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क्या इसी तरह के धत्कर्म से विश्वगुरु बनेगा भारत?

इस संबंध में हमने पूर्व सांसद मो. अदीब साहब से भी बात की जो रिटायरमेंट के बाद गुड़गांव में ही रहते हैं। उन्होंने बताया कि 2017 में गुड़गांव प्रशासन ने खुद 37 जगहों पर जुमे की नमाज की इजाजत दी थी। ये जगहें सड़कें और बाजार से दूर की हैं। मगर इन जगहों पर नमाज पढ़ने नही दिया जा रहा है। वह अब यूटर्न ले चुके हैं। पढ़ें, अली अनवर का यह आलेख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत को विश्वगुरु बनाने की बात करते हैं। मगर उन्ही के राज में दिल्ली से सटे हरियाणा के गुरुग्राम में सरकार की शह पर कुछ उपद्रवी ऐसा धत्कर्म कर रहे हैं, जिसकी खबर पूरी दुनिया में जा रही है। गुरुग्राम का प्रशासन मुसलमानों को जुमा की नमाज पढने की जगह नही दे रहा है। यहां मज़बूरी में लोग खुलें में नवाज पढ़ते हैं। नमाज पढ़ने उन जगहों पर 20-25 उपद्रवी इकट्ठा होकर जय श्री राम के नारे लगाते तथा भजन करने लगते हैं। महीनों से प्रशासन इसको मूकदर्शक बना देख रहा है। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी कहा है कि खुले में नमाज बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

भाजपा की खट्टर सरकार ने ही गुड़गांव का नाम बदल कर गुरुग्राम किया। ग्लोबल सिटी कहे जाने वाले गुरुग्राम में देश-दुनिया की कई कंपनियों के कॉर्पोरेट ऑफिस और बड़े होटल भी हैं। गुरुग्राम से सटे ही इंटरनेशनल एअरपोर्ट भी है। यहां से किस तरह का संदेश पूरी दुनिया में जा रहा है?

क्या इसी तरह से भारत विश्वगुरु बनेगा? गुरुग्राम 113 सेक्टरों में फैला हुआ है। इसकी देख-रेख का काम गुरुग्राम विकास प्राधिकार करता है। जानकार बताते हैं कि 20 वर्षो में यहां करीब 40 मंदिरों, एक दर्जन चर्च तथा 9 गुरुद्वारों को बनाने की इजाजत मिली है। जहां तक मुसलमानों का सवाल है तो 2004 में एक ट्रस्ट को 900 गज जमीन मिली। इस पर मस्जिद बनाने का काम शरू हुआ। अभी इसका बेसमेंट ही बना था की कुछ लोगों ने विवाद शुरू कर दिया। इस मस्जिद की इस बेसमेंट में करीब 150 लोग एक समय में नमाज पढ़ सकते हैं। 

उक्त मस्जिद को चार फ्लोर तक बनाने की योजना थी, लेकिन विवाद के कारण ऐसा नही हो रहा है। अभी यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। दूसरी मस्जिद वक्फ बोर्ड की जमीन पर राजीव चौक में स्थित है। इसका रकबा करीब एक एकड़ का है। इस पर भी कुछ लोगों ने अड़ंगा लगा रखा है। हरियाणा हाई कोर्ट में मुस्लिम पक्ष की जीत हो चुकी है। बावजूद इसके सरकार के दबाव में इसको बनाने की इजाजत प्रशासन नही दे रहा है। 

यह भी बताते चलें कि खुले में नमाज पढने वाले इन लोगों में ज्यादातर पसमांदा मुसलमान ही होते हैं। इनके पास कोई चारपहिया या दो पहिया गाड़ियां नहीं होतीं। भला किसको शौक नही होता कि थोड़ा दूर जाकर ही सही, एयरकंडीशन लगी तथा कारपेट बिछी मस्जिद में नमाज पढ़ें।

गुरुग्राम की आबादी काफ़ी सघन है। यहां स्थायी रूप से बसे या किरायेदारों के अलावा दिल्ली तथा हरियाणा के आसपास के लोग हजारों की संख्या में नौकरी-पेशा के लिए हर रोज आते हैं। रेहड़ी, ठेला चलने वाले, दिहाड़ी मजदूरों की आमद भी भारी संख्या में होती है। ऐसे में जुमा के दिन नमाज पढने वालों की संख्या बढ़ जाती है। इसी स्थिति में लोगो ने खाली सरकारी जगहों पर नमाज पढना शुरू किया। 

कोई शौक से खुले में नमाज नही पढता। गर्मी हो या ठंड अथवा बरसात का मौसम। धूल-धक्कड़ या हो या शीततलहर चले, मज़बूरी में लोग खुले आसमान के नीचे नमाज पढ़ते हैं। करीब एक घंटा का समय शुक्रवार को इस फर्ज को अदा करने में लगता है। नियोजकों द्वारा मुश्किल से इन्हें एक घंटे की ही छुट्टी मिलती है। इसके फ़ौरन बाद उन्हें काम पर लौटना होता है। इस तरह अपने कार्यस्थल के आसपास ही नमाजी जा पाते हैं। 

यह भी बताते चलें कि खुले में नमाज पढने वाले इन लोगों में ज्यादातर पसमांदा मुसलमान ही होते हैं। इनके पास कोई चारपहिया या दो पहिया गाड़ियां नहीं होतीं। भला किसको शौक नही होता कि थोड़ा दूर जाकर ही सही, एयरकंडीशन लगी तथा कारपेट बिछी मस्जिद में नमाज पढ़ें। कम-से-कम बिजली फैन चलते तथा चटाई पर बैठकर मस्जिदों में जुमे की नमाज अदा करते, सुकून से खुतबा सुनते। पर इनके नसीब में ऐसा कहां होता है?

इसी तरह के एक अपने जानने वाले बिहारी मजदूर, जो गुड़गांव में काम करता है, से पूछा तो उसने कहा कि सर, हम लोग तो फूटपाथी लोग हैं। आसानी से किसी के निशाने पर आ जाते हैं। हमारी फरियाद कौन सुनने वाला है। यह मजदूर थोड़ा बहुत शेरो-शायरी भी करता है। यूं कहें कि अच्छी तूकबंदी भी कर लेता है। लगे हाथ उसने दो लाइन सुना भी दिया–

निहत्थे गरीबों की ये जालिम जान लेते हैं,
न जाने कैसा बदला ये बेईमान लेते है।

इसके बाद उसने मुझसे इस बात का आश्वासन भी ले लिया कि उसका नाम जाहिर न किया जाय, क्योंकि यहां का माहौल गड़बड़ चल रहा है। 

जाहिर है मजदूर ने पते की बात कही है। यह तथ्य है कि जहां कहीं भी इस तरह के दंगे-फसाद होते हैं, वहां गरीब पसमांदा मुसलमान ही ज्यादा संख्या में मारे, काटे और जलाये जाते हैं। दिल्ली के हालिया दंगे में भी यही हुआ है। इसके पूर्व माबलिचिंग, गोरक्षा, घर वापसी और लव जेहाद के नामपर मारे गये ज्यादातर लोग पसमांदा मुसलमान ही थे। हरियाणा के मेवात इलाके को इसका खास केंद्र बनाया गया। मौजूदा हुकूम के लोग दिल्ली से सटे गुड़गांव-मेवात इलाके को हिंदुत्व की प्रयोगशाला बनाना चाहते हैं।

धार्मिक अल्पसंख्यकों पर बढ़े हैं इस तरह के हमले

हमने गुड़गांव के पूर्व मंत्री सुखबीर कटारिया से इस संबंध में बात की। उनका कहना है कि भाजपा के छुटभैय्या नेताओं की इन करतूतों को थोड़ी देर नजरंदाज भी कर लिया जाय मगर, मुख्यमंत्री खट्टर साहब का रवैया अत्यंत चिंताजनक है। गुड़गांव के सीनियर एडवोकेट मंदीप शेहरा का कहना है कि भाजपा उत्तर प्रदेश चुनाव के मद्देनजर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए ऐसा कर रही है। मगर हिन्दू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी इसको समझ गए हैं। लिहाजा भाजपा को चुनाव में कोई लाभ नही होगा। 

इस संबंध में हमने पूर्व सांसद मो. अदीब साहब से भी बात की जो रिटायरमेंट के बाद गुड़गांव में ही रहते हैं। उन्होंने बताया कि 2017 में गुड़गांव प्रशासन ने खुद 37 जगहों पर जुमे की नमाज की इजाजत दी थी। ये जगहें सड़कें और बाजार से दूर की हैं। मगर इन जगहों पर नमाज पढ़ने नही दिया जा रहा है। यही नहीं मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने पूर्व में इन निर्धारित जगहों पर नमाज पढने की छूट होने का ऐलान किया था। मगर वह अब यूटर्न ले चुके हैं। कहा जाता है कि केन्द्रीय मंत्री अमित शाह के निर्देशों पर उन्होंने कहा है कि खुले में नमाज को बर्दाश्त नही किया जायेगा। 

अदीब साहब का यह भी कहना है कि राजीव चौक वाले मस्जिद के बारे में हरियाणा के हाई कोर्ट के फैसले को लागू नही किये जाने पर वह कोर्ट की मानहानि का मुकदमा भी दर्ज कराएंगे। 

इन तमाम बातों के बीच एक अच्छी बात यह है कि स्थानीय हिन्दू भाईयों ने भी नफरतबाजों का साथ नही दिया है। मुसलमान भी काफी धैर्य और शांति से काम ले रहे हैं। वे उकसावे में नहीं आ रहे हैं। अपनी नमाज के दरमियान हिन्दू-मुस्लिम अवाम के दिलों में मोहब्बत मिल्लत की दुआओं के साथ हर जुमे की नमाज खत्म करते हैं। मोदी जी के विश्वगुरु भारत में न सिर्फ मुसलमानों बल्कि ईसाइयों, दलितों, किसानों, मजदूरों और आदिवासियों के साथ भी ऐसा हो रहा है। उन्हें उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है।

एलायंस फार डिफेंडिंग फ्रीडम के नेशनल कोऑर्डिनेटर ए. सी. माइकल का कहना है कि जबरिया धर्मपरिवर्तन करने का झूठा इल्जाम लगाकर देश भर में गिरजाघर पर हमले तथा मारपीट की घटनाएं बढ़ गयी हैं। पिछले 9 महीने में विभिन्न राज्यों में इस तरह की 216 घटनाएं घटी हैं। इस दरमियान हरियाणा में 9 घटनाएं हुई हैं। सैकड़ों निर्दोष ईसाइयों को झूठे मुकदमे में जेल में बंद किया गया है। कर्नाटक का उपद्रव अत्यंत चिंता की बात है। माइकल साहब का कहना है कि कानून का राज खत्म हो रहा है। हमारे संवैधानिक अधिकारों पर चोट हो रही है। ऐसे में सबको मिलकर शांतिपूर्ण तरीके से लड़ना होगा।

(संपादन : नवल/अनिल)


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लेखक के बारे में

अली अनवर

लेखक पूर्व राज्यसभा सांसद तथा ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के संस्थापक अध्यक्ष हैं

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