तेजपुर विवि : ओबीसी के आरक्षण को लेकर कंफ्यूजन या साजिश? 

पूर्वोत्तर के राज्य असम में ओबीसी को 15 फीसदी आरक्षण दिये जाने का प्रावधान है। लेकिन तेजपुर विश्वविद्यालय ने हालिया जारी विज्ञापन में इसका उल्लंघन किया है। कंफ्यूजन की बात कह विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह स्वीकार भी किया है

असम के तेजपुर विश्वविद्यालय में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को मिलने वाले आरक्षण के प्रावधान का उल्लंघन किया गया है। 21 जून 2019 को विश्वविद्यालय द्वारा जारी विज्ञापन में इंजीनियरिंग, कॉमर्स, कला और विज्ञान समेत कई विषयों के शिक्षकों के 51 रिक्त पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे गए हैं। इनमें 13 पद प्रोफेसर, 21 पद एसोसिएट प्रोफेसर और 17 असिस्टेंट प्रोफेसर के पद हैं। प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के 34 पदों पर ओबीसी को कोई  आरक्षण नहीं दिया गया है।

गौरतलब है कि पूर्वोत्तर के राज्य असम में ओबीसी को वर्तमान में 15 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने का प्रावधान है। 

इस मामले में जब फारवर्ड प्रेस ने  विश्वविद्यालय प्रशासन से पूछा तब उसका कहना है कि वह एक और विज्ञापन जारी करेगा जिसमें 68 रिक्त पदों के लिए आवेदन मांगे जाएंगे। 

जाहिर तौर पर यह आरक्षण के नियमों का उल्लंघन है। होना तो यह चाहिए कि विश्वविद्यालय प्रशासन पूर्व के विज्ञापन को स्थगित कर संशोधित विज्ञापन जारी करे तथा अब जिस नए विज्ञापन की बात विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कही जा रही है, उसमें ओबीसी को प्रावधान के अनुरूप आरक्षण हो।

तेजपुर विश्वविद्यालय, असम का मुख्य द्वार

दरअसल, तेजपुर विश्वविद्यालय द्वारा ओबीसी को असिस्टेंट प्रोफेसर के 6 पदों पर आरक्षण दिया गया है। विज्ञापन देखने के लिए लिए यहां क्लिक करें। कुल 51 रिक्त पदों के आधार पर आकलन करें तो ओबीसी को केवल 11 फीसदी आरक्षण दिया गया है और वह भी असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों के लिए। इसके अलावा विश्वविद्यालय ने भले ही ओबीसी को प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के काबिल नहीं समझा हो लेकिन उसने एक पद आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए जरूर आरक्षित किया है। इस विज्ञापन के मुताबिक ऑनलाइन आवेदन की आखिरी तारीख 26 जुलाई 2019 है। वहीं ऑनलाइन आवेदन की हार्ड कॉपी व अन्य दस्तावेज जमा करने की आखिरी तारीख 2 अगस्त है। विज्ञापन देखने के करें।

ओबीसी को आरक्षण के लिए दूसरा विज्ञापन जारी करेगा विवि

विज्ञापन में कहीं भी बैकलॉग या शॉर्टफाल का जिक्र नहीं है। ओबीसी आरक्षण के संदर्भ में विस्तृत जानकारी के लिए फारवर्ड प्रेस ने यूनिवर्सिटी के स्थापना विभाग के एक अधिकारी से दूरभाष संख्या 0371-2273124  बात की। जवाब में बताया गया कि ओबीसी के लिए सिर्फ असिस्टेंट प्रोफेसर के 17 पदों में 6 पदों पर ही ओबीसी को आरक्षण दिया गया है। उक्त अधिकारी ने बताया कि “विश्वविद्यालय प्रशासन प्रोफेसर ग्रेड और एसोसिएट प्रोफेसर ग्रेड में ओबीसी रिजर्वेशन की एप्लीकेबिलिटी को लेकर कन्फ्यूज था। फिर हमें शिक्षा मंत्रालय और यूजीसी ने फिर इस विषय में स्पष्ट किया और निर्देश दिया कि हमें एसोसिएट प्रोफेसर के पदों का विज्ञापन देने और ओबीसी रिजर्वेशन देने की ज़रूरत है। लेकिन तब तक हम 51 पदों के लिए विज्ञापन दे चुके थे। हम ओबीसी को रिजर्वेशन नहीं दे सके, पर जल्द ही हम दूसरे विभागों के 68 और पदों पर विज्ञापन देने जा रहे हैं और उसके लिए हमने ओबीसी रिजर्वेशन रोस्टर को तैयार भी कर लिया है।”     

बहरहाल, सवाल यह नहीं है कि ओबीसी को आरक्षण देने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन एक और नया विज्ञापन देता है या नहीं। सवाल यह है कि जब विश्वविद्यालय प्रशासन यह स्वीकार कर रहा है कि ओबीसी को आरक्षण दिये जाने के मामले में चूक हुई है फिर उसे  पूर्व के विज्ञापन को स्थगित करने से किसने रोका है? साथ यह भी कि क्या वह यह सुनिश्चित करने जा रहा है कि अगले विज्ञापन में (जैसा कि विश्वविद्यालय के अधिकारी द्वारा फारवर्ड प्रेस को बताया गया) केवल ओबीसी के लिए आरक्षण का प्रावधान होगा?

(कॉपी संपादन : नवल)


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