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‘दलित’ शब्द के बचाव में एक आदिवासी का विचार

पालि व्याकरण के अनुसार, ‘दलित’ शब्द दल+इत से बना है। अगर हम ऐसे ही उच्चारण वाले कुछ शब्दों को देखें। मसलन, ‘दमित’,’शोषित’, ‘शोभित’, ‘रक्षित’और ‘पतित’ तथा इसका व्युत्पत्तिक का अर्थ निकालें तो हम पाएंगे कि इनमें ‘इत’ का मतलब ‘होना’ या ‘का हिस्सा होना’ है। इस प्रकार दलित ‘दल का हिस्सा होना’ का अर्थ सूचित करता है

“निम्न-कुल में जन्मे इस बच्चे ने तुमसे अधिक अंक हासिल किए हैं इसलिए तुमने अपनी और हमारे परिवार की प्रतिष्ठा खो दी है।” इस कथन में जिस निम्न-कुल के बच्चे का जिक्र है वह मेरे पिता हैं। एक बार मेरे पिता मुझे अपने स्कूल के दिनों की एक घटना के बारे में बता रहे थे कि किस तरह उनके मित्र के पिता ने उनके मित्र को डांटा था। मेरे पिता तब वहां खड़े भय से काँप रहे थे जब पूरे इलाके में अव्वल आने की खबर से उन्हें प्रसन्न होना चाहिए था, वह दहशत में थे। उनका अपराध यह था कि एक आदिवासी परिवार में पैदा होने के बावजूद उन्होंने पढ़ाई-लिखाई में उत्कृष्टता हासिल की थी!

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अशेष स्वर

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