नई पीढ़ी पर विराट प्रभाव डालिए

वे छोटे-छोटे मुद्दों से ऊपर उठकर बच्चों के साथ प्रेम, दयालुता व परिपक्वता के साथ व्यवहार कर सकते हैं। जो लोग अभिभावक के तौर पर बहुत कड़क रहते हैं, वे भी ग्रेंडपेरेन्टस बनने पर बच्चों की हर मांग मानने लगते हैं

“ग्रेंडपेरेन्टस, नायकों की तरह, बच्चों के विकास के लिए उतने ही जरूरी हैं, जितने कि विटामिन” जोएस एल्सटन

आज की दुनिया में हम सब बहुत जल्दी में रहते हैं। अभिभावक के रूप में हम अपने बच्चों से प्रेम करते हैं इसलिए उन्हें हम सबसे अच्छे स्कूल और सबसे महंगी ट्यूशन क्लास में दाखिला दिलवाते हैं और कोशिश करते हैं कि वे किसी खेल, संगीत आदि में भी पारंगत हों। हम कड़ी मेहनत करते हैं ताकि हम उन्हें सुख-सुविधाएं उपलब्ध करा सकें। इसका नतीजा यह होता है कि हमारे पास बच्चों की देखभाल करने, उनके प्रति अपना प्रेम व्यक्त करने और उनकी बातें सुनने के लिए वक्त ही नहीं बचता। हमें अपने बच्चों के लिए समय निकालना ही होगा,  उनके आसपास मौजूद रहना ही होगा। हम अपनी इस जिम्मेदारी को किसी और को नहीं सौंप सकते। परंतु आज के आधुनिक चुनौतीपूर्ण समय में हमारे माता-पिता, हमारे बच्चों के जीवन को एक नई दिशा देने में सहायक हो सकते हैं।

जैसा कि बिल कोस्बी लिखते हैं, “सामान्यतः, ग्रेंडपेरेन्टस के पास बच्चों से दोस्ती करने, उन्हें राह दिखाने और उनके प्रति अपने प्रेम का इजहार करने के लिए समय होता है। यद्यपि वे बच्चों से संबंधित दैनिक जिम्मेदारियां नहीं निभा सकते परंतु वे बच्चों को असफलता के डर से मुक्ति दिला सकते हैं और पीढियों के  अंतर को पाट सकते हैं।” वे छोटे-छोटे मुद्दों से ऊपर उठकर बच्चों को – जैसे वे हैं – उसी रूप में स्वीकार कर सकते हैं और उनके साथ प्रेम, दयालुता व परिपक्वता के साथ व्यवहार कर सकते हैं। जो लोग अभिभावक के तौर पर बहुत कड़क रहते हैं, वे भी ग्रेंडपेरेन्टस बनने पर बच्चों की हर मांग मानने लगते हैं।

मार्सी डीमरी कहती हैं कि “आखिर क्या कारण है कि ग्रेंडपेरेन्टस इतने प्यारे होते हैं। मेरा तो यही मानना है कि ग्रेंडपेरेन्टस, बच्चों को ईश्वर की भेंट हैं और अगर वे (बच्चे) यह देख, सुन और महसूस कर सकें कि ग्रेंडपेरेन्टस के पास उन्हें देने के लिए क्या कुछ है, तो वे अपेक्षाकृत जल्दी परिपक्व हो सकते हैं।’’

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अपने हर नाती-पोते को एक विशिष्ट व्यक्ति मानिए

आश्चर्य नहीं कि हम उन्हें “पितामह” कहते हैं। वे हमारे बच्चों के जीवन में हमसे ज्यादा रूचि ले सकते हैं और हमसे बेहतर अभिभावक साबित हो सकते हैं।

ग्रेंडपेरेन्टस के पास यह दुर्लभ अवसर होता है कि वे अपने बच्चों के बच्चों के जरिए एक ऐसी विरासत छोड़ जायें, जो कई पीढियों तक जिंदा रहे। मुझे तो ऐसा लगता है कि उन्होंने अपने जीवन में चाहे जो सफलताएं प्राप्त की हों, दुनिया पर असर डालने का इतना बड़ा मौका उन्हें शायद ही पहले मिला होगा।

ध्यान दें, नीचे हम उन कुछ चीजों की चर्चा कर रहे हैं जो आप अपने नाती-पोतों को दे सकते हैं। आप उनके साथ समय बिताकर  और उनसे प्रेम कर उन्हें अपनी स्मृतियों का बेशकीमती खजाना दे सकते हैं।

अब, जबकि आपके पास खाली समय है, इससे बेहतर क्या होगा कि आप अपने नाती-पोतों के साथ समय बिताएं और उनके साथ एक ऐसे बंधन में बंध जायें, जो आपके बाद भी बना रहे। अगर आप उनसे दूर भी रहते हैं तब भी आप इंटरनेट, टेलीफोन और पत्रों आदि के जरिये उनके संपर्क में रह सकते हैं। अगर बचपन से ही आप उनके साथ प्रगाढ़ संबंध बना लेंगे तो किशोरावस्था में भी आप उनकी पनाहगाह बने रहेंगे।

वे आपकी संतान की संतानें हैं

अभिभावक के रूप में अपनी संतान का सम्मान करिए और उनके साथ – उनके विरूद्ध नहीं – मिलकर काम करिए। आपको यह नहीं भूलना चाहिए कि आपके बच्चे अब अभिभावक हैं और आपको उनके अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। आप उन्हें रास्ता दिखा सकते हैं, प्रोत्साहित कर सकते हैं और उनकी मदद कर सकते हैं परंतु उनके निर्णयों को पलटिये मत क्योंकि इससे आपके अपने बच्चों और नाती-पोतों, दोनों से ही रिश्ते खराब हो जाएंगे। तो अगर आप अपनी संतान के बच्चों का लालन-पालन करने के तरीके से सहमत नहीं हैं तब भी बेहतर यही होगा कि आप उसे खारिज करने की बजाए उसे स्वीकार कीजिए। अतः

    • बातचीत से मसलों को सुलझाने की कोशिश करिए।
    • अपनी वयस्क संतान से यह पूछिए कि उसे किस तरह की मदद की सबसे ज्यादा जरूरत है।
    • अपनी संतान को उसके बच्चे पालने में मदद कीजिए।
    • ध्यान दीजिए कि कौनसा काम वे अच्छे से करते हैं और इस बारे में उन्हें बताइए।
    • उनसे सलाह लीजिए। यह अपेक्षा न करें कि वे आपसे सलाह लेंगे। आप अपने नाती-पोतों के लिए जो सबसे बेहतर कर सकते हैं, वह है उनके माता-पिता के साथ सहयोग।

अपने हर नाती-पोते को एक विशिष्ट व्यक्ति मानिए और उनमें आपस में तुलना मत करिए। ईश्वर ने आपको एक नई पीढ़ी को प्रभावित करने का सुंदर अवसर प्रदान किया है इसलिए हमेशा सावधान रहिए कि आप उस पर किस तरह का प्रभाव डाल रहे हैं। ग्रेंडपेरेन्टस बतौर जो सबसे बड़ी गलती आप कर सकते हैं वह है कि एक नाती या पोते को दूसरे से बेहतर बताकर उन्हें यह संदेश देना कि आप पक्षपाती हैं। आपकी भूमिका तो यही है कि आप हर बच्चे को उसी रूप में स्वीकार करें, जैसा वह है और उसकी कमियों के बावजूद उससे प्रेम करें। बाहर की दुनिया में तो लोग उसकी तुलना दूसरों से कर उसका दिल दुखायेंगे ही। कम से कम आप तो उसकी मुसीबतों को मत बढ़ाइए बल्कि  आत्माभिमानी बनने में उसकी मदद कीजिए।

अपने हर नाती/पोते से अपने रिश्ते का भरपूर पोषण कीजिए। उन्हें प्रोत्साहन और आशीर्वाद दीजिए और रास्ता दिखाइए। आपके पास एक अनोखा मौका है, उनसे रिश्ते  बनाने और उनका पोषण करने का और इन रिश्तों का इस्तेमाल, ईश्वर के औजार बतौर, उन्हें प्रोत्साहन व आशीर्वाद देने और उनका पथप्रदर्शन करने का ताकि वे अपनी क्षमताओं के अनुरूप जीवन में आगे बढ़ सकें।

परंतु जहां आगे बढ़ना महत्वपूर्ण है वहीं गुजरे वक्त से रिश्ता जोड़े रखना भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। उन्हें उनके भूतकाल से जोड़े रखने के लिए आप यह कर सकते हैं:

    • उन्हें परिवार के इतिहास से परिचित करवाईए। इससे उन्हें यह समझ में आएगा कि उनका इस दुनिया में क्या स्थान है। उन्हें उनके माता-पिता के बचपन के बारे में बताइए।
    • पूरे परिवार को जोड़ेए। सभी सदस्यों के संपर्क में रहिए। पारिवारिक उत्सवों पर  कोशिश कीजिए कि परिवार के सभी सदस्य इकट्ठा हों।
    • परिवार की पुरानी परंपराओं के बारे में बताइए। जैसे-जैसे परिवार बड़ा होगा और उसमें परिवर्तन आयेंगे, नई परंपराओं का निर्माण होगा।
    • उन्हें यह समझाइए कि परिवार के कौन से ऐसे मूल्य हैं, जो एक पीढ़ी से दूसरी में जा रहे हैं और जिनका बाहरी दुनिया में अभाव है। आपकी कोशिश होनी चाहिए कि उनके मन में आपकी मधुर स्मृतियां हों।

अपने जीवन, मूल्यों और रवैये से उन्हें यह संदेश दीजिए कि आप उनमें कौनसे गुण देखना चाहते हैं। अपने नाती-पोतों से मजबूत रिश्ता बनाने के लिए यह जरूरी है कि आप उन्हें अपने जीवन का हिस्सा बनायें। वे आपको देखकर ही बहुत कुछ सीख सकेंगे।

अपने बच्चों की यह कहकर निंदा करना आसान है कि वे अच्छे अभिभावक नहीं हैं और आपकी कसौटी पर खरे न उतरने के लिए अपने नाती-पोतों को खरी-खोटी सुनाना भी। परंतु बेहतर होगा कि आप अपने बच्चों और उनके बच्चों को यह समझाएं कि आप उन्हें कौनसे मूल्यों में विश्वास करते देखना चाहते हैं । लिंडा हैनले के अनुसार, “छोटे बच्चों के लिए उनके ग्रेंडपेरेन्टस जो कुछ कर सकते हैं, वह कोई दूसरा नहीं कर सकता। वे एक तरह से छोटे बच्चों के जीवन को सुनहरा बना सकते हैं।”

यह लेख “फैमिली मंत्र” से अनुमति प्राप्त कर प्रकाशित किया जा रहा है। यह पत्रिका शहरी परिवारों की समस्याओं पर केंद्रित है और इसका उद्देश्य परिवारों को मजबूती देना और उन्हें पुनः एक करना है।

 

फारवर्ड प्रेस के अप्रैल, 2015 अंक में प्रकाशित

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