बहुजन साप्ताहिकी : केंद्र क्यों करती है आंबेडकर जयंती के मौके पर ‘क्लोज्ड होली डे’ की घोषणा?

बहुजन साप्ताहिकी के तहत पढ़ें सारनाथ में भिक्षु चंदिमा के नेतृत्व में बौद्धों के जुटान के बारे में। उन्हें सारनाथ में प्रशासनिक अधिकारियों ने पूजा-अर्चना करने से रोक दिया था। साथ ही पढ़ें तीसरे ओमप्रकाश वाल्मीकि साहित्य सम्मान की खबर

भारत सरकार ने एक बार फिर डॉ. आंबेडकर की जयंती के मौके पर घोषित राष्ट्रीय अवकाश की सूची से अलग इसे क्लोज्ड ‘होली डे’ करार दे दिया है। इससे संबंधित एक कार्यालय ज्ञापांक बीते 4 अप्रैल, 2022 को भारत सरकार के कार्मिक मंत्रालय (डीओपीटी) द्वारा जारी किया गया। इस ज्ञापांक में कहा गया है कि मंत्रालय ने निगोशिएबुल इंस्ट्रूमेंट एक्ट-1881 के तहत निहित प्रावधानों के अनुसार यह निर्णय लिया है कि अब डॉ. आंबेडकर जयंती के मौके पर अवकाश राष्ट्रीय महत्व का अवकाश न होकर ‘क्लोज्ड होली डे’ होगा।

बताते चलें कि भारत सरकार का कार्मिक मंत्रालय तीन तरह के अवकाशों को मान्यता देता है। इनमें से एक राष्ट्रीय पर्व के अवकाश हैं। इस श्रेणी के तहत स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त), गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) और गांधी जयंती (2 अक्टूबर) के मौके पर घोषित अवकाश हैं। दूसरी श्रेणी के तहत पर्व-त्यौहारों के मौके पर दिये जानेवाले अवकाश शामिल हैं। हालांकि इनमें ही कुछ अन्य महापुरुषों की जयंतियों को भी शामिल किया गया है। तीसरी श्रेणी के तहत ‘क्लोज्ड होली डे’ है। इसी श्रेणी के तहत डॉ. आंबेडकर की जयंती के मौके पर घोषित किया जानेवाला अवकाश भी है। पहली बार इसकी घोषणा 8 अप्रैल, 2020 को की गई थी। तब से हर साल केंद्र सरकार इसकी समीक्षा करती रही है तथा इसकी घोषणा करती रही है।

केंद्रीय मंत्रालय में कार्यरत बताते हैं कि ‘क्लोज्ड होली डे’ के रूप में डॉ. आंबेडकर की जयंती के अवकाश को शामिल किये जाने संबंधी अधिसूचना सभी केंद्रीय मंत्रालयों व संस्थानों को जारी किया गया है। क्लोज्ड होली डे व राष्ट्रीय पर्व के मौके पर अवकाश के बीच अंतर के सवाल पर वह बताते हैं कि क्लोज्ड होली के मौके पर जिन मंत्रालयों, संस्थाओं में लोगों को काम करना पड़ता है, उनके अलग से भत्ता नहीं दिया जाता है, जैसे 15 अगस्त या 26 जनवरी या 2 अक्टूबर के मौके पर दिया जाता है। इस संबंध में नार्दन कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल), झारखंड में संवैतनिक अवकाश की मांग कोलियरी मजदूर सभा एटक के महामंत्री अजय कुमार ने बीते 2 अप्रैल को की है। 

सारनाथ में एकजुट हुए बौद्ध भिक्षु

बीते 3 अप्रैल, 2022 को उत्तर प्रदेश के सारनाथ में खास दृश्य दिखा। दलित बौद्ध भिक्षु चंदिमा के नेतृत्व में हजारों की संख्या में बौद्ध धर्मावलंबियों ने धमेख स्तूप स्थल पर जाकर पूजा अर्चना की। इसके पहले एक रैली भी निकाली गयी। 

सनद रहे कि सारनाथ, बनारस से करीब 10 किलोमीटर पूर्वोत्तर में स्थित प्रमुख बौद्ध तीर्थस्थल है। बोधगया में ज्ञान प्राप्ति के बाद बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश यहीं दिया था, जिसे ‘धर्म चक्र प्रवर्तन’ भी कहा जाता है। इसे बौद्ध मत के प्रचार-प्रसार का आरंभ कहा जाता है। 

भिक्षु चंदिमा के नेतृत्व एकजुट हुए बौद्ध धर्मावलंबी

दरअसल, भिक्षु चंदिमा को इसके पहले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकारियों ने धमेख स्तूप परिसर में अंदर जाने से रोक दिया था। यह घटना 23 मार्च, 2022 को हुई। धम्म शिक्षण संस्थान के संस्थापक भिक्षु चंदिमा हैदराबाद के संदीप कामले, वर्षा कामले, इंदू भिक्षु धर्म रश्मि, आनंद मौर्य और भैयालाल पाल के साथ सारनाथ के धमेख स्तूप पहुंचे। लेकिन उन्हें स्तूप के दरवाजे पर ही रोक दिया गया। जब उन्होंने सवाल उठाया तो मौके पर मौजूद अधिकारियों ने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकारी के अनुसार स्तूप स्थल पर पूजा-अर्चना की अनुमति नहीं है। इस संबंध में भिक्षु चंदिमा ने प्रतिवाद किया और सवाल पूछा कि यह कहां लिखा है कि बौद्ध धर्मावलंबी धमेख स्तूप स्थल पर पूजा नहीं कर सकते।

उनके सवाल का जवाब देने के बजाय प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें कहा कि यदि वे पूजा करना चाहते हैं तो उन्हें 15 दिन पहले आवेदन करना होगा और अनुमति भी तभी मिलेगी जब उनका आवेदन स्वीकार किया जाएगा। 

इस घटना के विरोध में भिक्षु चंदिमा और उनके साथी वहीं स्तूप के मुख्य द्वार के बाहर धरने पर बैठ गए। बाद में उन्होंने इसके खिलाफ और धमेख स्तूप स्थल पर पूजा अर्चना का अधिकार हासिल करने के लिए अभियान चलाया। इस क्रम में उन्होंने बिहार के बोधगया के भिक्षु संघ से मुलाकात की तथा उन्हें यूपी सरकार के द्वारा किये गये दुर्व्यवहार व अवैधानिक आदेश के बारे में जानकारी दी। इसके अलावा भिक्षु चंदिमा ने सोशल मीडिया के जरिए लोगों को संदेश दिया कि इस तरह के असंवैधानिक आदेशों की वापसी के लिए सहयोग करें।

साहित्य चेतना मंच ने की तृतीय ओमप्रकाश वाल्मीकि स्मृति साहित्य सम्मान की घोषणा

साहित्यिक संस्था ‘साहित्य चेतना मंच’, सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) ने अपने तृतीय ‘ओमप्रकाश वाल्मीकि स्मृति साहित्य सम्मान’ के लिए दस नामों की घोषणा की। साहित्य चेतना मंच के अध्यक्ष डॉ. नरेन्द्र वाल्मीकि ने बताया कि यह सम्मान लेखकों के साहित्यिक एवं सामाजिक कार्यों को ध्यातव्य में रखकर चयनित किया जाता हैं। इस बार दिल्ली से डॉ. मुकेश मिरोठा और डॉ. नीलम, झारखंड से विपिन बिहारी, उत्तराखंड से डॉ. राजेश पाल, पश्चिम बंगाल से प्रदीप कुमार ठाकुर, हरियाणा से रमन कुमार, राजस्थान से सतीश खनगवाल, तेलंगाना से उषा यादव, गुजरात से डॉ. खन्नाप्रसाद अमीन और उत्तर प्रदेश से बच्चा लाल ‘उन्मेष’ का नाम चयनित किया गया है। 

बताते चलें कि दलित साहित्य में उत्कृष्ट योगदान हेतु ‘ओमप्रकाश वाल्मीकि स्मृति साहित्य सम्मान’ 30 जून को साहित्यकार ओमप्रकाश वाल्मीकि के जन्मदिवस के अवसर पर प्रदान किया जाता है। संस्था के महासचिव श्याम निर्मोही ने बताया कि ओमप्रकाश वाल्मीकि के विचारों को जन-जन तक पहुचना हमारा उद्देश्य है। यह सम्मान ओमप्रकाश वाल्मीकि के जन्मदिवस 30 जून 2022 को ऑनलाइन कार्यक्रम में दिया जाएगा।

(संपादन : अनिल)


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