सवर्णों के जलन और ईर्ष्या का परिणाम है संत रविदास मंदिर का तोड़ा जाना : शिवानंद तिवारी

राजद नेता शिवानंद तिवारी का मानना है कि पिछड़ी जातियों में जागृति आई है। इस वर्ग के लोगों ने पढ़ाई-लिखाई शुरू कर दी है जिससे उनकी माली हालत ठीक होती जा रही है, वहीं सवर्ण अभी भी ऐंठन में हैं और काम करने से भागते हैं। इस कारण वे गरीब हो रहे हैं। दिल्ली में रविदास मंदिर का तोड़ा जाना उनकी जलन का परिणाम है 

पर्दे के पीछे

(अनेक ऐसे लोग हैं, जो अखबारों की सुर्खियों में  भले ही निरंतर न हों, लेकिन उनके कामों का व्यापक असर मौजूदा सामाजिक-सांस्कृतिक व राजनीतिक जगत पर है। बातचीत के इस स्तंभ में हम पर्दे के पीछे कार्यरत ऐसे लोगों के दलित-बहुजन मुद्दों से संबंधित विचारों को सामने लाने की कोशिश कर रहे हैं। इस कडी में  प्रस्तुत है, राष्ट्रीय जनता के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व पूर्व सांसद शिवानंद तिवारी से कुमार समीर की बातचीत। स्तंभ में प्रस्तुत विचारों पर पाठकों की प्रतिक्रिया का स्वागत है। -प्रबंध संपादक)


अनंत सिंह मामला : पहले पाला-पोसा और अब कार्रवाई, जदयू पहले दे इसका जवाब

  • कुमार समीर

बिहार में इन दिनों दो राजनीतिक चेहरे सुर्खियों में हैं। एक तो बाहुबली नेता अनंत सिंह पर सरकार की गाज गिरी है और दूसरी खबर लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद नेपथ्य में चले गए राजद नेता तेजस्वी यादव के सक्रिय होने की है। इन दोनों खबरों और देश की राजनीति को लेकर फारवर्ड प्रेस ने राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व प्रवक्ता शिवानंद तिवारी से बात की। प्रस्तुत है बातचीत का संपादित अंश :

कुमार समीर (कु.स.) : बाहुबली नेता व मोकामा से निर्दलीय विधायक अनंत सिंह मामले पर आपका क्या कहना है ? 

शिवानंद तिवारी (शि.ति.) : अनंत सिंह पावर के करीब रहे हैं और मौजूदा सत्ताधारी पार्टी जदयू से उनका याराना रहा है। लेकिन पिछले कुछ महीनों से संबंध में खटास आई, परिणाम सामने है। पहले पाला-पोसा और अब कार्रवाई, इसे इस समीकरण के चश्मे से देखने की जरूरत है। 

कु.स.: इसका मतलब क्या हुआ? क्या पुलिस गलत है?

शि.ति. : गलत-सही की बात नहीं है, पहले गलबहियां और फिर संबंध खराब होने पर जो कार्रवाई का तरीका अपनाया गया, उस तरफ मैं आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। मसलन, अनंत सिंह पर आतंकवाद निरोधी कानून (अनलॉफुल एक्टीविटिज प्रिवेंशन एक्ट, 1967 – यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया गया है। क्या यह सही है? यह कानून आतंकियों के लिए बना है और यह धारा अनंत सिंह पर लगाकर सरकार इसका बेजा इस्तेमाल कर रही है।

कु.स.: अनंत सिंह के घर से ए.के.-47 राइफल, हैंड ग्रेनेड बरामद होना क्या काफी नहीं है?

शि.ति.: जो गलत है वो ग़लत तो है ही, गलत को कोई कैसे सही कह सकता है? मैं भी इसका अपवाद नहीं हूं, मेरा आशय केवल इतना है कि जो धारा आतंकी के लिए बनायी गई है, उसे अनंत सिंह पर लागू करना क्या सही है? आईपीएस अधिकारी लिपि सिंह जो इस पूरे मामले को देख रही हैं और जिनका अनुभव कम है (2016 बैच) उन्हें इसे देखना चाहिए क्योंकि अदालत में पुलिस को इस तरह के सवाल का जवाब देना होगा। अदालत में इस तरह के भी सवाल उठाए जाएंगे कि कहीं राजनीतिक विद्वेष से तो यह कार्रवाई नहीं की गई है, क्योंकि यह सबको पता है कि पुलिस अधिकारी लिपि सिंह जदयू के वरिष्ठ नेता की पुत्री हैं। 

शिवानंद तिवारी, पूर्व सदस्य, राज्यसभा

कु.स.: अनंत सिंह के अलावा एक और खबर जो पिछले दिनों मीडिया की सुर्खियों में रही वह तेजस्वी यादव से जुड़ी है। लोकसभा चुनाव में राजद की बुरी तरह हार के बाद से वह नेपथ्य में चले गए थे और सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए। इस पर आपका क्या कहना है ?

शि.ति.: देखिए, इस मामले को तूल देने, चर्चा करने का कोई मतलब नहीं बनता। एक लाइन में कह दूं कि जो बीत गई सो बात गई और अब फिर से तेजस्वी यादव के नेतृत्व में नई शुरुआत हो चुकी है। पिछले दिनों तेजस्वी के नेतृत्व में पार्टी ने एकजुट होकर पटना में दूध मार्केट हटाए जाने का विरोध किया, उसके बाद तेजस्वी यादव व पार्टी की एकजुटता पर सवाल उठाने का कोई मतलब नहीं बनता है। राजद नीतीश सरकार के खिलाफ जंग छेड़ने की तैयारी में जुट गया है। जल्द ही रिजल्ट आपके सामने होगा। 

कु.स.: परिवारवाद की राजनीति पर आपका क्या कहना है?  परिवारवाद की राजनीति क्या अब खत्म होने जा रही है?

शि.ति.: आप किस आधार पर कह सकते हैं कि परिवारवाद की राजनीति खत्म होने की कगार पर है ! हाल में हुए लोकसभा चुनाव में भी परिवारवाद का बोलबाला रहा तभी तो रामविलास पासवान के बेटे व उनके परिवार के कई सदस्य (कुनबा) सहित नवीन पटनायक, स्टालिन और जगन रेड्डी ने चुनाव में जबरदस्त जीत हासिल की। ऐसे में कोई कैसे कह सकता है कि परिवारवाद की राजनीति अवसान पर है? उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की बात करें तो उन्होंने पांचवीं बार मुख्यमंत्री बनकर रिकार्ड बनाया है। पटनायक के पिता स्वर्गीय बीजू पटनायक देश के बड़े नेता थे। उनकी मृत्यु के बाद नवीन पटनायक विदेश से आकर सीधे मुख्यमंत्री बन गए और आजतक बने हुए हैं। तमिलनाडु में स्वर्गीय करुणानिधि के पुत्र स्टालिन इस साल हुए लोकसभा चुनाव में राज्य की आधी से अधिक सीटें जीत गए। इसी तरह आंध्र प्रदेश में तो राजशेखर रेड्डी के पुत्र जगन रेड्डी ने लोकसभा और साथ हुए विधानसभा चुनाव में चंद्रबाबू नायडू की हवा निकाल दी। ऐसे में आप कैसे कह सकते हैं कि परिवारवाद की राजनीति खत्म होने जा रही है। 

कु.स.: परिवारवाद की बात बिहार के संदर्भ में तेजस्वी यादव और उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव को लेकर कही जा रही है कि इनके दिन अब बहुरने वाले नहीं हैं?

शि.ति.: जी हां! ऐसा शोर सत्ताधारी दल के लोग मचा रहे हैं। नरेंद्र मोदी जी ने यह शोर जहां राहुल गांधी के खिलाफ मचाना शुरू किया है वहीं ऐसा ही शोर बिहार में तेजस्वी यादव के विरुद्ध मचाया जा रहा है क्योंकि भविष्य में चुनौती इन्हीं से मिल सकती है, इस बात का आभास सत्ताधारी पार्टी व उनके नेतृत्व को बखूबी है। 

कु.स- देश की राजनीति की बात करें तो अर्थव्यवस्था के डावांडोल होने संबंधी बातें सामने आ रही हैं। इसकी एक वजह बढ़ती बेरोजगारी भी है। सरकारी योजनाएं जैसे कि कौशल विकास केन्द्र योजना अब फेल होती हुई नजर आ रही है। आपके हिसाब से क्या वजहें हैं?

शि.ति.: कौशल विकास योजना से लोगों खासकर युवाओं व पेशेवर कारीगरों को उम्मीद जगी थी लेकिन धीरे-धीरे अब उनकी उम्मीद पर भी पानी फिरना शुरू हो गया है। काम व काम में निखार लाने के उद्देश्य से यह योजना शुरू की गई थी  ताकि गांव गांव स्वालंबी बन सके और ऐसा कर बापू यानि महात्मा गांधी के सपनों को साकार किया जा सके। सामाजिक बदलाव का सपना धरा का धरा रह गया, क्योंकि यह योजना कागजों तक दिखी लेकिन जमीनी स्तर पर पहुंच ही नहीं पायी। बेरोजगारी का आलम क्या है, यह किसी से छिपा नहीं हैं। कोई सेक्टर ऐसा नहीं है जिसकी हालत खस्ती ना हो। 

कु.स.: पिछड़े वर्गों के लिए राष्ट्रीय आयोग जिसका पुनर्गठन किया गया और कहा गया कि अब इसे संवैधानिक अधिकार होंगे लेकिन अभी तक आयोग द्वारा इस दिशा में कोई अहम पहल नहीं किया गया है जिससे ओबीसी कोटे के बैकलाग भरे जा सके। 

शि.ति.: बैकलाग भरा जाना चाहिए और यह मांग अर्से से हो रही है लेकिन सरकार लगातार इसे अनसुना कर रही है। आरक्षित  वर्ग एक तरफ यह मार तो झेल ही रहा है, दूसरी तरफ सरकारी नौकरियां भी लगातार घटती जा रही हैं। रेलवे जैसे बड़े संस्थानों में छंटनी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है क्योंकि रेलवे सहित अन्य सरकारी विभागों में नौकरियां आउटसोर्स की जा रही हैं। वहीं आजकल सरकारी नौकरियों से अधिक निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर हैं लेकिन अभी तक सरकार द्वारा निजी क्षेत्र में आरक्षण को लेकर कोई प्रावधान नहीं किया गया है। नतीजतन हर जगह प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से हकमारी लगातार हो रही है। 

कु.स.: अंतिम सवाल। दिल्ली में रविदास के मंदिर को त़ोड़े जाने पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?

शि.ति.: देखिए, दलितों, पिछड़ी जातियों में जागृति आई है। इस वर्ग के लोगों ने पढ़ाई-लिखाई शुरू कर दी है जिससे उनकी माली हालत ठीक होती जा रही है, वहीं सवर्ण अभी भी ऐंठन में हैं और काम करने से भागते हैं। नतीजतन सवर्णों की आर्थिक स्थिति खराब होती जा रही है। उपरोक्त घटना को सवर्णों के जलन और ईर्ष्या के रूप में देखा जाना चाहिए।  

(कॉपी संपादन : नवल)


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