इंसेफलाइटिस से बेमौत मर रहे दलित-बहुजनों के बच्चे, देखें प्रमाण

बिहार में इंसेफलाइटिस के कारण अब तक 108 बच्चों की मौत हो चुकी है। इनमें अधिकांश दलित-पिछड़े हैं। पढ़ें, फारवर्ड प्रेस की खास रिपोर्ट

(देश के हरेक बच्चे को समान अधिकार और अवसर मिलने चाहिए। यह खूबसूरत वाक्य भले ही पढ़ने में अच्छा लगे, लेकिन सच यह है कि दलित-पिछड़ों के अधिकांश बच्चों को जीने के मूलभूत अधिकार भी उपलब्ध नहीं हैं। इस तथ्य की पुष्टि मुजफ्फरपुर में एईएस यानी एक्यूट इंसेफलाटिस सिंड्रोम से मरने वाले बच्चों की उपलब्ध रिपोर्ट से हो जाती है। हमारे पास एक प्राइवेट अस्पताल केजरीवाल अस्पताल में मरने वाले जिन 16 बच्चों अभी तक की सूची उपलब्ध है; उसमें सब के सब दलित, अति पिछड़े या पसमांदा मुसलमान हैं। आखिर ऐसा क्यों है?)

बिहार के मुजफ्फरपुर व आसपास के जिले में इंसेफलाइटिस के कारण बच्चों के मरने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मुजफ्फरपुर के सिविल सर्जन डा. शैलेश प्रसाद के मुताबिक, 18 जून, 2019 को अपराह्न 3ः00 बजे तक मरने वाले बच्चों की संख्या 108 हो गई। मरने वाले बच्चों तथा जिन बच्चों का इलाज चल रहा है, यदि अपवाद को छोड़ दें; तो उनके अभिभावकों के नामों में मिश्रा, झा, पांडे और सिंह आदि नहीं हैं।

फारवर्ड प्रेस के पास एक प्राइवेट अस्पताल की उपलब्ध अधिकृत सूची के मुताबिक, मरने वाले बच्चों में सर्वाधिक दलित-बहुजन परिवारों के हैं। हालांकि, जब फारवर्ड प्रेस ने बिहार के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार से दूरभाष पर इस बारे में बातचीत की तथा उनसे पूरी रिपोर्ट के बारे में पूछा; तो जवाब में उन्होंने कहा कि अभी इस तरह की रिपोर्ट तैयार नहीं है।

मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच अस्पताल में इलाजरत बच्चे

इसके बाद फारवर्ड प्रेस ने मुजफ्फरपुर के केजरीवाल अस्पताल प्रशासन से बातचीत की तथा पूरी जानकारी मांगी। अस्पताल प्रशासन द्वारा अभी तक सूची उपलब्ध कराई गई है। इसके मुताबिक, इस प्राइवेट अस्पताल में 2 जून से लेकर अब तक कुल 144 बच्चों को भर्ती किया गया। इनमें से 19 की मृत्यु हुई है। हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने 16 मृतक बच्चों की रिपोर्ट ही उपलब्ध करवाई। अस्पताल के अधिकारी मनीष दास के मुताबिक, फिलहाल 24 बच्चों का इलाज चल रहा है। इसके अलावा 44 बच्चों को अस्पताल प्रशासन ने एडमिट करने से इनकार कर दिया; क्योंकि उनकी हालत बेहद नाजुक थी। केजरीवाल अस्पताल के द्वारा दी गई सूचना के अनुसार, 14 बच्चों को उनके माता-पिता डॉक्टरों के कहने के बावजूद अस्पताल से ले गए। हालांकि, इसका एक पहलू यह भी है कि केजरीवाल अस्पताल में एईएस के रोगियों के लिए कुल 27 बेड हैं। इसकी पुष्टि मुजफ्फरपुर के सिविल सर्जन डॉ. शैलेश प्रसाद ने फारवर्ड प्रेस से दूरभाष पर बातचीत में की है। बेडों की संख्या कम होने की वजह से इलाज नहीं होने के कारण लोगों द्वारा अपने बीमार बच्चों को शहर के दूसरे अस्पतालों में लेकर जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। वहीं केजरीवाल अस्पताल प्रशासन का कहना है कि उनके यहां 43 बच्चे ठीक होकर अपने घर गए हैं।

अपने बच्चे की मौत के बाद एसकेएमसीएच अस्पताल में रोता-बिलखता एक दंपत्ति

खैर, हम अपने पाठकों के लिए केजरीवाल अस्पताल में मरने वाले बच्चों की सूची प्रस्तुत कर रहे हैं। इसमें बच्चों के अभिभावकों के नाम भी शामिल हैं। इससे यह भी स्पष्ट होगा कि किस तरह इंसेफलाइटिस केवल दलित-बहुजनों के बच्चों को शिकार बना रहा है।

केजरीवाल अस्पताल में इंसेफलाइटिस से मरने वाले बच्चों की सूची और जाति

मृतक/मृतका के पिता का नाम/पतामृतक/मृतका का नाम/उम्रमृत्यु की तारीखजाति/वर्ग
मो. रहमत अली, गांव - डूमरी, प्रखंड-

मुसहरी, मुजफ्फरपुर
जिया खातून/2 वर्ष5 जूनअल्पसंख्यक
सनोज सहनी, गांव -बड़ा सुमेरा, थाना-कुढ़नी,

मुजफ्फरपुर
अभिजीत कुमार/ 2.6 वर्ष5 जूननिषाद/मल्लाह (अति पिछड़ा वर्ग)
महेश मांझी, गांव - बिसुनपुर सरैंया, थाना - पारू,

मुजफ्फरपुर
पवन कुमार/3 वर्ष6 जूनमांझी (अनुसूचित जाति)
प्रमोद सहनी, गांव - गोसाईंपुर,थाना - कांटी,

मुजफ्फरपुर
रागिनी/2.6 वर्ष6 जूननिषाद/मल्लाह (अति पिछड़ा वर्ग)
भोला राम, गांव-सोनबरसा, थाना-कांटी, मुजफ्फरपुररचना कुमारी/3.5 वर्ष10 जूनरविदास (अनुसूचित जाति)
रतन दास, गांव - कन्हौली,मिठनपुरा, मुसहरी, मुजफ्फरपुरसंध्या/2.5 वर्ष11 जूनरविदास (अनुसूचित जाति)
देसाई मांझी, गांव-बखरा,थाना - सरैंया,मुजफ्फरपुरचिंटू/7 वर्ष13 जूनमांझी (अनुसूचित जाति)
टुन्नू महतो, गांव-दरियापुर, थाना - कांटी, मुजफ्फरपुरप्रिंस/4 वर्ष14 जूनकुशवाहा (अन्य पिछड़ा वर्ग)
अजय राम, गांव-मणिपुर,

थाना - मनियारी, मुजफ्फरपुर
मीनाक्षी/3 वर्ष14 जूनरविदास (अनुसूचित जाति)
विजय ठाकुर, गांव-कांटी मोरसंडी, थाना -मीनापुर

मुजफ्फरपुर
रिम्पा कुमारी/4 वर्ष15 जूननाई (अति पिछड़ा वर्ग)
मो. सोहैल, गांव - मैरवां,

थाना-कजरा,मुजफ्फरपुर
सोनी खातून/5 वर्ष15 जूनअल्पसंख्यक
अजय भगत, गांव-मोहब्बतपुर, थाना-कांटी

मुजफ्फरपुर
प्रियांशु राज/2.5 वर्ष15 जूनचंद्रवंशी/कहार (अति पिछड़ा वर्ग)
विजय कुमार यादव, गांव - बहादुरपुर, थाना - कांटी

मुजफ्फरपुर
आकाश/6 वर्ष16 जूनयादव (अन्य पिछड़ा वर्ग)
लक्ष्मण महतो, गांव - गिधा फुलवरिया, थाना - फुलवरिया,

मुजफ्फरपुर
नीतू कुमारी/4 वर्ष16 जूनकुशवाहा (अन्य पिछड़ा वर्ग)
मो.. निजामुद्दीन, गांव - मौना, थाना - रुन्नीसैदपुर,

सीतामढ़ी

 
रिजवान/3.6 वर्ष17 जूनअल्पसंख्यक
मो. जाहिद, गांव - डूमरी,थाना - मुसहरी, मुजफ्फरपुरसाना परवीन/3.6 वर्ष17 जूनअल्पसंख्यक

नोट : यह सूची केजरीवाल अस्पताल, मुजफ्फरपुर द्वारा उपलब्ध कराई गई है। इस सूची में केवल 16 मृतकों के नाम बताए गए हैं।

(कॉपी संपादन : सिद्धार्थ/प्रेम)


फारवर्ड प्रेस वेब पोर्टल के अतिरिक्‍त बहुजन मुद्दों की पुस्‍तकों का प्रकाशक भी है। एफपी बुक्‍स के नाम से जारी होने वाली ये किताबें बहुजन (दलित, ओबीसी, आदिवासी, घुमंतु, पसमांदा समुदाय) तबकों के साहित्‍य, सस्‍क‍ृति व सामाजिक-राजनीति की व्‍यापक समस्‍याओं के साथ-साथ इसके सूक्ष्म पहलुओं को भी गहराई से उजागर करती हैं। एफपी बुक्‍स की सूची जानने अथवा किताबें मंगवाने के लिए संपर्क करें। मोबाइल : +917827427311, ईमेल : info@forwardmagazine.in

फारवर्ड प्रेस की किताबें किंडल पर प्रिंट की तुलना में सस्ते दामों पर उपलब्ध हैं। कृपया इन लिंकों पर देखें

 

आरएसएस और बहुजन चिंतन 

मिस कैथरीन मेयो की बहुचर्चित कृति : मदर इंडिया

बहुजन साहित्य की प्रस्तावना 

दलित पैंथर्स : एन ऑथरेटिव हिस्ट्री : लेखक : जेवी पवार 

महिषासुर एक जननायक’

महिषासुर : मिथक व परंपराए

जाति के प्रश्न पर कबी

चिंतन के जन सरोकार

 

 

About The Author

Reply