झारखंड में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति पर लगी रोक

झारखंड में असिस्टेंट प्रोफेसर के 1118 पदों के लिए नियुक्ति की प्रक्रिया को रोकने का निर्देश राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू द्वारा दिये गये हैं। इस रोक की एक वजह सरकार द्वारा बनाये गये आरक्षण रोस्टर के विरोध में अभ्यर्थियाें द्वारा चलाया जा रहा आंदोलन है। साथ ही यूजीसी की नई गाइड लाइन भी है। फारवर्ड प्रेस की खबर :

झारखंड के विश्वविद्यालयों में चल रही असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति पर एक बार फिर ग्रहण लग गया है। राज्यपाल सह कुलाधिपति द्रौपदी मुर्मू ने दस साल बाद शुरु हुई नियुक्ति पर रोक इस कारण लगा दिया है क्योंकि विश्वविद्यालयों द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा जारी नई गाइड लाइन का अनुसरण नहीं किया जा रहा है। इस संबंध में राजभवन ने इस संबंध में संबंधित विश्वविद्यालयों को पत्र भेज दिया है।

बताते चलें कि 5 मार्च 2018 को यूजीसी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के आधार पर प्रोफेसरों की बहाली के संदर्भ में आरक्षण रोस्टर बनाने के लिए विश्वविद्यालय के बजाय विभाग को इकाई बनाने संबंधी अधिसूचना जारी किया था। इसका पूरे देश में विरोध किया गया था क्योंकि इस रोस्टर प्रणाली से आरक्षित वर्गों को पर्याप्त भागीदारी नहीं मिल रही थी। इसके बाद केंद्र सरकार और यूजीसी ने बैकफुट पर जाते हुए सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर कर दिया। साथ ही 20 अप्रैल 2018 को नयी अधिसूचना जारी कर पुराने रोस्टर के अनुसार नियुक्ति करने की बात कही।

इसके बाद झारखंड में 1118 पदों पर नियुक्ति के लिए झारखंड लोक सेवा आयोग ने जुलाई 2018 में विज्ञापन जारी किया था। इसमें 552 पद नियमित और 566 बैकलॉग के पद शामिल थे। विज्ञापन जारी होने के एक दिन बाद ही यूजीसी ने विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति प्रक्रिया के रेगुलेशन में बदलाव कर दिया और नये दिशा-निर्देश जारी कर दिया। बावजूद इसके झारखंड में शेड्यूल के अनुसार 31 अगस्त तक जेपीएससी के द्वारा अभ्यर्थियों से आवेदन ले लिये गये।

झारखंड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू

उल्लेखनीय है कि यूजीसी की नई गाइड लाइन के अनुसार विश्वविद्यालयों के असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति में अभ्यर्थी के मैट्रिक व इंटरमीडियट के अंक नहीं जुटेंगे। अभ्यर्थियों के स्नातक-पीजी, पीएचडी के आधार पर शैक्षणिक योग्यता का आकलन किया जायेगा और वरीयता सूची निकाली जायेगी। जुलाई 2018 में गाईड लाईन में राज्य सरकार अपने स्तर से निर्धारित कोटि के अंकों में परिवर्तन कर सकती है और इंटरव्यू के लिए अंक का निर्धारण कर सकती है।

बताते चलें कि राज्य के विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति प्रक्रिया दस साल बाद शुरू हुई। अंतिम बार 2008 में नियुक्ति हुई थी। 2016 में ही इसके आरक्षण रोस्टर बनाया जा चुका था। राज्यपाल सह कुलाधिपति द्रौपदी मुर्मू ने हस्तक्षेप किया और जेपीएससी को विलंब न करते हुए नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया था। इसके बाद जेपीएससी ने जुलाई 2018 में नियुक्ति का विज्ञापन निकाला था।

झारखंड के विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के खाली पद

विश्वविद्यालय का नामरिक्त पदों की संख्या
रांची विश्वविद्यालय268
विनोबा भावे विश्वविद्यालय155
सिदो-कान्हो विश्वविद्यालय188
नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय161
कोल्हान विश्वविद्यालय346

यूजीसी ने सितंबर में ही विश्वविद्यालय को नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगाने संबंधित पत्र विश्वविद्यालय को भेजा था। विश्वविद्यालय ने यूजीसी के पत्र के अालोक में राजभवन और सरकार से मार्गदर्शन मांगा था। राजभवन ने विश्वविद्यालय के पत्र के आलोक में नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगाने को कहा है।

उल्लेखनीय है कि राज्य के कई छात्र संगठनों ने भी राज्य में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग का रहे थे। वे नियुक्ति पर रोक लगाने एवं इसमें सुधार को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे थे। छात्र संगठनों का कहना था कि नियुक्ति प्रक्रिया में आरक्षण रोस्टर का ठीक से पालन नहीं किया गया। इसके अलावा नियुक्ति के लिए वास्तविक संख्या की तुलना में रिक्त पद कम दिखाया गया है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में मामला अभी भी विचाराधीन है।

(कॉपी संपादन : एफपी डेस्क)


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