एएमयू में ग्लोबल वार्मिंग पर मंथन, अहमदाबाद विवि में विरासत सहेजने की तकनीक पर चर्चा

जलवायु परिवर्तन का असर हमसे ज्यादा जंगलों पर पड़ रहा है। इसके विस्तार को जानने की कोशिश एएमयू में होगी तो अहमदाबाद में गूगल और माइक्रोसाफ्ट जैसी ख्यात कंपनियों के कर्ताधर्ता डेटा विश्लेषण को लेकर मिलेंगे। देश के अन्य शैक्षणिक और सांस्कृतिक संस्थानों की गतिविधियों की जानकारी पढें, इस हफ्तावार कॉलम में

विरासत की हिफाजत के लिए

अहमदाबाद विश्वविद्यालय द्वारा विरासत प्रबंधन की शिक्षा और प्रक्रिया को लेकर तीसरा विश्व सम्मेलन 6 से 8 दिसंबर 2019 को आयोजित किया गया है। इस सम्मेलन के जरिए विरासत प्रबंधन प्रक्रियाओं को आसानी से जाना जा सकेगा।

आयोजकों का कहना है कि इस आयोजन का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि विरासत की पहचान की प्रक्रिया निष्पक्ष मान्यताओं पर टिकी रहे और उसमें हर एक के विचार और आवाज समाहित हो। साथ ही एक ऐसा प्लेटफार्म तैयार करना होगा, जिससे विरासत प्रबंधन प्रक्रिया किसी भी संदर्भ में सर्वोत्तम हो, उसमें हर एक की बात और तर्क का समावेश किया जाए। 

थीसिस, प्रोजेक्ट्स या रिसर्च पेपर्स को लेकर स्नातक या परास्नातक स्तर के छात्र इसमें शामिल हो सकते हैं। विरासत से संबंधित किसी भी विषय पर अपने शोध का सार 500-700 शब्दों में लिखें। चयनित सार को 10-15 मिनट की मौखिक प्रस्तुति के लिए आमंत्रित किया जाएगा और बाकी योग्य सार के लिए पोस्टर प्रस्तुति विकल्प के लिए रखा जाएगा। एक सर्वश्रेष्ठ पेपर या पोस्टर अवार्ड (दस प्रस्तुतियों में से एक) भी सत्र के दौरान दिया जाएगा। विषय पर रुचि रखने वाले संगठन भी इसमें शिरकत कर सकते हैं। ज्यादा जानकारी के लिए ईमेल करें Heritage.conference@ahduni.edu.in पर।

अर्थतंत्र का विकास और विकासशील देशों का अर्थशास्त्र भारत के मायने में एक जैसे समान अर्थ वाले प्रतीत होते हैं। लेकिन जादवपुर विश्वविद्यालय कोलकाता के वार्षिक आम सम्मेलन से इसे समझने में ज्यादा मदद मिल सकेगी। विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग ने इसे लेकर 16 और 17 दिसंबर 2019 को सम्मेलन बुलाया है। इसके लिए देशभर से छात्रों, शोधार्थियों और शिक्षकों से शोध-पत्र और आलेख आमंत्रित किए गए हैं।

इस बारे में अपने आलेख और शोधपत्र का सार 150 शब्दों में juconference@gmail.com  पर भेजने चाहिए। इस सम्मेलन में लिखने वालों के पास अर्थशास्त्र के सैद्धांतिक और अनुभवजन्य विचार हों, तो ही लिखना चाहिए। बिदिशा चक्रवर्ती और सोमा मंडल इस सम्मेलन के संयोजक हैं।

समाज विज्ञान की शोध पद्धतियां

‘पश्चिमी एशियाई अध्ययन केंद्र’- जेएनयू, शोध-संवाद-रिसर्च फोरम, एवं नेहरू मेमोरियल लाइब्रेरी और म्यूजियम के संयुक्त तत्वावधान में आगामी 10-11 जनवरी 2020 को “मानविकी और सामाजविज्ञान में व्याप्त अनुसंधान पद्धतियां : उभरते रुझान एवं भारतीय संदर्भ” विषय पर दो-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी जेएनयू, नई दिल्ली में आयोजित की गई है।

यह संगोष्ठी में भागीदारी पूर्णतः निशुल्क होगी लेकिन इसके लिए सीमित संख्या में प्रतिभागियों का चयन किया जाएगा। प्रस्तावित संगोष्ठी में मानविकी और समाजविज्ञान के शोधार्थी भाग ले सकते हैं। संगोष्ठी हिंदी एवं अंग्रेजी भाषा में होगी। विस्तृत जानकारी के लिए डॉ. जाहिदुल दीवान को 7678245992 फोन नंबर पर संपर्क किया जा सकता है।

जलवायु परिवर्तन का भोजन पर असर

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) ने “भोजन पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव, जल और स्वास्थ्य : मुद्दे और चुनौतियां” विषयक 2 फरवरी, 2020 को राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया है। यह सम्मेलन साइंस फैकल्टी के भूगोल विभाग ने आयोजित किया है।

जलवायु परिवर्तन के कारण भारत के विभिन्न राज्यों में पेयजल की अनुप्लब्धता गंभीर संकट बनता जा रहा है

कार्यक्रम की रूपरेखा में बताया गया है कि प्रकृति ने सभी के लिए बहुत संतुलन के साथ हर आवश्यकताओं के अनुरूप चीजें दी हैं। प्रकृति प्रदत्त सुविधाओं को हासिल करने में मनुष्य अग्रणी रहा। हालांकि प्रारंभिक दौर में मनुष्य और पर्यावरण के बीच प्रारंभिक से ही सहअस्तित्व कायम रहा, लेकिन औद्योगिक क्रांति, तेज शहरीकरण, व्यावसायीकरण, उपभोक्तावाद, परिवहन और संचार और नई तकनीक के तेज साधनों ने स्थितियों को बदल दिया है। इन कारणों से संतुलन बिगड़ता जा रहा है। यह साफ है कि जलवायु परिवर्तन में भारत भी अछूता नहीं है।  

सम्मेलन के उप-विषय हैं : 1- कृषि, खाद्य सुरक्षा और पानी पर जलवायु परिवर्तन प्रभाव का आकलन, 2- विकासशील देशों में जलवायु परिवर्तन और खाद्य सुरक्षा का आश्वासन, 3- आहार की आदतें और भोजन की खपत के तरीकों में बदलाव, 4- खाद्य सुरक्षा, पोषण, सुरक्षा और स्थिरता, 5- बड़ी जलवायु घटनाएं- खाद्य सुरक्षा, जल संसाधन और मानव स्वास्थ्य, 6. ग्लोबल वार्मिंग का जंगलों पर प्रभाव, 7-आपूर्ति श्रृंखला, 8- जल संसाधन- तनाव, गुणवत्ता और प्रबंधन, 9- जल प्रबंधन नीतियां, नैतिकता और विनियमन, 10- जलवायु परिवर्तन का मत्स्य पालन और जलीय कृषि पर प्रभाव, आदि। अधिक जानकारी के लिए amugeog.deptt@gmail.com पर संपर्क करें। विस्तृत जानकारी हेतु आधिकारिक वेबसाइट का अवलोकन किया जा सकता है- www.conf.thegeographer.in

कामकाजी महिलाओं के हित

“असंगठित क्षेत्रों में कामकाजी महिलाएं: समकालीन भारत में मुद्दे और चुनौतियां” विषय पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने 5 फरवरी 2020 को विशेष सम्मेलन का आयोजन किया है। आयोजकों ने बताया कि इसका उद्देश्य असंगठित क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं की स्थिति को लेकर जागरूकता पैदा करना है। कुछ उप विषयों में शामिल हैं : असंगठित क्षेत्र में महिलाओं के मुद्दों और चुनौतियों का सामना कैसे करें, असंगठित क्षेत्र में महिलाओं की स्थिति में योगदान देने में सरकार की क्या भूमिका है, महिला और कार्यस्थल, कामकाजी क्षेत्र में लैंगिग असमानता। महिलाओं के मानव अधिकार, लैंगिक समानता और सशक्तिकरण। महिलाओं की सक्रियता और सफलता की कहानियां। स्वास्थ्य, सुरक्षा और कल्याण से संबंधित चिंताओं के साथ असंगठित क्षेत्र में महिलाओं की कौशल, रोजगार और सामाजिक समावेशन। महिला उद्यमी और उनके सामने आने वाली चुनौतियां। असंगठित क्षेत्र में महिलाओं की सुरक्षा। व्यावसायिक स्वास्थ्य संबंधी खतरे और असंगठित क्षेत्र की महिलाओं का हस्तक्षेप। असंगठित क्षेत्र / अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में महिलाओं से संबंधित मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं। अल्पसंख्यक और असंगठित क्षेत्र। महिला, प्रवासी श्रम और असंगठित क्षेत्र/ अनौपचारिक अर्थव्यवस्था। न्यूनतम मजदूरी और असंगठित क्षेत्र। असंगठित क्षेत्र (घरेलू, पर्यटन, बैंकिंग, स्वास्थ्य देखभाल) के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी, महिलाओं और स्वास्थ्य, मातृत्व और पितृत्व अवकाश, असंगठित क्षेत्र में एकल माताओं के लिए बाधाएं। लिंग आधारित हिंसा, सशस्त्र संघर्षों में महिलाएं और असंगठित क्षेत्र में संकट। महिलाओं की शिक्षा और प्रशिक्षण, महिलाओं की उन्नति का संस्थागत तंत्र, असंगठित क्षेत्र में टेक्नोलॉजी में लिंग-अंतर को खत्म करना।


आयोजकों के मुताबिक, विषय से जुड़े प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संबद्ध अन्य मुद्दों पर आलेख-शोध भेजे जा सकते हैं। चयनित सर्वश्रेष्ठ 15 शोधपत्र-आलेख संपादित पुस्तक में प्रकाशित किए जाएंगे। सम्मेलन के संयोजक प्रोफेसर इमरान सलीम (वाणिज्य विभाग, एएमयू) हैं। सम्मेलन सचिव प्रोफेसर आसिया चौधरी वाणिज्य विभाग से हैं। संयोजक इमरान सलीम का फाइनेंस, माइक्रो फाइनेंस, ह्यूमन कैपिटल मैनेजमेंट, एंटरप्रेन्योरशिप में बड़ा नाम रहा है। उनसे मोबाइल नंबर 8449708872 पर संपर्क किया जा सकता है। ईमेल पता है: iscom@amu.ac.in, iscom.amu@gmail.com।

(कॉपी संपादन : सिद्धार्थ/नवल)


फारवर्ड प्रेस वेब पोर्टल के अतिरिक्‍त बहुजन मुद्दों की पुस्‍तकों का प्रकाशक भी है। एफपी बुक्‍स के नाम से जारी होने वाली ये किताबें बहुजन (दलित, ओबीसी, आदिवासी, घुमंतु, पसमांदा समुदाय) तबकों के साहित्‍य, सस्‍क‍ृति व सामाजिक-राजनीति की व्‍यापक समस्‍याओं के साथ-साथ इसके सूक्ष्म पहलुओं को भी गहराई से उजागर करती हैं। एफपी बुक्‍स की सूची जानने अथवा किताबें मंगवाने के लिए संपर्क करें। मोबाइल : +917827427311, ईमेल : info@forwardmagazine.in

About The Author

Reply