बेरोजगार हो रहे बनारस के मल्लाह-निषाद, पीएम-सीएम को पत्र लिख लगायी गुहार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस के मल्लाह, निषाद, केवट और मछुआरा आदि जातियों के लोग धरने पर बैठे हैं। उन्होंने पीएम को पत्र लिखकर अपने पारंपरिक पेशे को बचाने की गुहार लगाई है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस के नाविक समाज के लोग बीते 28 दिसंबर 2018 से धरना दे रहे हैं। इनमें मल्लाह, केवट, निषाद और मछुआरा जातियों के लोग शामिल हैं। इनका कहना है कि सरकार की विभिन्न योजनाओं के कारण उनका पारंपरिक पेशा खत्म हो रहा है और वे बेरोजगार होते जा रहे हैं। इस संबंध में आंदोलनरत लोगों ने प्रधानमंत्री के अलावा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी पत्र लिखा है। हालांकि इसके बावजूद उनकी मांगों के आलोक में कोई कार्रवाई नहीं की गयी है।

अपने पत्र में लोगों ने अपनी माली स्थिति के बारे में बताया है। उनका कहना है कि बनारस नाविक समाज के लोग पहले ही बेरोजगारी की समस्या से परेशान हैं, ऐसे में परंपरागत काम-काज यानी नाव संचालन, मत्स्य पालन व रेत (बालू)  निकालने का कार्य कर हजारों परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी आत्मनिर्भर ससम्मान रोजी-रोटी कमाकर जीवन बसर कर रहे थे, पिछले कुछ सालों से इनके रोजगारों को छीना जा रहा है।

नावों का परिचालन बंद कर धरना दे रहे हैं लोग

प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को उनके द्वारा लिखे गए पत्र में कहा गया है कि गंगा में क्रूज चलाने की शुरुआत के साथ ही मल्लाहों के रेत निकालने, किनारों पर खेती करने के परम्परागत रोजगार को रिवर फ्रंट के नाम पर खत्म किया जा रहा है। मछली मारने पर भी रोक लगा दी गई है। रोजगार के अभाव में भोजन के बिना हमारे  बच्चे कुपोषित हो रहे है।

धरना दे रहे लोगों का कहना है कि वाटर वेज के तहत इलाहाबाद से हल्दिया तक गंगा में बड़े-बड़े मालवाहक जहाजों को चलाया जाना  है जबकि गंगा में पानी ही नही है। यह योजना नदी और इस पर आश्रित पूरी जनसंख्या को विस्थापित करने वाली है। इससे मल्लाह-मछुआरे सब बर्बाद हो जाएंगे और जलीय पर्यावरण और जीवों का भी विनाश निश्चित है।

उनका यह भी कहना है कि वे बनारस के विकास के विरोधी नहीं हैं लेकिन यह कौन सा विकास है जिसमे बनारस के लोग ही शामिल नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि वे गंगा की सफ़ाई में पूर्ण रूप से सहयोग करेंगे।

रोजी-रोजगार के लिए पीएम से गुहार

अपने पत्र में लोगों ने दो-टूक शब्दों में कहा है कि उनका यह आंदोलन मात्र नाविकों की आजीविका ही नहीं बल्कि गंगा के पारंपरिक और सांस्कृतिक पहचान वाले रूप को जिंदा रखने के लिए भी है। उन्हाेंने लिखा है, “नरेंद्र मोदी जी आप ना केवल देश के प्रधानमंत्री हैं बल्कि बनारस के सांसद भी हैं इस नाते आपकी दोहरी जिम्मेदारी और लोगों की आशा बनती है। वहीं राज्य के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी की भी जिम्मेदारी बनती है कि हम  लोगों के रोजगार बचे रहें। हम गंगा के साथ सदियों से पीढ़ी दर पीढ़ी रिश्ता बना कर जी रहे हैं।”

12 नवंबर 2018 को बनारस में गंगा नदी में कार्गो जहाज के परिचालन की शुरूआत के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

पत्र में निषाद समाज ने अपनी मांगों का उल्लेख किया है, जिनमें मुख्य निम्नांकित हैं-

1.गंगा में क्रूज संचालन बन्द हो।
2.नावों के लाइसेंसों का पुराने नियम के साथ नवीनीकरण हो।
3.गोताखोरों की नियुक्ति जल पुलिस में स्थायी रूप से हो।
4.काशी  में वाटर स्पोर्ट बंद हो।
5.घाटों /तालाबों पर सरकारी/कम्पनी और अवैध कब्ज़ा हटाया जाए।
6.विलुप्त हो रहे डॉल्फिन एवं अन्य मछलियों के संरक्षण के लिए बड़े जहाजों के संचालन की योजना पर रोक लगे।  
7.गंगा, वरुणा, अस्सी में बह रहे सैंकड़ों नालों, सीवरों को बन्द किया जाए।
8.प्राइवेट कम्पनी या बाहर के व्यापारियों द्वारा नाव लाकर हो रही नाविक समाज की जीविका समाप्ति रोकी जाए।
9.गंगा के निर्मलीकरण के नाम पर आवंटित बजट की लूट बंद हो, इस काम का क्रियान्वयन समयबद्धता के साथ पूरा हो और गंगा सफाई वाटर वेज के नाम पर सरकार सही तथ्य सामने लाये।
10. मल्लाह समाज को  गंगा किनारे खेती और वन क्षेत्र के विकास हेतु पट्टे आवंटित किए जाए।             

(कॉपी संपादन : एफपी डेस्क)


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