावा किया गया है कि जिन पदों के लिए प्रस्ताव भेजा गया था वो उस दौरान संकाय सदस्यों की सेवानिवृत्ति की वजह से ख़ाली नहीं हुए थे। इसके अलावा यूजीसी / एमएचआरडी ने डीन कॉलेज डेवलपमेंट काउंसिल, यूनिवर्सिटी सिक्योरिटी के चीफ और डिप्टी रजिस्ट्रार के पदों के लिए सहमति दी थी। हालांकि, इन पदों के लिए विज्ञापन जारी नहीं किया गया था।

पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़

सिंडिकेट ने विश्वविद्यालय के विज्ञापन में और भी तकनीकी ग़लतियों का ज़िक्र किया है। पत्र में कहा गया है कि विश्वविद्यालय के जिन संकायों के लिए नियमित रूप से भर्ती की गई है, फिर से उन पदों को विज्ञापित कर दिया गया जबकि दस वर्षों से अधिक समय तक संकाय सदस्य के बिना ख़ाली पड़े किसी भी पद को विज्ञापित नहीं किया गया। 

सिंडिकेट सदस्य प्रोफेसर रजत संधीर ने फारवर्ड प्रेस से बातचीत में बताया कि इस दौरान एक पद पर नियुक्ति कर ली गई है। इसलिए बाक़ी 26 पदों की भर्ती प्रक्रिया तकनीकी दांव-पेंच सुलझने के बाद ही शुरु हो पाएगी। 

वहीं विश्वविद्यालय संचालन समिति से जुड़े लोगों का कहना है कि पंजाब विश्वविद्यालय को सभी रिक्त पदों को भरने की अनुमति दी जानी चाहिए, जैसा कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों के मामले में है।

(फारवर्ड प्रेस उच्च शिक्षा जगत से संबंधित खबरें प्रकाशित करता रहा है। हाल के दिनों में कई विश्वविद्यालयों द्वारा नियुक्तियां हेतु विज्ञापन निकाले गए हैं। इन विज्ञापनों में आरक्षण और रोस्टर से जुड़े सवालों को भी हम  उठाते रहे हैं, ताकि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में दलित-बहुजनों समुचित हिस्सेदारी हो सके। आप भी हमारी इस मुहिम का हिस्सा बन सकते हैं। नियोजन संबंधी सूचनाओं, खामियों के संबंध में हमें editor@forwardmagazine.in पर ईमेल करें। आप हमें  7004975366 पर फोन करके भी सूचना दे सकते हैं)

(कॉपी संपादन : नवल)


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