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बदले समीकरणों ने बदला गणित, गुजरात में जाति का सवाल हुआ महत्वपूर्ण

चुनाव प्रचार के दौरान नेताओं ने गुजरात की जनता के समक्ष चाहे जो भी वादे किये और आरोपों-प्रत्यारोपों के जरिए हवा बनाने की कोशिश की, लेकिन जमीनी स्तर पर जनता का मन-मिजाज बदला हुआ है। आम आदमी वह चाहे किसान हो या फिर व्यापारी या रिक्शाचालक सभी 22 वर्षों से चली आ रही सरकार के खिलाफ हैं। वे कारपोरेटपरस्त गुजरात मॉडल को खारिज कर रहे हैं। इसके पीछे केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियां हैं । इससे भी महत्वपूर्ण जातिगत समीकरण हैं जो इस बार निर्णायक बन चुके हैं। लिहाजा इस बार चुनावी गणित के बदलने के पूरे आसार हैं।

यह लेख केवल अंग्रेजी में उपलब्ध है।

 


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आशीष रंजन/नीलांजन सिरकार

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