आंबेडकरवाद की रोशनी में आरएसएस का द्विज राष्ट्रवाद (परत-दर-परत पड़ताल)
लेखक : भंवर मेघवंशी
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“हम जानेंगे कि आरएसएस ने डॉ. आंबेडकर को लेकर कैसे-कैसे विचार रखे और फिर कैसे खुद को बदला और उसके कारण क्या रहे। साथ ही उन तमाम दावों की भी पड़ताल करेंगे जो आज संघ विचार परिवार की तरफ से किए जा रहे हैं या किए जाते रहे हैं। हमने संघ के दावों की पड़ताल उनके ही साहित्य से करने का निश्चय किया। यह इसलिए भी जरूरी है कि जब भी संघ के बारे में कोई भी बात कही जाती है तो आरएसएस की तरफ से कहा जाता है कि “संघ को समझना है तो संघ में आकर देखो, बाहर से और दूर से संघ समझ में नहीं आता।” इसलिए हमने सोचा कि संघ पर बाहरी लोगों द्वारा लिखे गए साहित्य से हम संघ का ‘आंबेडकर प्रेम’ नहीं समझ पाएंगे। हमें संघ के स्वयंसेवकों, विचारवानों और संघ के पदाधिकारियों के लेखन से ही सत्य के स्रोतों की तलाश करनी होगी।”
– भंवर मेघवंशी (इसी किताब में)
“यह पुस्तक हमारी सत्यशोधक परंपरा का हिस्सा है। यह किताब आंबेडकर और आरएसएस के बीच के फर्क व असहमतियों के बारे में बताती है।”
– भंवर मेघवंशी (16 जनवरी, 2026 को विश्व पुस्तक मेला, नई दिल्ली में इसी पुस्तक के लोकार्पण समारोह में)
“इस किताब में आरएसएस के सौ वर्षों का सफर दर्ज है। संघ समाज में वर्णगत श्रेणी बनाए रखना चाहता है, जबकि बाबा साहेब समानता, बंधुत्व और लोकतंत्र चाहते हैं। बाबा साहेब और आरएसएस के बीच में जो वैचारिक टकराव हैं, यह किताब इसी पर आधारित है। मेघवंशी जी ने संविधान के संबंध में आरएसएस की आपत्तियों के बारे में हर चीज को पूरे तथ्यों के साथ रखा है। और उन्होंने आंबेडकर को अपना बताने के आरएसएस के एजेंडे को उजागर कर दिया है।”
– प्रियंका भारती, शोधार्थी, जेएनयू व राष्ट्रीय प्रवक्ता, राष्ट्रीय जनता दल (16 जनवरी, 2026 को विश्व पुस्तक मेला, नई दिल्ली में इसी पुस्तक के लोकार्पण समारोह में)
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