‘प्रतिबद्धता और आत्मविश्वास से चुनौतियों को जीता जा सकता है’

साधारण सामाजिक पृष्ठभूमि की इस युवा महिला का सपना था समाज के हाशिए पर पटक दिए गए लोगों के जीवन में परिवर्तन लाना-उन लोगों के जीवन में जो विकास की दौड़ में पीछे छूट गए हैं, जिन्हें विकास के फल चखने तक को नहीं मिल रहे हैं। अपने इन्हीं उच्च आदर्शों की पूर्ति के लिए उन्होंने ‘सिविल सेवा’ में सफलता पाने की ठानी

आन्ध्रप्रदेश काडर की 1993 बैच की आई.ए.एस अधिकारी बी. उदयालक्ष्मी, अपनी दृढ़ता और लगन के लिए जानी जाती हैं। आन्ध्रप्रदेश के कृष्णा जिले के एक कृषक परिवार में जन्मीं उदयालक्ष्मी, अपने सम्पूर्ण शैक्षणिक जीवन में प्रतिभाशाली छात्रा रही हैं। पहली नजर में वे पारंपरिक भारतीय साड़ी में लिपटी एक साधारण महिला दिखती हैं। परन्तु उनसे बातचीत शुरू करते ही यह इस स्पष्ट हो जाता है कि वे एक असाधारण व्यक्तित्व की धनी हैं। उन्हें आसानी से डराया या दबाया नहीं जा सकता। वर्तमान में उदयालक्ष्मी आन्ध्रप्रदेश शासन में समाज कल्याण विभाग की आयुक्त हैं।

परोपकार से प्रेम

आई.ए.एस. को कॉरियर के रूप में अपनाने का निर्णय उदयालक्ष्मी ने क्यों किया? आन्ध्र विश्वविद्यालय से जन्तु विज्ञान में स्वर्ण पदक के साथ एम.एस.सी की डिग्री हासिल करने के बाद, साधारण सामाजिक पृष्ठभूमि की इस युवा महिला का सपना था समाज के हाशिए पर पटक दिए गए लोगों के जीवन में परिवर्तन लाना-उन लोगों के जीवन में जो विकास की दौड़ में पीछे छूट गए हैं, जिन्हें विकास के फल चखने तक को नहीं मिल रहे हैं। अपने इन्हीं उच्च आदर्शों की पूर्ति के लिए उन्होंने ‘सिविल सेवा’ में सफलता पाने की ठानी।

चुनौतिपूर्ण कार्य

बतौर नौकरशाह अपने पंद्रह वर्ष के कॉरियर में उदयालक्ष्मी ने कई चुनौतिपूर्ण व जिम्मेदार पदों पर काम किया, जिनमें शामिल हैं परियोजना निदेशक, ग्रामीण विकास, जिला दण्डाधिकारी, प्रकाशम, उपाध्यक्ष, राज्य आपूर्ति निगम व आयुक्त, समाज कल्याण। प्रकाशम जिले में जिला मजिस्ट्रेट के तौर पर कार्यकाल, विजयालक्ष्मी के लिए सबसे चुनौतिपूर्ण व संतोषप्रद रहा। सन् 2004 में जब सुनामी ने तटीय आन्ध्रप्रदेश में अपना तांडव दिखाया तब प्रकाशम जिले को भी प्रकृति के कोप का शिकार होना पड़ा। उस समय इस उत्साही महिला ने बचाव और पुनर्वास कार्यक्रम चलाए, पीडि़तों की शिकायतों के निवारण और उनकी सुविधा के लिए ‘हेल्प डेस्क’ स्थापित किए और उन सैंकड़ों मछुआरों की जान बचाने के लिए बचाव नौकाएं उपलब्ध करवायी। उनके काम की राज्य सरकार ने खुले दिल से सराहना की। “वह एक बहुत मुश्किल दौर था। एक साथ कई चीजें करनी पड़ती थीं और कई कामों पर नजर रखनी होती थी। पीडि़तों की शिकायतों का निवारण करने में मुझे बहुत संतोष मिला। मैं लोगों के दुख और उनकी समस्याओं से परिचित हो सकी और उनकी अपेक्षाओं पर खरी उतर सकी”, वे कहती हैं। बाद में, उन्होंने कई मंचों से प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की रणनीति व तरीकों पर व्याख्यान और प्रजेंटेशन दिए।

भ्रष्टाचार नियंत्रण के लिए नई पहल

सरकारी कार्यक्रम ठीक से लागू हों सकें और उनमें भ्रष्टाचार न हो, इसके लिए उदयालक्ष्मी ने कई ऐसे निर्णय लिए जो मील का पत्थर साबित हुए। इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए विजयालक्ष्मी ने आधुनिक तकनीकों का भी सहारा लिया। सरकार से वजीफा पाने वाले राज्य के सभी विद्यार्थी कम्प्यूटर के जरिए जुड़े हुए हैं। वजीफे की राशि सीधे छात्रों के बैंक खातों में हस्तांतरित कर दी जाती हैं। अन्य खर्चों जैसे भोजन, यूनिफार्म व बिस्तर आदि के लिए निर्धारित धन राशि भी सीधे खातों में पहुंचती है। इस नई व्यवस्था ने चमत्कार कर दिया है। “अपने कार्यालय में बैठे-बैठे मैं विद्यार्थियों के खातों को देख सकती हूँ और यह सुनिश्चित कर सकती हूँ कि उनके लिए निर्धारित राशि बिना किसी परेशानी या भ्रष्टाचार के उन तक पहुंचे”, वे कहती हैं। इन कदमों से विभागीय कार्य में पारदर्शिता और जवाबदेही आई है।

अगर आप सक्षम हैं”

बिना किसी लाग-लपेट के उदयालक्ष्मी कहती हैं कि “अगर आप सक्षम हैं, अपने काम के जानकार हैं और अपने काम को सम्पूर्ण पारदर्शिता के साथ करते हैं तो आपका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। मजबूत बनो और किसी को अपने से अनुचित लाभ मत उठाने दो।”

सिविल सेवा में जाने के इच्छुकों के लिए संदेश

सिविल सेवा हमारे देश की सर्वोतम सेवा मानी जाती है। उदयालक्ष्मी कहती हैं कि अनुशासन, दृढ निश्चय और समर्पण से हर व्यक्ति अपने सपने  साकार कर सकता है। इन तीनों के बीच सही सन्तुलन बनाने वाले व्यक्ति की सफलता सुनिश्चित है। व्यक्ति का दृष्टिकोण भी बहुत महत्वपूर्ण होता है। आपका दृष्टिकोण ही यह तय करता है कि आप कितनी ऊंचाई तक पहुंचते हैं। सकारात्मक दृष्टिकोण रखो और तुम अपने लक्ष्य तक अवश्य पहुंचोगे। ऊर्जावान और बहुमुखी प्रतिभा की धनी उदयालक्ष्मी के पति आई.पी.एस. अधिकारी हैं और वर्तमान में नैल्लोर जिले के एस.पी. हैं। दम्पत्ति के दो बच्चे हैं-एक लड़का और एक लड़की। दोनों इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं।

उदयालक्ष्मी जैसे अधिकारी समाज के वंचित और कमजोर वर्गों के लोगों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत हैं।

(फारवर्ड प्रेस के अगस्त 2013 अंक में प्रकाशित)

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