झामुमो की आज की पीढ़ी को इस बात का पता नहीं होगा कि यह मुक्ति तिर्की का कितना बड़ा योगदान था झामुमो को राजनीतिक दल के रूप में मान्यता दिलाने में। लेकिन इससे इस बात...
केवल ‘भेदभाव’ की परिधि में ओबीसी को शामिल करने भर से जब ऊंची जातियों के लोग पूरा आसमान सिर पर उठाकर बवाल काट रहे हैं तब जिस दिन निजी उच्च शिक्षण संस्थानों में एससी, एसटी...
सभी जातियों में राजपूतों का प्रतिनिधित्व सबसे ज्यादा है। पिछड़े वर्गों में कुशवाहों और उनके बाद यादवों की संख्या सबसे अधिक है। अति पिछड़े वर्गों और अनुसूचित जातियों में क्रमशः धानुक और रविदास जातियों की...
सूबे में सीमांत एवं लघु किसानों की संख्या सबसे अधिक है जो कि अपनी आजीविका के लिए केवल कृषि पर निर्भर हैं। ग्रामीण किसानों की ऐसी पिछड़ी स्थिति क्षेत्रीय स्तर पर भी देखी जा सकती...