केरल केंद्रीय  विश्वविद्यालय : हुआ विरोध तो ओबीसी को मिला आरक्षण

जब विश्वविद्यालय ने पहले विज्ञापन जारी किया तब प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के 44 पदों में ओबीसी के लिए कोई सीट आरक्षित नहीं थी। विरोध के बाद विश्वविद्यालय ने संशोधित विज्ञापन जारी किया है। अभ्यर्थी अब 31 जुलाई 2019 तक आवेदन कर सकते हैं

देश के सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को आरक्षण दिये जाने का प्रावधान है। लेकिन हाल ही में केरल केंद्रीय विश्वविद्यालय में ओबीसी की हकमारी की खबर सामने आयी। हालांकि विरोध को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रबंधन ने संशोधित विज्ञापन जारी किया है जिसमें ओबीसी के लिए भी पद आरक्षित किये गये हैं। विश्वविद्यालय के सभी पदों के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2019 है।

दरअसल, केरल केंद्रीय विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के 66 पदों के लिए विज्ञापन बीते 14 जून को जारी किये गये। विश्वविद्यालय ने कला, विज्ञान, वाणिज्य, शिक्षा, कानून, सामाजिक विज्ञान और भाषा आदि विभिन्न संकायों में शिक्षक के 69 पदों के लिए आवेदन मांगे गये। इनमें प्रोफेसर के 15 पद, एसोसिएट प्रोफेसर के 29 पद और असिस्टेंट प्रोफेसर के 25 पद शामिल थे।

यह भी पढ़ें : डीयू में शिक्षक बहाली : 79 ओबीसी, 41 एससी और 24 एसटी के पद आरक्षित

विज्ञापन में प्रोफेसर के 15 पदों और एसोसिएट प्रोफेसर के 29 पदों यानी कुल मिलाकर 44 पदों के मामले में ओबीसी को कोई आरक्षण नहीं दिया गया। जबकि असिस्टेंट प्रोफेसर के 25 पदों में से 5 पद ओबीसी के लिए आरक्षित किए गए थे। वहीं प्रोफेसर के 3 पद एससी के लिए और 1 पद एसटी के लिए आरक्षित किए गए थे। इसी प्रकार एसोसिएट प्रोफेसर के 29 पदों में से एससी वर्ग के लिए 5 और एसटी वर्ग के लिए 3 पद आरक्षित रखे गए थे। विश्वविद्यालय द्वारा पूर्व में जारी विज्ञापन देखने के लिए यहां क्लिक करें।

इस प्रकार पूर्व के विज्ञापन में ओबीसी के अलावा सभी आरक्षित वर्गों यहां तक कि  आर्थिक आधार पर कमजोर वर्गाें (सवर्ण) के लिए भी सीटें आरक्षित थीं। 

केरल केंद्रीय विश्वविद्यालय

विश्वविद्यालय प्रबंधन के इस फैसले का विराेध हुआ और इसका परिणाम 5 जुलाई 2019 को सामने आया। विश्वविद्यालय की ओर से संशोधित विज्ञापन जारी किया गया है। इसके मुताबिक प्रोफेसर के 15 पदों में अब 3 पद ओबीसी के आरक्षित हैं। साथ ही एसोसिएट प्रोफेसर के 29 पदों में 7 पद ओबीसी के लिए आरक्षित रखे गए हैं। संशोधित विज्ञापन देखने के लिए यहां क्लिक करें।

(फारवर्ड प्रेस उच्च शिक्षा जगत से संबंधित खबरें प्रकाशित करता रहा है। हाल के दिनों में कई विश्वविद्यालयों द्वारा नियुक्तियां हेतु विज्ञापन निकाले गए हैं। इन विज्ञापनों में आरक्षण और रोस्टर से जुड़े सवालों को भी हम  उठाते रहे हैं, ताकि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में दलित-बहुजनों समुचित हिस्सेदारी हो सके। आप भी हमारी इस मुहिम का हिस्सा बन सकते हैं। नियोजन संबंधी सूचनाओं, खामियों के संबंध में हमें editor@forwardmagazine.in पर ईमेल करें। आप हमें  7004975366 पर फोन करके भी सूचना दे सकते हैं)

(कॉपी संपादन : नवल)


फारवर्ड प्रेस वेब पोर्टल के अतिरिक्‍त बहुजन मुद्दों की पुस्‍तकों का प्रकाशक भी है। एफपी बुक्‍स के नाम से जारी होने वाली ये किताबें बहुजन (दलित, ओबीसी, आदिवासी, घुमंतु, पसमांदा समुदाय) तबकों के साहित्‍य, सस्‍क‍ृति व सामाजिक-राजनीति की व्‍यापक समस्‍याओं के साथ-साथ इसके सूक्ष्म पहलुओं को भी गहराई से उजागर करती हैं। एफपी बुक्‍स की सूची जानने अथवा किताबें मंगवाने के लिए संपर्क करें। मोबाइल : +917827427311, ईमेल : info@forwardmagazine.in

फारवर्ड प्रेस की किताबें किंडल पर प्रिंट की तुलना में सस्ते दामों पर उपलब्ध हैं। कृपया इन लिंकों पर देखें

 

आरएसएस और बहुजन चिंतन 

मिस कैथरीन मेयो की बहुचर्चित कृति : मदर इंडिया

बहुजन साहित्य की प्रस्तावना 

दलित पैंथर्स : एन ऑथरेटिव हिस्ट्री : लेखक : जेवी पवार 

महिषासुर एक जननायक’

महिषासुर : मिथक व परंपराए

जाति के प्रश्न पर कबी

चिंतन के जन सरोकार

 

About The Author

Reply