h n

बहुजन साप्ताहिकी : जातिगत जनगणना को लेकर कटघरे में केंद्र, 2 नवंबर से होगी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

इस सप्ताह पढ़ें ओबीसी क्रीमीलेयर की सीमा बढ़ाने और मध्य प्रदेश में जयस के द्वारा अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर 80 सीटों पर दावेदारी के संबंध में। साथ ही, यह कि भारत सरकार के 22 में से 14 श्रम न्यायालयों में पूर्णकालिक जज नहीं हैं 

आगामी 2 नवंबर, 2022 को सुप्रीम कोर्ट में जातिगत जनगणना को लेकर सुनवाई शुरू होगी। इस संबंध में एक याचिका ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ ओबीसी इंप्लॉयज वेलफेयर फेडरेशन के महासचिव जी. करुणानिधि द्वारा दायर की गई है। इस आशय की सूचना देते हुए उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा जातिगत जनगणना कराने से इंकार कर दिया गया है। इसी संबंध में उन्होंने एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी। उन्होंने यह भी कहा कि जातिगत जनगणना देश भर के ओबीसी लोगों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक है। इसके लिए सामाजिक न्याय की राजनीति करनेवाले सभी दलों के नेताओं द्वारा केंद्र पर दबाव बनाने की आवश्यकता है।

ओबीसी आय सीमा में वृद्धि जल्द, लेकिन कब? सरकार ने नहीं खोले पत्ते

एक बार फिर यह सवाल अधर में लटक गया है कि केंद्र सरकार पिछड़ा वर्ग के लिए क्रीमीलेयर की सीमा कब बढ़ाएगी। दरअसल, यह चर्चा पिछले दो साल से है कि केंद्र क्रीमीलेयर की सीमा को 8 लाख से बढ़ाकर 12 लाख रुपए करने पर विचार कर रही है। लेकिन धरातल पर इसे अंजाम नहीं दिया गया है। इस संबंध में ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ ओबीसी इंप्लॉयज वेलफेयर फेडरेशन द्वारा मांगी गई सूचना के जवाब में केंद्रीय सामाजिक न्याय व अधिकारता मंत्रालय ने केवल इतना ही कहा है कि सरकार इस मामले में जल्द ही फैसला लेगी। सनद रहे कि यह सूचना फेडरेशन के द्वारा इस साल जनवरी माह में मांगी गई थी, जिसे मंत्रालय ने नौ महीने बाद गत 19 अक्टूबर को उपलब्ध कराया है।  

बिना जज के भारत सरकार की 14 श्रम अदालतें, रेलवे के बहुजन कर्मियों ने उठायी आवाज

भारत सरकार के अधीन विभागों, जिनमें भारतीय रेल भी शामिल है, के कर्मियों के हजारों मामले विभिन्न श्रम न्यायालयों में लंबित हैं। लेकिन उनकी सुनवाई नहीं की जा रही है। इसकी वजह यह है कि देश भर में भारत सरकार के द्वारा गठित 22 श्रमिक न्यायालयों में से 14 न्यायालयों में पूर्णकालिक जज नहीं हैं। इस संबंध में नागपुर के स्वतंत्र रेलवे बहुजन कर्मचारी यूनियन ने केंद्र सरकार का ध्यान आकृष्ट किया है। यूनियन के सचिव विकास गौड़ ने केंद्र सरकार को भेजे अपने पत्र में कहा है कि पूर्णकालिक जजों की नियुक्ति नहीं होने से लंबित मामलों की सुनवाई लंबित है। इसका शिकार हजारों की संख्या में कर्मचारीगण हैं। इनमें अधिक संख्या दलित-बहुजनों की है जो ग्रुप सी और ग्रुप डी में शामिल हैं। विकास गौड़ ने बताया कि इस बाबत 7 अप्रैल, 2022 को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत केंद्रीय श्रम मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक नागपुर, कानपुर, चेन्नई, हैदराबाद, मुंबई (दो पद), कोलकाता (दो पद), चंडीगढ़, आसानसोल, दिल्ली (दो पद), भुवनेश्वर और गुवाहाटी के श्रम न्यायालय में पूर्णकालिक जजों की प्रतिनियुक्ति नहीं की गई है। इन न्यायालयों की अतिरिक्त जिम्मेदारी जिला सत्र न्यायाधीशों को दी गई है।

मध्य प्रदेश की 80 विधानसभा सीट पर चुनाव लड़ेगी जयस

जय आदिवासी युवाशक्ति (जयस) अगले साल मध्य प्रदेश में होनेवाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गया है। गत 20 अक्टूबर, 2022 को धार जिले के कुक्षी में आयोजित “मिशन युवा नेतृत्व 2023 जयस महापंचायत” को संबोधित करते हुए इसके राष्ट्रीय संरक्षक व मनावर से विधायक डा. हिरालाल अलावा ने कहा कि संगठन 80 विधानसभा क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार उतारेगा। महापंचायत में वर्ष 2024 में होनेवाले लोकसभा चुनावों को लेकर भी विचार मंथन किया गया। 

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित डा. हिरालाल अलावा व अन्य नेता

इस मौके पर गुजरात राज्य के झगड़िया से विधायक भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) के संस्थापक दिग्गज आदिवासी नेता छोटू भाई वसावा ने कहा कि भारत सरकार आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन को छीनने का अमृत महोत्सव मना रही है। यह शर्म की बात है। उन्होंने कहा कि हम संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई हर राज्य में लड़ेंगे। 

महापंचायत को मंडला जिले के निवास से विधायक डॉ. अशोक मर्सकोले, तेलंगाना के जयस प्रदेश अध्यक्ष नरसिम्हा राव क़त्राम, झारखंड जयस प्रदेश अध्यक्ष संजय पहान, राजस्थान जयस प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र कटारा, गुजरात जयस प्रभारी हितेश राणा, अनिल रावत (आदिवासी एकता परिषद राष्ट्रीय अध्यक्ष), गजानंद ब्राह्मणे (आदिवासी मुक्ति संगठन), शिवभानु मंडलोई (मध्यप्रदेश जयस प्रदेश संरक्षक) सहित अनेक नेताओं ने संबोधित किया।

(संपादन : अनिल)

लेखक के बारे में

नवल किशोर कुमार

नवल किशोर कुमार फॉरवर्ड प्रेस के संपादक (हिन्दी) हैं।

संबंधित आलेख

बहस-तलब : कौन है श्वेता-श्रद्धा का गुनहगार?
डॉ. आंबेडकर ने यह बात कई बार कही कि जाति हमारी वैयक्तिकता का सम्मान नहीं करती और जिस समाज में वैयक्तिकता नहीं है, वह...
ओबीसी के हितों की अनदेखी नहीं होने देंगे : हंसराज गंगाराम अहिर
बहुजन साप्ताहिकी के तहत इस बार पढ़ें ईडब्ल्यूएस संबंधी संविधान पीठ के फैसले को कांग्रेसी नेत्री जया ठाकुर द्वारा चुनाैती दिये जाने व तेलंगाना...
धर्मांतरण देश के लिए खतरा कैसे?
इस देश में अगर धर्मांतरण पर शोध किया जाए, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आएंगे। और वह यह कि सबसे ज्यादा धर्म-परिवर्तन इस देश...
डिग्री प्रसाद चौहान के खिलाफ मुकदमा चलाने की बात से क्या कहना चाहते हैं तुषार मेहता?
पीयूसीएल की छत्तीसगढ़ इकाई के अध्यक्ष और मानवाधिकार कार्यकर्ता डिग्री प्रसाद चौहान द्वारा दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान तुषार मेहता...
भोपाल में आदिवासियों ने कहा– हम बचा लेंगे अपनी भाषा, बस दमन-शोषण बंद करे सरकार
अश्विनी कुमार पंकज के मुताबिक, एक लंबे अरसे तक राजकीय संरक्षण हासिल होने के बाद भी संस्कृत आज खत्म हो रही है। वहीं नागा,...